बस्तर से राष्ट्रीय कृषि नेतृत्व के शिखर तक पहुंचे डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी, ‘एग्री-100’ में चयनित

Dr. Rajaram Tripathi rises from Bastar to the pinnacle of national agricultural leadership; selected for ‘Agri-100’

रविवार दिल्ली नेटवर्क

कृषि नवाचार, जैविक खेती और किसान सशक्तीकरण के लिए ‘एग्री-100’ राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित

बेंगलुरु/ कोंडागांव : छत्तीसगढ़ के बस्तर से निकलकर देश में जैविक एवं टिकाऊ कृषि, कृषि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और किसान सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे डॉ. राजाराम त्रिपाठी को देश के प्रतिष्ठित ‘एग्री-100’ (THE AGRI-100) कृषि नेतृत्व सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। उन्हें कृषि के भविष्य को दिशा देने वाले देश के 100 अग्रणी व्यक्तियों एवं संस्थाओं में शामिल किया गया है। यह सम्मान कृषि जागरण तथा मेस्से म्यूनिख इंडिया (Messe München India) के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया,नाबार्ड आदि के तत्वावधान में आयोजित प्रथम ‘एग्री-100’ सम्मान समारोह में प्रदान किया गया। समारोह 1 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र (BIEC), बेंगलुरु में आयोजित हुआ। एग्री-100 का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नेतृत्व, प्रभाव, नवाचार, योगदान और दीर्घकालिक विरासत के आधार पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान देना है। डॉ. त्रिपाठी का चयन कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले उनके दीर्घकालिक कार्यों और किसानों के लिए विकसित किए गए अभिनव एवं प्रकृति-अनुकूल कृषि मॉडलों के लिए किया गया। यह चयन कृषि, विज्ञान, अनुसंधान, उद्योग, नीति, तकनीक, उद्यमिता और किसान नेतृत्व से जुड़े विशेषज्ञों वाले 58 सदस्यीय उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल की प्रक्रिया के बाद हुआ।

काली मिर्च की उन्नत किस्म से प्राकृतिक हरितगृह तक नवाचार

डॉ. राजाराम त्रिपाठी मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक तथा अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक हैं। उन्होंने बस्तर की पारंपरिक कृषि एवं वनौषधीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक कृषि तकनीक और बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ने का लगातार प्रयास किया है। उनके प्रमुख कृषि नवाचारों में ‘मां दंतेश्वरी ब्लैक पेपर-16’ (MDBP-16) काली मिर्च की उन्नत एवं अधिक उत्पादन देने वाली किस्म विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके साथ ही उनका ‘प्राकृतिक हरितगृह’ (Natural Greenhouse) मॉडल भी किसानों के लिए कम लागत में संरक्षित खेती की लाभकारी संभावनाएं विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन नवाचारों के पीछे डॉ. त्रिपाठी की मूल अवधारणा ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें जहर मुक्त उत्पादन के साथ किसान की आय, मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा को भी समान महत्व मिले।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कृषि जगत की हस्तियों की मौजूदगी

सम्मान समारोह में भारत और विदेशों से कृषि, खाद्य सुरक्षा, विज्ञान, नीति, उद्योग एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। समारोह में मेस्से म्यूनिख इंडिया के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भूपिंदर सिंह, कृषि जागरण एवं एग्रीकल्चर वर्ल्ड के संस्थापक एवं प्रधान संपादक तथा एग्री-100 आयोजन समिति के अध्यक्ष एम. सी. डोमिनिक, तथा एग्री-100 निर्णायक मंडल के अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद प्रमुख रूप से मौजूद रहे। निर्णायक मंडल के सह-अध्यक्षों में डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. त्रिलोचन महापात्र शामिल रहे। समारोह में नीदरलैंड सरकार के खाद्य सुरक्षा, मत्स्य एवं बागवानी मंत्री सिल्वियो एरकेन्स, कॉफी बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश एम. एल., पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. तरुण श्रीधर, तथा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र से जुड़े भारत और विदेश के अनेक विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह में डॉ. राजाराम त्रिपाठी को विशिष्ट आमंत्रित कृषि नेतृत्वकर्ताओं में स्थान दिया गया। बाद में आयोजित सम्मान समारोह में देश के चयनित 100 कृषि नेतृत्वकर्ताओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

सम्मान को बताया बस्तर के किसानों का सम्मान

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान से कहीं अधिक बस्तर के किसानों, आदिवासी समुदायों, जैविक खेती करने वाले किसानों और प्रकृति आधारित कृषि पर विश्वास करने वाले लोगों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि का भविष्य ऐसी व्यवस्था में है, जिसमें किसान केवल उत्पादन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी, प्रकृति का संरक्षक और अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त करने वाला स्वावलंबी नागरिक बने। डॉ. त्रिपाठी ने इस सम्मान के लिए कृषि जागरण, एग्री-100 के निर्णायक मंडल, आयोजन समिति के अध्यक्ष एम. सी. डोमिनिक, शाइनी डोमिनिक,ममता जैन सहित पूरी आयोजन समिति तथा मेस्से म्यूनिख इंडिया के प्रति आभार व्यक्त किया। बस्तर के एक किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय कृषि नेतृत्व के इस प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचने वाले डॉ. त्रिपाठी की यह उपलब्धि स्थानीय ज्ञान, कृषि नवाचार और किसान-केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखी जा रही है। आयोजकों ने एग्री-100 को कृषि नेतृत्व का ऐसा राष्ट्रीय मंच बताया है, जिसका उद्देश्य वर्तमान के उल्लेखनीय कृषि नेतृत्व को पहचान देने के साथ आने वाली पीढ़ियों को नवाचार और कृषि नेतृत्व के लिए प्रेरित करना है।