ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: “भारत” की छवि को दुनिया में दमदार बनाते “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी”

BRICS Summit: Prime Minister Narendra Modi bolstering India's global image

दीपक कुमार त्यागी

“दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने दुनिया भर के देशों का ध्यान आकर्षित करने का कार्य बखूबी कर दिखाया है। दुनिया के धुर-विरोधी देशों को एक मंच पर बैठाकर के बिना किसी भी कांट-छांट व ना-नुकुर के साझा नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी करवा कर के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने करिश्माई नेतृत्व व देश की साख को दुनिया में चार-चांद लगाने का कार्य बखूबी कर दिखाया है। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम ने भारत की छवि को दुनिया के सामने विवादों को खत्म करने वाले एक ताकतवर सेतू निर्माता के रूप में और मजबूत करने का कार्य किया है।”

भारत की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 व 13 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का इतिहास रचते हुए समापन हो गया है। इस वर्ष के ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न की छाप को दुनिया ने स्पष्ट रूप से देखा है। प्रधानमंत्री मोदी की ही मंशानुरूप जन-प्रथम और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण के दर्शाने वाले व दुनिया में तनाव को कम करने वाले मुद्दे ब्रिक्स की चर्चा का हिस्सा रहे। वहीं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” के साथ-साथ प्रमुख सदस्य देशों की प्राथमिकताओं के अलावा, सभी सदस्य देशों के बीच सहयोग को गहरा करने के तरीकों और वैश्विक तनाव और क्षेत्रीय चिंताओं पर भी सभी सदस्यों ने विचारों का आदान-प्रदान और समस्याओं के समाधान के लिए गहन मंथन किया। ब्रिक्स के तीन स्तंभों “राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग, और सांस्कृतिक और जन-समुदाय आदान-प्रदान” सहित एक दूसरे के धुर-विरोधी देशों के बीच ज्वलंत मुद्दों सहित कारोबारी, राजनीतिक, कूटनीतिक बैठकों का दौर भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान निर्वाध रूप से पूरी निरंतरता के साथ चलता रहा, जो दुनिया के लिए एक बहुत ही सकारात्मक और अच्छा संकेत है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में भारत ने दुनिया के सामने विवादों को खत्म करने वाले सेतू निर्माता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की पहचान को और मजबूत करने का कार्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कर दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से दुनिया के बेहद ही ताकतवर और धुर-विरोधी देशों रूस, चीन, ईरान, यूएई व साऊदी अरब को एक साथ बैठाकर के साझा “नई दिल्ली घोषणा पत्र” पर हस्ताक्षर करवाकर के उसको निर्विवाद रूप से जारी करवाने का कार्य किया है, वह सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रणनीतिक कौशल का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कूटनीतिक व रणनीतिक कौशल का लोहा दुनिया भर में मनवाया है। ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को आये दिन गहरे जख्म देने वाले आतंकवाद के मुद्दे को उठाकर के भारत को पूरी दुनिया के शांति व संवाद केंद्र के रूप में वैश्विक पटल पर सफलता पूर्वक स्थापित करते हुए, विश्व में एक बड़ी ऐतिहासिक लकीर खींच कर के इतिहास रचने का कार्य किया है। शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के ग्यारह सदस्य ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ और भागीदार देशों के नेता व प्रतिनिधि भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने देश व दुनिया की ज्वलंत समस्याओं, कूटनीति के साथ-साथ व्यापार पर भी विस्तार से आपस में चर्चा करने का कार्य किया है।

हालांकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष सफलता पूर्वक पूरे कर चुका है। ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत ने वर्ष 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मेजबानी की है, वैसे तो भारत पहले भी तीन बार ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर चुका है, वर्ष 2012, वर्ष 2016 और वर्ष 2021 के बाद वर्ष 2026 में चौथी बार अध्यक्षता संभालने का कार्य भारत ने किया है। ब्रिक्स की स्थापना की बात करें तो वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान चार देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन के बीच ऐतिहासिक औपचारिक सहयोग के इरादे के साथ इसकी शुरुआत हुई थी। शुरुआत में इसका नाम “BRIC” था क्योंकि इसमें केवल चार देश ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे, और संस्थापक सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से मिलकर के इसका नाम रखा गया था, लेकिन वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर BRICS हो गया था। वहीं वर्ष 2024 और वर्ष 2025 में कई अन्य देश भी इस संगठन के सदस्य बने, जिससे ब्रिक्स के विस्तार को दुनिया में नये पंख लगे हैं। हालांकि वर्ष 2023 से ही आतंकियों का आका और धरती पर मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन देश पाकिस्तान भी ब्रिक्स की सदस्यता लेने के लिए जोड़-तोड़ करते हुए लाबिंग करने में लगा हुआ है, लेकिन वह अभी तक तो सफल नहीं हो पाया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सदस्य देशों व दुनिया को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा था कि यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में 20 वर्ष परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक हैं। यह ऐसा चरण है जब जिम्मेदारियां सपनों के साथ आती हैं। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने विकास के चरण में है और उसने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने सदस्यों से एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आम सहमति के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने में तो सबसे आगे है, लेकिन फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे है। उन्होंने ब्रिक्स को एक ऐसे मंच में बदलने पर जोर दिया है जहां हर सदस्य देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की भागीदारी हो और हर कोशिश के केंद्र में मानवता का विकास हो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्मेलन में प्रस्ताव दिया है कि वैश्विक शासन में सुधार के लिए मिलकर 10 प्रस्ताव तैयार करें, ताकि अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ‘ब्रिक्स सुधार रोडमैप’ का रूप दिया जा सके। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बात करते हुए कहा कि इसे अब और टाला नहीं जा सकता है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक विकास को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी की बात भी की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मैजिक का कमाल देखिए ब्रिक्स के “नई दिल्ली घोषणा पत्र” में ईरान, यूएई, साऊदी अरब, रूस और चीन जैसे अलग-अलग भू-राजनीतिक रुख यहां तक की दुश्मनी रखने वाले देशों के बावजूद भी 45 पृष्ठ और 140 बिंदुओं वाले एक साझा दस्तावेज पर सभी सदस्य देशों की सहमति हासिल करने का कार्य किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कारण ही परस्पर विरोधी देशों को बातचीत के एक मंच पर आने का अवसर मिला है और अच्छी बात यह रही कि उन देशों ने भी दुनिया के इस महत्वपूर्ण मंच का लाभ उठाते हुए आपस में बात करने का कार्य भी किया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साझा “नई दिल्ली घोषणा पत्र” में आतंकवाद, आतंकवादियों के लिए फंडिंग करने और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का संकल्प लिया है और 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का भी विशेष उल्लेख किया है।पहलगाम हमले जैसे ज्वलंत मुद्दे की बात उठाकर के बिना नाम लिए ही आतंकियों के आका पाकिस्तान की दुनिया के सामने पोल खोलने का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाखूबी कर दिखाया। वहीं साऊदी अरब, यूएई, ईरान, चीन व रूस ने भी इस पर सहमति जताई है, जो पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका है और एक बहुत ही बड़ी कूटनीतिक विफलता है। ब्रिक्स में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एकबार फिर से देश व दुनिया को दिखा दिया है कि “मोदी है तो मुमकिन है” और भारत विश्व में अमन, चैन, शांति का सेतू निर्माता देश है।