ब्रिक्स संसदीय मंच में राघव चड्ढा की लियो टॉल्स्टॉय के वंशज प्योत्र टॉल्स्टॉय से मुलाकात

Raghav Chadha meets Leo Tolstoy's descendant Pyotr Tolstoy at BRICS Parliamentary Forum

गांधीजी और टॉल्स्टॉय के विचारों का भारत-रूस मैत्री में रहा है विशेष योगदान

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के अवसर पर संसद भवन, नई दिल्ली में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने रूस के प्रमुख संसदीय प्रतिनिधि प्योत्र टॉल्स्टॉय से मुलाकात की। प्योत्र टॉल्स्टॉय महान रूसी लेखक और दार्शनिक लियो टॉल्स्टॉय के परपोते के परपोते हैं। राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को साझा करते हुए भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक वैचारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को याद किया।

राघव चड्ढा ने कहा कि लियो टॉल्स्टॉय केवल साहित्यिक प्रतिभा के धनी नहीं थे, बल्कि उन्होंने सामाजिक असमानता, विशेषाधिकार और युद्ध की विभीषिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। ‘वॉर एंड पीस’ और ‘अन्ना करेनिना’ जैसी विश्वप्रसिद्ध रचनाओं के लेखक टॉल्स्टॉय ने शांति, अहिंसा, करुणा और सत्य के मूल्यों की वकालत की।

महात्मा गांधी और टॉल्स्टॉय के बीच वैचारिक संबंध

भारत के लिए लियो टॉल्स्टॉय की विरासत का विशेष महत्व महात्मा गांधी के साथ उनके वैचारिक संबंधों के कारण भी है। वर्ष 1909 में टॉल्स्टॉय और गांधीजी के बीच सत्य, प्रेम और अहिंसा जैसे विषयों पर पत्राचार हुआ था। टॉल्स्टॉय के विचारों ने गांधीजी के अहिंसा और सत्याग्रह संबंधी चिंतन को प्रभावित किया।

गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने एक सामुदायिक निवास का नाम ‘टॉल्स्टॉय फार्म’ रखकर रूसी विचारक के प्रति सम्मान व्यक्त किया था। सत्य और अहिंसा पर आधारित इन विचारों ने आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विचारों की कोई सीमा नहीं होती

राघव चड्ढा ने इस मुलाकात को एक विशेष अवसर बताते हुए कहा कि भले ही देशों के बीच भौगोलिक दूरियां हों, लेकिन महान विचार सीमाओं में बंधे नहीं रहते। उनके अनुसार, टॉल्स्टॉय के रूस और गांधीजी के भारत के बीच विकसित हुआ वैचारिक संबंध दोनों देशों की मित्रता का महत्वपूर्ण अध्याय है।

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुई यह मुलाकात भारत और रूस के बीच संसदीय संवाद के साथ-साथ साझा साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करती है।