हिमालय महोत्सव में बड़वा के दंपती ने लिया भाग, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. निशंक से की साहित्य पर चर्चा

Barwa's couple participated in Himalaya Mahotsav, discussed literature with former Union Education Minister Dr. Nishank

रविवार दिल्ली नेटवर्क

महोत्सव के दौरान डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ ने हरियाणवी बोली के पहले साझा लघुकथा-संकलन ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ की प्रति डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को भेंट की

बड़वा/देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले के थानो स्थित लेखक गाँव में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय ‘स्पर्श पर हिमालय’ महोत्सव-2026 में हरियाणा के भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र के गाँव बड़वा निवासी साहित्यकार डॉ. सत्यवान सौरभ ने अपनी पत्नी डॉ. प्रियंका सौरभ के साथ भाग लिया। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 60 देशों और भारत के 28 राज्यों से लगभग 1,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 25 से 29 अक्तूबर तक आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश के साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और सृजनधर्मियों ने साहित्य, संस्कृति, कला तथा समकालीन विषयों पर विचार साझा किए और दोनों ने तीन शोध पत्र सत्रों में भाग लिया।

महोत्सव के दौरान डॉ. सत्यवान सौरभ और डॉ. प्रियंका सौरभ की पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा उनकी पुत्री विदुषी निशंक से मुलाकात हुई। इस अवसर पर वर्तमान दौर में साहित्य की भूमिका, सामाजिक सरोकारों और भारतीय भाषाओं के साहित्य को व्यापक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। डॉ. सत्यवान सौरभ ने हरियाणवी बोली के साझा लघुकथा-संकलन ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ की प्रति डॉ. निशंक को भेंट की।

‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ हरियाणवी भाषा और लोकजीवन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाला लघुकथा-संकलन है। इसमें हरियाणा की मिट्टी, ग्रामीण जीवन, सामाजिक बदलाव और लोकसंस्कृति से जुड़े अनुभवों को साहित्यिक स्वर दिया गया है। इस संकलन का उद्देश्य हरियाणवी बोली की रचनात्मक क्षमता और क्षेत्रीय साहित्य की समृद्ध परंपरा को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाना है।

डॉ. सत्यवान सौरभ हिंदी एवं हरियाणवी साहित्य के लेखक, कवि और स्तंभकार हैं। उनकी पत्नी डॉ. प्रियंका सौरभ कवयित्री, सामाजिक चिंतक एवं स्तंभकार हैं। दोनों साहित्य और सामाजिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं।

महोत्सव में देश-विदेश से आए साहित्यकारों एवं विद्वानों के साथ संवाद करते हुए दंपती ने साहित्य को समाज से जोड़ने, भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करने और भारतीय संस्कृति की साझा विरासत को सशक्त बनाने के महत्त्व को रेखांकित किया। परिवार के साथ इस अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन में सहभागिता उनके लिए यादगार अनुभव रही। लेखक गाँव में आयोजित इस महोत्सव ने साहित्य, कला, संस्कृति और वैश्विक विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।