25 वर्ष की राष्ट्रसेवा—मोदी जी की व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि एक विचार की यात्रा

25 years of national service – not a personal journey of Modi ji, but a journey of an idea

संदीप त्यागी
पूर्व राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य भाजयुमो

यह एक विचार के निरंतर आगे बढ़ने की यात्रा है—राष्ट्र प्रथम के विचार की, सेवा के विचार की और आत्मनिर्भर एवं समर्थ भारत के संकल्प की। राजनीति को अगर केवल सत्ता प्राप्त करने की सीढ़ी मान लिया जाए, तो वह बहुत छोटी सोच है। लेकिन राजनीति को अगर समाज परिवर्तन और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम माना जाए, तो उसका अर्थ बहुत व्यापक हो जाता है।
नरेंद्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक साधारण परिवार से निकलकर संगठन के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में लंबे समय तक काम किया। संगठन ने उन्हें सिखाया कि व्यक्ति से बड़ा संगठन होता है और संगठन से बड़ा राष्ट्र। यही विचार आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की पहचान बना। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिली। गुजरात में शासन और विकास के अनुभव के बाद 2014 में देश की जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुना। 2019 में पहले से बड़ा जनादेश मिला और 2024 में लगातार तीसरी बार देश की जनता ने उनके नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया। लेकिन किसी भी राजनीतिक यात्रा का मूल्य केवल चुनाव जीतने से तय नहीं होता।

असल सवाल यह है कि सत्ता मिलने के बाद उस सत्ता का उपयोग किसके लिए किया गया?
गरीब के लिए क्या बदला?
गाँव के लिए क्या बदला?
महिला के जीवन में क्या बदलाव आया? युवा को अवसर कितने मिले? भारत की दुनिया में प्रतिष्ठा कितनी बढ़ी? इन्हीं प्रश्नों के आधार पर नरेंद्र मोदी जी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समझना चाहिए। जनधन से लेकर डिजिटल भारत तक, स्वच्छ भारत से लेकर उज्ज्वला तक, आयुष्मान भारत से लेकर बुनियादी ढाँचे के विस्तार तक—इन पहलों के पीछे एक व्यापक सोच दिखाई देती है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। और यही हमारे राजनीतिक दर्शन की मूल भावना भी है—अंत्योदय। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जिस अंत्योदय की कल्पना की थी, अर्थात समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान—आज उसी विचार को आधुनिक परिस्थितियों में आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के राजनीतिक दर्शन में एक और महत्वपूर्ण बात है—भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं, बल्कि दुनिया के सामने एक आत्मविश्वासी और सक्षम राष्ट्र के रूप में खड़ा हो। आज भारत अपनी संस्कृति, अपनी अर्थव्यवस्था, अपनी तकनीक, अपनी युवा शक्ति और अपनी सामरिक क्षमता के साथ विश्व पटल पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। और शायद यही कारण है कि मोदी जी की राजनीति केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं दिखाई देती। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रीय संकल्पों से जोड़ने का प्रयास किया है। आज जब हम उनके 25 वर्षों को देखते हैं तो हमें एक बात समझनी चाहिए— व्यक्ति का जीवन सीमित होता है, लेकिन विचार की यात्रा लंबी होती है। पद आते हैं, पद चले जाते हैं।

चुनाव आते हैं, चुनाव चले जाते हैं।

सरकारें बनती हैं, सरकारें बदलती हैं। लेकिन जो विचार राष्ट्र के भीतर आत्मविश्वास पैदा करता है, वह लंबे समय तक जीवित रहता है।
इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 25 वर्ष केवल एक राजनेता के 25 वर्ष नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक सफर के 25 वर्ष हैं जिसने करोड़ों भारतीयों के भीतर यह विश्वास जगाया कि भारत केवल संभावनाओं वाला देश नहीं, बल्कि अपनी संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने वाला राष्ट्र भी बन सकता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हृदय से बधाई देता हूँ।

ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें और उन्हें भारत माता की सेवा करने की निरंतर शक्ति दें।

मैं उम्मीद करता हूं कि हमारा संकल्प होना चाहिए—राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और सेवा हमारा संस्कार। और अंत में केवल इतना कहना चाहूँगा— जहाँ राजनीति में स्वार्थ समाप्त होकर सेवा शुरू होती है, वहीं से राष्ट्रनिर्माण की शुरुआत होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की 25 वर्षों की सार्वजनिक जीवन यात्रा को मेरी ओर से कोटि-कोटि नमन एवं हार्दिक शुभकामनाएँ।