- केरलम और तमिलनाडु को छोड़ अप्रवासी राजस्थानियों मारवाड़ियों ने विधानसभा चुनाव वाले सभी प्रदेशों में भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
- पश्चिम बंगाल में पहली बार प्रचण्ड विजय के साथ कमल खिला और नया इतिहास रचा
- असम में भाजपा की हैट्रिक और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन की पुनः वापसी
- केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यू डी एफ गठबंधन की जीत
- तमिलनाडु में अभिनेता विजय ने रचा इतिहास कांग्रेस को गठबंधन के लिए आमंत्रित किया
एन जी भट्ट
पश्चिम बंगाल,असम और पुडुचेरी में इस बार अप्रवासी राजस्थानियों (मारवाड़ियों) ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी कारण पश्चिम बंगाल में पहली बार प्रचण्ड विजय के साथ कमल खिला है और देश की राजनीति में एक नया इतिहास रचा गया है। लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री का सपना देखने वाली बंगाल की जुझारू महिला नेत्री ममता बनर्जी को भारी मतों से पटकनी देने वाले किसी जमाने में उनके विश्वस्त भाजपा के प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी ने भी इस बात की चर्चा करते हुए राजस्थान के भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ आदि का नाम लेते हुए मारवाड़ी समाज के साथ ही गुजराती और अन्य समाजों को उनके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार जताया।
वैसे भी केन्द्रीय मंत्री और राजस्थान के अलवर से सांसद तथा केन्द्रीय गृह अमित शाह के विश्वस्त भूपेन्द्र यादव भाजपा की और से पश्चिम बंगाल में पार्टी के चुनाव प्रभारी थे। उनके साथ ही वर्षों उत्तर प्रदेश में संगठन का काम देखने वाले और अब नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर संगठन की कमाल देखने वाले लो प्रोफ़ाइल नेता सुनील बंसल का प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी, उनके चाणक्य अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मार्गदर्शन में चुनावी शतरंज की बिसात बिछाना भी महत्वपूर्ण रहा है। इन नेताओं के अलावा राजस्थान से केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और अर्जुन राम मेघवाल भी मोदी शाह की रणनीति को अमलीजामा पहनाने पश्चिम बंगाल पहुंचें। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी पश्चिम बंगाल पहुंच कर मारवाड़ी समाज को एक जाजम पर बिठाया और राजस्थान की तरह डबल इंजन सरकार के फायदे गिनाएं। अपनी कई पीढ़ियों से चले आ रहे व्यापार में भारी सरकारी हस्तक्षेप से तंग हो चुके मारवाड़ी सेठ ममता सरकार से बदला लेने के इस सुनहरे अवसर को नहीं चुके और भाजपा के पक्ष में लामबंद हो गए । राजस्थान ने अन्य कई नेताओं कैलाश चौधरी, विधायक जितेन्द्र गोठवाल आदि ने भी पश्चिम बंगाल में डेरा डाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार कार्य किया। कुल मिला कर प्रदेश के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल,असम और पुडुचेरी के मारवाड़ी बहुल इलाकों में पहुंच कर मतदाताओं का ब्रेन वाश किया। कमोबेश ऐसा ही काम केरल और तमिलनाडु में भी किया गया जिसके फलस्वरूप पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और असम में कांग्रेस नेता गौरव गोगाई जैसे दिग्गज भी अपने- अपने चुनाव भी हार गए। उल्लेखनीय है कि नॉर्थ ईस्ट और दक्षिणी भारत में भी भारी संख्या में प्रवासी राजस्थानी है । इन मारवाड़ियों का वहां के सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में गहरा प्रभाव है।
देश के उत्तर पूर्व और दक्षिण के पांच प्रदेशों असम,पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरलम में हुए विधानसभा चुनावों के बाद एग्जिट पोल्स के परिणामों ने तीन प्रदेशों असम, पुडुचेरी और केरलम की तस्वीर लगभग साफ कर दी थी लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को लेकर सभी के मन में बैचेनी थी। हालांकि पश्चिम बंगाल में भारी मतदान और तमिलनाडु में एंटी इंकमबेसी को लेकर एग्जिट पोल्स के रुझान एक बड़ा संकेत दे रहे थे और अंतरोगतवा मंगलवार को मतगणना शुरू होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में मोदी का बंगाली जादू, अमित शाह की चाणक्य नीति और बदलाव की आंधी का चमत्कार दिख ही गया। पश्चिम बंगाल में पहली बार प्रचण्ड विजय के साथ भगवा रंग और कमल खिला तथा एक नया इतिहास रच ही गया। साथ ही असम में भाजपा की हैट्रिक और पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन की पुनः वापसी हुई। कमाल की राजनीतिक रणनीति के धुरंधर साबित हुए मोदी और शाह। विपक्ष के लिए सन्तोष की बात यह रही कि मात्र एक प्रदेश केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन की जीत हुई। तमिलनाडु में पहली बार अपनी नई-नई बनी पार्टी के साथ चुनाव लड़ने वाले अभिनेता विजय ने भी इतिहास रच दिया। चुनाव परिणामों के बाद विजय के पिता ने कांग्रेस को गठबंधन की सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। कुल मिला कर केरल और तमिलनाडु को छोड़ अप्रवासी राजस्थानियों यानी मारवाड़ियों ने विधानसभा चुनाव वाले सभी प्रदेशों में भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पश्चिमी बंगाल में आजादी के बाद पहली बार भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत और असम की हैट्रिक के साथ पुडुचेरी में मिली भारी विजय के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा की तरह नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर विजयी उद्बोधन देने पहुंचे और भारी उत्साह और उमंग से भरे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की आत्मा को आज वास्तव में खुशी मिली होगी क्योंकि उनकी जन्म स्थली बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ताओं की साधना आज सिद्धि में बदल गईं है। मोदी ने कहा यह हमारे लोकतन्त्र के साथ हमारे संविधान की भी जीत है। आज गंगोत्री से गंगा सागर तक कमल खिला है। डॉ श्यामप्रसाद मुखर्जी की आत्मा को आज शान्ति मिली हैं। आज से एक नया अध्याय जुड़ा है। आज बंगाल भय मुक्त हुआ है। यहां एक नया सूर्योदय हुआ है। ऐसा नया सवेरा जिसका इन्तजार कई पीढ़ियों ने वर्षों से किया है। आज बंगाल के भविष्य की नई यात्रा की शुरुआत हो रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि हम अब विकास के लिए दिन रात काम करेंगें। पश्चिम बंगाल की पहली केबिनेट मीटिंग में ही आयुष्मान भारत योजना पर मुहर लगाएंगे तथा घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन लेंगे। बंगाल में बदलाव हुआ है लेकिन हम बदला नहीं विकास करेंगे। उन्होंने गुरुदेव टैगोर सहित सभी बंगाली महापुरुषों का नाम लेकर उनको याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बंगाल में पहली बार लोकतन्त्र के महापर्व में कोई हिंसा नहीं हुई। उन्होंने सभी से अपील की कि वे हिंसा के चक्र के खत्म करे । विश्व की वर्तमान अस्थिर परिस्थितियों में स्थिरता के लिए वोट देकर भारत ने बता दिया है कि हमारी नसों में लोकतंत्र का खून बहता है। कांग्रेस और विपक्षी दलों को संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध करने के लिए आज नारी के आक्रोश को झेलना पड़ा है। देश की सोच में परिवर्तन हुआ है और वामपंथी युग का भी अन्त हुआ है । कांग्रेस को अब यह समझना चाहिए । वरना उन्हें हमेशा इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ऐसा कह कर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस मुक्त भारत की ओर इशारा किया।





