गोपेन्द्र नाथ भट्ट
5 सितंबर भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन देश के दूसरे राष्ट्रपति, दार्शनिक और शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है। 1962 से उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है। शिक्षक दिवस का वास्तविक अर्थ केवल शिक्षकों को बधाई देने और समारोह आयोजित करने तक सीमित नहीं है। यह अवसर शिक्षा व्यवस्था को उसकी वास्तविक कसौटियों पर परखने का भी है। भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे प्रदेश राजस्थान के संदर्भ में यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को ऐसा विद्यालय और ऐसा शिक्षक मिल पा रहा है या नहीं, जो उसकी सीखने की क्षमता को सही दिशा दे सके।
राजस्थान में सरकारी विद्यालयों का व्यापक नेटवर्क है राज्य में एक से बारहवीं तक के 70,155 सरकारी स्कूलों सहित 1 लाख से अधिक विद्यालय है। जिनमें 1.64 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को 7.92 लाख शिक्षक पढ़ाते है। इस तरह राज्य की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका केंद्रीय है। लेकिन हाल में सामने आई कुछ रिपोर्टों ने सरकारी विद्यालयों में भवन, छत, शौचालय और शिक्षकों की उपलब्धता जैसी बुनियादी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित हुआ है। हालांकि इन रिपोर्टों को पूरे राज्य की स्थिति का अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा, लेकिनयह सही है कि शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रह सकती।
राजस्थान की भौगोलिक विविधता शिक्षा व्यवस्था के सामने अलग तरह की चुनौतियां भी रखती है। शहरों के विद्यालयों की परिस्थितियां और दूरस्थ ग्रामीण अथवा आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों की आवश्यकताएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए नीति बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और विद्यालयों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
आज शिक्षक की भूमिका भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गई है। डिजिटल माध्यमों और ए आई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने विद्यार्थियों तक सूचना पहुंचाने के साधन बढ़ा दिए हैं। लेकिन सूचना और शिक्षा एक नहीं हैं। विद्यार्थी को तथ्यों के बीच सही चुनाव करना, प्रश्न पूछना, तर्क करना और जिम्मेदार नागरिक बनना सिखाने में शिक्षक की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।इसीलिए शिक्षक का सम्मान केवल पुरस्कार या शिक्षक दिवस के समारोह तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षक को पर्याप्त शिक्षण सामग्री, प्रशिक्षण, उपयुक्त कार्य वातावरण और विद्यालय स्तर पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना भी सम्मान का ही हिस्सा है। दूसरी ओर शिक्षक की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। बदलते समय के साथ विषय ज्ञान और शिक्षण पद्धतियों को अद्यतन रखना तथा विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझना आज शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए देशभर से 48 शिक्षकों का चयन किया गया है। इसमें राजस्थान के दो शिक्षक भी शामिल हैं। यह पुरस्कार शिक्षण में उत्कृष्ट योगदान और नवाचार जैसे पहलुओं को मान्यता देता है। ऐसे सम्मान उन शिक्षकों के प्रयासों को सामने लाते हैं जो सीमित परिस्थितियों में भी बेहतर परिणाम के लिए काम कर रहे हैं।
राजस्थान के लिए शिक्षक दिवस का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शिक्षक को सम्मान और विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा—दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। केवल शिक्षक दिवस पर सम्मान व्यक्त करने से शिक्षा मजबूत नहीं होगी। इसके लिए विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं से लेकर शिक्षक की उपलब्धता, प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की क्षमता तक हर स्तर पर निरंतर सुधार जरूरी है।
आखिरकार किसी भी शिक्षा व्यवस्था की सफलता का सबसे विश्वसनीय पैमाना यह नहीं कि कितने समारोह हुए या कितने प्रमाणपत्र बांटे गए, बल्कि यह है कि कक्षा से निकलने वाला विद्यार्थी कितना सीख पाया, कितना सोच पाया और अपने भविष्य के लिए कितना तैयार हुआ। नई शिक्षा नीति के अन्तर्गत अपनी मातृ भाषा में स्कूली शिक्षा देने का प्रावधान है। इस दृष्टि से राजस्थान में भी शीघ्र ही मातृ भाषा में स्कूली शिक्षा देने के संदर्भ में अतिशीघ निर्णय लेने की दिशा में प्रयास जरूरी है।
देश के अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में शिक्षक दिवस तभी सार्थक होगा, जब शिक्षक के सम्मान के साथ कक्षा और विद्यार्थी की वास्तविक जरूरत को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में रखा जाए।





