रविवार दिल्ली नेटवर्क
दिल्ली/कोलकाता : हिंदी लेखक कुमार शाश्वत को राजेंद्र यादव ‘हंस’ पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया । यह पुरस्कार उन्हें बांग्ला लेखक श्यामल भट्टाचार्य की मूल बांग्ला कहानी ‘चेची’ के अनुवाद के लिए दिया गया। ‘हिंदी साहित्य का ऑस्कर’ कहे जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी कॉम्प्लेक्स में प्रदान किया गया। इसमें फिक्शन, अनुवाद, कविता, साहित्यिक आलोचना, माइक्रो-फिक्शन, ग़ज़ल, कवर डिज़ाइन, पत्र, वितरण और युवा फिक्शन लेखन जैसी श्रेणियों में प्रकाशित बेहतरीन रचनाओं को सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम प्रसिद्ध हिंदी लेखक, कहानीकार और ‘हंस’ के पुनः संस्थापक व संपादक राजेंद्र यादव की जयंती पर आयोजित किया गया था। ‘हंस’ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम हिंदी साहित्य की रचनात्मक परंपरा और समकालीन साहित्यिक सरोकारों को सम्मानित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस वर्ष, ‘हंस’ के जुलाई 2026 के अंक में प्रकाशित कहानी ‘हत्यारे की नीलेड’ के लिए श्रीधर करुणानिधि को और अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित कहानी ‘जाने जी का तोता’ के लिए आनंद हर्षुल को राजेंद्र यादव हंस कथा सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। सत्येंद्र कुमार को उनकी कविता ‘बिजुका बनकर क्या करूंगा’ के लिए राजेंद्र यादव ‘हंस’ कविता पुरस्कार 2026; कुमार शाश्वत को बांग्ला कहानी ‘चेची’ से अनुवाद के लिए राजेंद्र यादव ‘हंस’ अनुवाद पुरस्कार 2026 दिया गया।
इसके अलावे भी साहित्य की अन्य विधाओं पर सम्मान दिये गये।
इस कार्यक्रम में सम्मानित लेखकों की विविधता ‘हंस’ की साहित्यिक परंपरा को रेखांकित करती है, जिसने समकालीन समाज, मानवीय संवेदनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े रचनात्मक सरोकारों को लगातार प्रोत्साहित किया है।
गौरतलब है कि पिछले 35 वर्षों में, कुमार शाश्वत ने कोलकाता(बंगाल) के कथाकार श्यामल भट्टाचार्य की लगभग 40 लघु कथाओं और चार उपन्यासों—जिनमें लोद्रवार काछाकाछि, वांछाकल्पतरु, खुबानी और द्वीपांतरे फूल फुटेछे शामिल हैं—का हिंदी में अनुवाद किया है।
मूल रुप से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा स्थापित हंस के आयोजकों के निमंत्रण पर मूल बांग्ला लेखक श्यामल भट्टाचार्य भी कोलकाता से समारोह में उपस्थित हुए थे। इस मौके पर कोलकाता ट्रांसलेटर्स फ़ोरम के अध्यक्ष श्री रावेल पुष्प ने फ़ोरम की ओर से शुभकामनाएं देते हुए इसे बंगाल के साहित्य जगत के लिए एक गौरवशाली क्षण के रूप में चिह्नित किया।





