जसपाल राणा की विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंचाएगा IOA, एशियाई खेलों में शुरू होगी मेमोरियल ट्रॉफी

IOA to carry forward Jaspal Rana's legacy to the next generation; memorial trophy to be introduced at the Asian Games

रत्नज्योति दत्त

नई दिल्ली : भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) एशियाई खेलों की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के लिए महान निशानेबाज जसपाल राणा के नाम पर ‘जसपाल राणा मेमोरियल ट्रॉफी’ शुरू करेगा। इसका मकसद भारतीय निशानेबाजी में राणा के योगदान और कोच एवं मेंटर के रूप में उनके काम को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

राणा के जीवन और करियर पर लिखी गई किताब ‘Maverick Jaspal’ के विमोचन के मौके पर मंगलवार को IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा ने यह घोषणा की। यह किताब एस. कन्नन और जी. राजारमन ने लिखी है।

उषा ने कहा कि राणा को सिर्फ एक महान निशानेबाज के रूप में याद करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कई खिलाड़ियों को तैयार किया और उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।

“स्मृति, चाहे कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, एक पीढ़ी तक सीमित रहती है। लेकिन विरासत अगली पीढ़ी की होती है,” उषा ने कहा।

उन्होंने कहा कि ‘Maverick Jaspal’ में राणा के जीवन के कई पहलुओं को सामने रखा गया है। किताब में उन्हें चैंपियन निशानेबाज के साथ-साथ कोच, मेंटर, सहकर्मी और दोस्त के रूप में भी दिखाया गया है।

राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक थे। खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद उन्होंने कोच और मेंटर के तौर पर भी भारतीय निशानेबाजी में अहम योगदान दिया।

उषा के अनुसार, राणा की सबसे बड़ी उपलब्धि उनके अपने पदक नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों की सफलता थी जिन्हें उन्होंने तैयार किया।

राणा का इस वर्ष जून में 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

“एक खिलाड़ी के रूप में पदक पर उसका नाम होता है। लेकिन कोच के रूप में पदक किसी और के नाम होता है—फिर भी उस पदक में कोच का एक हिस्सा रहता है,” उषा ने कहा।

राणा के असमय निधन का जिक्र करते हुए उषा ने कहा कि भारतीय खेलों में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के जरिए आगे बढ़ता रहेगा।

“जसपाल की यात्रा बहुत जल्दी समाप्त हो गई। लेकिन उनकी विरासत यहीं खत्म नहीं हो रही। बल्कि भारत की अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के हाथों वह फिर से शुरू हो रही है,” उन्होंने कहा।

उषा ने राणा और मनु भाकर के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 में भाकर की सफलता के पीछे लंबे समय की तैयारी, असफलताओं से उबरने और कड़ी मेहनत का उल्लेख किया।

ओलंपिक में सफलता के बाद भाकर को गले लगाते हुए राणा की एक तस्वीर को याद करते हुए उषा ने कहा कि उस तस्वीर में राणा का गर्व, राहत और स्नेह साफ नजर आ रहा था।

राणा ने कम उम्र में शुरू की थी निशानेबाजी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में 1976 में जन्मे जसपाल राणा ने कम उम्र में ही निशानेबाजी शुरू कर दी थी। उन्होंने बाद में 25 मीटर पिस्टल और 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धाओं में देश का नाम रोशन किया।

राणा ने एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल और 2006 के दोहा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर-फायर पिस्टल तथा 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल में स्वर्ण पदक जीता।

“वह अपने खिलाड़ियों के बारे में सोचते थे। भारतीय निशानेबाजी के बारे में सोचते थे। भारत के लिए पदक जीतने के बारे में सोचते थे,” उषा ने कहा।

राजा रणधीर सिंह के नाम पर भी ट्रॉफी

IOA एशियाई खेलों के सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी के लिए ‘राजा रणधीर सिंह मेमोरियल ट्रॉफी’ भी शुरू करेगा।

उषा ने कहा कि इन दोनों ट्रॉफियों के जरिए भारतीय खेलों में लंबे समय तक योगदान देने वाले दो बड़े खिलाड़ियों को सम्मान दिया जाएगा।

राजा रणधीर सिंह भारत के ओलंपिक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे। वह एक सफल निशानेबाज और पांच बार के ओलंपियन थे। उन्होंने करीब चार दशक तक खेल प्रशासन में काम किया और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय खेलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन हुआ 27 मई, 2026 को 79 वर्ष की उम्र में ।

जसपाल राणा के नाम पर शुरू की जा रही ट्रॉफी का एक खास मकसद उनकी कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

उषा के अनुसार, जब आने वाले समय में कोई एशियाई खेल चैंपियन यह ट्रॉफी हाथ में लेकर पूछेगा, “जसपाल राणा कौन थे?”, तभी इस पहल का असली उद्देश्य पूरा होगा।

उषा ने कहा, “हो सकता है कि वे जसपाल को जानते ही न हों। हो सकता है कि वे कभी राजा जी से भी न मिले हों। लेकिन वे पूछेंगे—जसपाल राणा कौन थे? इस ट्रॉफी का नाम उनके नाम पर क्यों है? तब कोई उन्हें बताएगा।”

“इसी तरह लोगों को जीवित रखा जा सकता है—सिर्फ तस्वीरों या किताबों में नहीं, बल्कि उनके बाद आने वाली पीढ़ियों के सपनों और सफलताओं में भी,” उषा ने कहा ।