रविवार दिल्ली नेटवर्क
साहित्य-साधना एवं सामाजिक सरोकारों के लिए डॉ. जयकिरण शोध शिक्षण संस्थान, उज्जैन ने प्रदान की मानद उपाधि
उदयपुर : साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक विषयों को प्रभावी स्वर देने वाले उदयपुर निवासी सत्य भूषण शर्मा को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखनी एवं साहित्य-साधना के लिए ‘साहित्य शिरोमणि’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान डॉ. जयकिरण शोध शिक्षण संस्थान, बड़नगर, जिला उज्जैन (मध्यप्रदेश) की ओर से प्रदान किया गया।
संस्थान द्वारा जारी सम्मान-पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय सामाजिक एवं मानवीय स्तर पर अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है। आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती व्यस्तता और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच रिश्तों में आत्मीयता तथा मानवीय संवेदनाओं के कमजोर होने की स्थिति चिंता का विषय है। ऐसे समय में साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने, विचारों को दिशा देने तथा सकारात्मक चेतना का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सम्मान-पत्र के अनुसार सत्य भूषण शर्मा अपनी लेखनी के माध्यम से समाज निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों, शिक्षा, पर्यावरण, राष्ट्रबोध, संस्कृति, नैतिकता तथा समसामयिक विषयों को प्रमुखता मिलती है। उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति पाठकों को केवल विचार करने के लिए प्रेरित नहीं करती, बल्कि सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक होने का संदेश भी देती है।
संस्थान ने शर्मा की साहित्यिक यात्रा और योगदान को ‘उत्कृष्ट एवं अद्वितीय’ बताते हुए कहा है कि उनकी साहित्य-साधना समाज निर्माण के साथ-साथ निर्धन एवं वंचित वर्ग के उत्थान की भावना को भी अभिव्यक्त करती है। साहित्य को सामाजिक परिवर्तन और सकारात्मक चेतना का माध्यम बनाने के उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें ‘साहित्य शिरोमणि’ की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
सत्य भूषण शर्मा शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वे भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता होने के साथ-साथ पत्रकार, लेखक, कवि एवं यूट्यूबर के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा साहित्य के क्षेत्र में सामाजिक चेतना को स्वर देने के उनके प्रयास निरंतर जारी हैं।
शर्मा की लेखनी में स्थानीय सरोकारों से लेकर राष्ट्रीय महत्व के विषयों तक विविधता देखने को मिलती है। वे शिक्षा, पर्यावरण, जल संरक्षण, मानवीय संवेदना, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पर्व, सामाजिक परिवर्तन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वर्तमान समय की चुनौतियों जैसे विषयों पर नियमित रूप से लेखन करते रहे हैं। उनकी कविताओं और आलेखों में सहज भाषा के साथ-साथ चिंतन एवं संवेदना का समन्वय दिखाई देता है।
‘साहित्य शिरोमणि’ की मानद उपाधि मिलने पर शर्मा ने इसे अपनी साहित्य-साधना के प्रति मिला महत्वपूर्ण प्रोत्साहन बताते हुए कहा कि साहित्यकार का वास्तविक दायित्व समाज के सुख-दुःख को समझना और अपनी लेखनी के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन की राह प्रशस्त करना है। उन्होंने कहा कि सम्मान रचनाकार को और अधिक जिम्मेदारी के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने साहित्यिक दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
इस सम्मान के समाचार पर साहित्यकारों, शिक्षकों, पत्रकारों, साहित्यप्रेमियों एवं शुभचिंतकों ने सत्य भूषण शर्मा को बधाई दी तथा आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना, मानवीय संवेदना और रचनात्मक विचारों का प्रसार करते रहेंगे।





