भारतीय चिंतन और राष्ट्रनिष्ठा के अमर साधक थे पं. दीनदयाल उपाध्याय : वासुदेव देवनानी

Pt. Deendayal Upadhyaya was an immortal devotee of Indian thought and devotion to the nation: Vasudev Devnani

रविवार दिल्ली नेटवर्क

  • स्पीकर देवनानी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को किया श्रद्धापूर्वक नमन
  • भारत के विकास की दिशा प्रकृति, संस्‍कृति व मानव जीवन मूल्‍यों से जुडी होनी चाहिए

जयपुर : राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन भारतीय चिंतन, राष्ट्रनिष्ठा, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है।

देवनानी ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 110वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है। देवनानी ने कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल दृष्टि के अनुरूप व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के विकास को एक-दूसरे से अभिन्न मानते हुए एकात्म मानवदर्शन का विचार प्रस्तुत किया। उनका चिंतन भारतीय ज्ञान परंपरा की उस जीवन-दृष्टि को सामने रखता है, जिसमें मनुष्य को शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित स्वरूप के रूप में देखा गया है।

विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय का विचार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और अवसरों का लाभ पहुंचाने की भावना से जुड़ा है। उनके लिए राष्ट्र का विकास तभी सार्थक है जब समाज का अंतिम व्यक्ति सम्मानपूर्वक जीवन जी सके और विकास की मुख्यधारा में सहभागी बने। उनके विचार सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और लोककल्याण की दिशा में निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं। अंत्योदय दिवस भी प्रतिवर्ष 25 सितम्बर को उनकी जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।

देवनानी ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी का चिंतन भारत की पुरातन और आधुनिक राष्ट्र-निर्माण के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने स्वदेशी, स्वावलंबन, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान पर बल दिया। उनका विचार था कि भारत के विकास की दिशा भारत की प्रकृति, संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती एक महान चिंतक के जीवन और विचारों के स्मरण के साथ राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का अवसर है। आज जब भारत विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है तब अंत्योदय, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और मानवीय गरिमा जैसे उनके विचार समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण हैं।

देवनानी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनका एकात्म मानवदर्शन और अंत्योदय की भावना आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का बोध कराती रहेगी।