रेस्टोरेंट क्रिकेट लीग से राष्ट्रीय क्रिकेट लीग तक का सफ़र

The journey from the Restaurant Cricket League to the National Cricket League

एक नया नाम, एक बड़ा विजन और एक साझा उद्देश्य -क्रिकेट के माध्यम से विभिन्न समुदायों को जोड़कर ‘हंगर फ्री भारत’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की पहल

विनोद सिंह ‘तकियावाला’

नई दिल्ली : क्रिकेट भारत में केवल एक खेल नहीं है। यह भावनाओं, उत्साह और सामाजिक जुड़ाव की ऐसी भाषा है, जिसे देश के अलग- अलग हिस्सों में रहने वाले लोग सहजता से समझते हैं। इसी लोकप्रियता और जुड़ाव को एक बड़े सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने की पहल अब नए स्वरूप में सामने आई है। रेस्टोरेंट क्रिकेट लीग के रूप में शुरू हुई पहल अब ‘राष्ट्रीय क्रिकेट लीग’ यानी आरसीएल के रूप में विकसित हो चुकी है। नाम में आया यह बदलाव केवल पहचान बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक सोच, बढ़ती भागीदारी और समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।

राष्ट्रीय क्रिकेट लीग का मूल संदेश है—‘हंगर फ्री भारत’। अर्थात ऐसा भारत, जहां भूख और भोजन की बर्बादी जैसे विषय केवल चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि समाज का प्रत्येक वर्ग इनके समाधान में अपनी भूमिका को समझे। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय क्रिकेट लीग को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां क्रिकेट प्रतियोगिता के साथ मानवता, सेवा, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी आगे बढ़े।राष्ट्रीय क्रिकेट लीग के नए स्वरूप की घोषणा के अवसर पर ट्रॉफी, लोगो और जर्सी का अनावरण किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाज के विभिन्न वर्गों और पेशों से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने इस पहल की व्यापकता को रेखांकित किया। ‘राष्ट्रीय’ शब्द यहां विशेष महत्व रखता है। इसका आशय केवल देशव्यापी आयोजन से नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों, पेशों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आने वाले लोगों को क्रिकेट की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से एक मंच पर लाने से है।22 से 25 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय क्रिकेट लीग में भाग लेने वाली टीमों की विविधता इस सोच को स्पष्ट करती है। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय, भारतीय महिला मूक-बधिर क्रिकेट टीम, पत्रकार, किसान, शेफ, डॉक्टर, विद्यार्थी, इंडिगो एयरलाइंस, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और नेपाल से आए प्रतिभागियों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की भागीदारी होगी। एक ही क्रिकेट मंच पर इतनी अलग-अलग सामाजिक और पेशागत पृष्ठभूमियों के लोगों का साथ आना अपने आप में इस पहल के व्यापक स्वरूप को दर्शाता है।

इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां क्रिकेट को केवल प्रतियोगिता और मनोरंजन के नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। क्रिकेट को संवाद और सामाजिक जागरूकता का माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है। मैदान पर खिलाड़ी अलग-अलग टीमों के लिए खेलेंगे, लेकिन मैदान के बाहर उनका साझा संदेश एक होगा – भोजन का सम्मान, खाद्य बर्बादी को रोकना और जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने की भावना को मजबूत करना।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में खाद्य बर्बादी रोकने के लिए की गई अपील के संदर्भ से हुई। इस संदर्भ ने कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को स्पष्ट आधार दिया। भोजन हमारे जीवन की बुनियादी आवश्यकता है, लेकिन उसके पीछे किसान का श्रम, खेत से बाजार तक की लंबी प्रक्रिया, खाद्य उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की मेहनत और उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था जुड़ी होती है। ऐसे में भोजन की बर्बादी केवल किसी वस्तु का नष्ट होना नहीं, बल्कि उस पूरी मेहनत और संसाधन की अनदेखी भी है।

‘हंगर फ्री भारत’ पहल इसी सोच को सामाजिक अभियान का रूप देने का प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य व्यक्तियों,संस्थानों, धार्मिक स्थलों, सामाजिक संगठनों, कॉरपोरेट जगत और विभिन्न समुदायों को इस विचार से जोड़ना है कि अतिरिक्त भोजन को बर्बाद होने से बचाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाने की दिशा में छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।राष्ट्रीय क्रिकेट लीग और ‘हंगर फ्री भारत’ के संस्थापक अरविंद कुमार ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल एक और क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करना नहीं है। उनके अनुसार क्रिकेट की लोकप्रियता को सामाजिक जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनाया जाए और लोगों को भूख तथा खाद्य बर्बादी के खिलाफ अपने स्तर पर योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि किसान, शेफ, विद्यार्थी, नेपाल से आए मित्र,सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, अभिनेता, खिलाड़ी, पत्रकार और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि एक मंच पर खड़े हैं। यही इस पहल की मूल भावना है।

राष्ट्रीय क्रिकेट लीग के उद्घाटन अवसर पर आयोजित होने वाला चैरिटी मैच इस पूरे अभियान का एक महत्वपूर्ण आकर्षण होगा। घोषणा के अनुसार सनातन गुरुओं की टीम और सुपरस्टार्स की टीम के बीच यह मुकाबला खेला जाएगा। सनातन टीम का नेतृत्व आचार्य बालकृष्ण करेंगे, जबकि सुपरस्टार्स टीम की कमान अभिनेता राकेश बेदी संभालेंगे। सुपरस्टार्स टीम में विंदू दारा सिंह, अवतार गिल, अरुण बख्शी, रज़ा मुराद, शाहबाज़ खान, अभिनव चतुर्वेदी, सुनील पाल और बनवारी लाल झोल सहित अन्य हस्तियों के शामिल होने की घोषणा की गई है।

इस चैरिटी मैच का महत्व केवल क्रिकेट मुकाबले तक सीमित नहीं है। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े चर्चित चेहरे जब एक सामाजिक उद्देश्य के लिए एक साथ आते हैं, तो उनके माध्यम से समाज के व्यापक वर्ग तक संदेश पहुंचाने का अवसर बनता है। आयोजकों की दृष्टि में क्रिकेट का मैदान यहां केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का मंच भी है।इस अवसर पर अरविंद कुमार ने एस. के. तिजारावाला के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस पहल में सनातन गुरुओं के आशीर्वाद और सहभागिता को संभव बनाने में सहयोग किया। उनके अनुसार सनातन गुरुओं की उपस्थिति ‘हंगर फ्री भारत’ के संदेश में सेवा, करुणा और भोजन के प्रति सम्मान की भावना को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने में सहायक होगी।अभिनेता अरुण बख्शी ने क्रिकेट और सामाजिक उद्देश्य के इस मेल को रेखांकित करते हुए कहा कि क्रिकेट के मैदान पर बनने वाला कोई रन यदि किसी जरूरतमंद की थाली तक भोजन पहुंचाने के संदेश से जुड़ता है, तो उस रन का महत्व और बढ़ जाता है। अभिनेता अवतार गिल ने भी विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के लोगों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने वाली इस पहल का स्वागत किया।महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने राष्ट्रीय क्रिकेट लीग में ट्रांसजेंडर समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भूख किसी समुदाय, वर्ग या पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं करती, इसलिए जरूरतमंदों की सेवा की जिम्मेदारी की भी कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार ऐसे मंच समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मानवता के व्यापक उद्देश्य से जुड़ने का अवसर देते हैं।

राष्ट्रीय क्रिकेट लीग में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया गया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, इंदिरापुरम की प्रधानाचार्य प्रिया जॉन ने सामाजिक उद्देश्यों में विद्यार्थियों की भूमिका पर जोर दिया। उनका मानना है कि बच्चे और शैक्षणिक संस्थान जिम्मेदार उपभोग तथा खाद्य बर्बादी रोकने के संदेश को परिवार और समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।इसी कड़ी में ‘ब्रश अगेंस्ट हंगर’ ड्रॉइंग प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को ‘हंगर फ्री भारत’ अभियान से जोड़ने की पहल की गई है। आयोजकों के अनुसार कला के माध्यम से विद्यार्थियों को इस सामाजिक विषय से जोड़ने और राष्ट्रीय स्टेडियम में लीग के दौरान ‘हंगर फ्री भारत’ की शपथ दिलाने का प्रयास युवाओं तक संदेश पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।किसान और खाद्य क्षेत्र भी इस अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ‘जुगाड़ू कमलेश’ ने खाद्य व्यवस्था में किसानों और खाद्य उत्पादकों के महत्व को रेखांकित किया, जबकि प्रसिद्ध शेफ मनजीत गिल ने खाद्य एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए भोजन के सम्मान और जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग की आवश्यकता बताई।वरिष्ट पत्रकार अनूप ने सामाजिक संदेशों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका का उल्लेख किया। अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी ने खेल और मनोरंजन की लोगों को जोड़ने वाली क्षमता को सामाजिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने का समर्थन किया।

अरविंद कुमार ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन के प्रति भी विशेष आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार अतुल वासन शुरुआत से ही लीग और इसके उद्देश्य के समर्थन में आगे आने वाले प्रमुख क्रिकेटरों में रहे हैं और उन्होंने लीग को उचित क्रिकेट नियमों तथा पेशेवर मानकों के अनुरूप आयोजित करने के प्रयासों का समर्थन किया है।राष्ट्रीय क्रिकेट लीग की पूरी अवधारणा को यदि तीन शब्दों में समझा जाए तो वे हैं—नाम का विस्तार, भागीदारी का विस्तार और उद्देश्य का विस्तार। रेस्टोरेंट क्रिकेट लीग किसी एक क्षेत्र या समुदाय से जुड़ी पहल के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन राष्ट्रीय क्रिकेट लीग के रूप में इसका दायरा विभिन्न पेशों,समुदायों और क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यही कारण है कि इस मंच पर क्रिकेट खेलने वाले लोगों की पृष्ठभूमि जितनी विविध है, उतना ही साझा है उनका सामाजिक उद्देश्य।

भूख और खाद्य बर्बादी के खिलाफ जागरूकता कोई एक दिन या एक आयोजन का विषय नहीं है। इसके लिए समाज में निरंतर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की आवश्यकता है। राष्ट्रीय क्रिकेट लीग इसी संदेश को क्रिकेट के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। जब एक किसान, शेफ, विद्यार्थी, पत्रकार, अभिनेता, खिलाड़ी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि एक साथ खड़े होते हैं, तो यह केवल क्रिकेट की तस्वीर नहीं होती, बल्कि समाज की विविधता और साझा जिम्मेदारी की तस्वीर भी बनती है।22 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली का नेशनल स्टेडियम क्रिकेट ग्राउंड क्रिकेट के मुकाबलों का साक्षी बनेगा।मैदान पर रन बनेंगे, विकेट गिरेंगे और टीमें प्रतिस्पर्धा करेंगी, लेकिन इस पूरे आयोजन के पीछे एक ऐसा संदेश भी रहेगा जो स्कोरबोर्ड से कहीं बड़ा है। वह संदेश है कि भोजन का सम्मान किया जाए, खाद्य बर्बादी को कम किया जाए और जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने के लिए समाज मिलकर प्रयास करे।रेस्टोरेंट क्रिकेट लीग से राष्ट्रीय क्रिकेट लीग तक की यात्रा इसलिए केवल नाम परिवर्तन की यात्रा नहीं है। यह एक ऐसे मंच के विस्तार की कहानी है, जिसमें क्रिकेट के साथ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और एक साझा मानवीय उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय क्रिकेट लीग का नया नाम उसके व्यापक स्वरूप का परिचय है, विभिन्न समुदायों की भागीदारी उसकी समावेशी भावना को दर्शाती है और ‘हंगर फ्री भारत’ उसका मूल सामाजिक संकल्प है।क्रिकेट माध्यम है,लेकिन संदेश मानवता का है।खेल का मैदान एक है,खिलाड़ी अनेक हैं और पृष्ठभूमियां अलग-अलग हैं, लेकिन संकल्प एक है – भूख और खाद्य बर्बादी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने की भावना को मजबूत करना। यही राष्ट्रीय क्रिकेट लीग का नया परिचय है – एक नया नाम, एक बड़ा विजन, विभिन्न समुदायों के लिए एक मंच और एक साझा संकल्प—‘हंगर फ्री भारत’।