राजस्थान के लोकनृत्य कलाकार अकरम खान बेरूपिया और लोक संगीत कलाकार मंजूर खां मांगणियार को मिलेगा उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार

Rajasthan's folk dance artist Akram Khan Berupia and folk music artist Manzoor Khan Manganiyar will receive Ustad Bismillah Khan Youth Award.

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली में 19 अक्टूबर को होगा वर्ष 2024 एवं 2025 के युवा पुरस्कारों का समारोह, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे युवा कलाकारों को सम्मानित

नई दिल्ली। राजस्थान के लोकनृत्य कलाकार अकरम खान बेरूपिया को लोकनृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2025 और लोक संगीत कलाकार मंजूर खां मांगणियार को 2024 का प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इसकी घोषणा की गई है।

समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत युवा कलाकारों को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा समारोह की अध्यक्षता करेंगी। समारोह सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे नई दिल्ली के फिरोजशाह रोड स्थित रवींद्र भवन परिसर के मेघदूत थिएटर में आयोजित किया जाएगा।

राजस्थान के लोकनृत्य क्षेत्र में अकरम खान बेरूपिया और लोक संगीत क्षेत्र में मंजूर खां मांगणियार को मिलने वाला यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध लोककला परंपरा के लिए गौरव का विषय है। राजस्थान की लोकनृत्य शैलियां प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, लोकजीवन और परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में वर्ष 2024 एवं 2025 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कारों का यह सम्मान समारोह भारतीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देने वाले युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी द्वारा विभिन्न प्रदर्शनकारी कला क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को दिया जाता है। यह पुरस्कार महान शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ के नाम पर स्थापित है। ऐसे राष्ट्रीय सम्मान लोककलाकारों की साधना को पहचान देने के साथ युवा पीढ़ी को पारंपरिक कलाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।