रविवार दिल्ली नेटवर्क
पूर्व मुख्यमंत्री बोले—मुख्यमंत्री स्पष्ट करें, भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी तो क्या कार्रवाई हुई? सीबीआई और ईडी की निष्पक्ष जांच पर दिया जोर
देहरादून : उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में गंभीर सवाल उठाते हुए रेखा आर्या की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की जांच कराने और मुख्यमंत्री की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।
हरीश रावत ने कहा कि रेखा आर्या और उनके पति के सार्वजनिक हुए वीडियो में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रेखा आर्या ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा बताया है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। रावत ने मांग की कि पुलिस दर्ज एफआईआर के अनुरूप कानून के तहत उचित कार्रवाई करे।
मुख्यमंत्री बताएं, शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
हरीश रावत ने गिरधारी लाल साहू के उस कथित दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रेखा आर्या के विभाग में कथित भ्रष्टाचार की जानकारी देने की बात कही है।
रावत ने सवाल किया कि यदि मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत दी गई थी, तो उस पर क्या कार्रवाई की गई? यदि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली, तो इस दावे पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता आवश्यक है और जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है।
200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के आरोप पर जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने रेखा आर्या के पास 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने संबंधी उनके पति के आरोप को गंभीर बताते हुए इसकी जांच की मांग की। उन्होंने रेखा आर्या की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उन्होंने सोमेश्वर से कांग्रेस का उम्मीदवार बनाए जाने के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। वर्ष 2016 में रेखा आर्या भाजपा में शामिल हो गईं और वर्ष 2017 से मंत्री पद पर हैं।
रावत ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि की संपत्ति और उसके स्रोतों को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित संपत्तियों के स्रोतों की जांच सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी एजेंसियों से कराने की मांग की।
हालांकि, संपत्ति और भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इन आरोपों को जांच में साबित होने से पहले तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल
हरीश रावत ने कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठेंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई राजनीतिक पक्ष देखकर नहीं, बल्कि तथ्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रेखा आर्या की सुरक्षा के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएं और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों पर सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे।
अब सबकी नजर सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर है। इस विवाद में लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।





