गांव की सड़कों को हर मौसम के अनुकूल बनाने की जरूरत

There is a need to make village roads suitable for all weather conditions.

सीता

भारत के गांव-गांव तक सड़कों का विस्तार ग्रामीण विकास की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। 26 साल पहले शुरू हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य पात्र ग्रामीण बस्तियों को हर मौसम में चलने योग्य सड़क संपर्क उपलब्ध कराना था। समय के साथ इस योजना के अंतर्गत नई सड़कों के निर्माण के अलावा मौजूदा सड़कों को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार तक पहुंचना आसान हुआ है।

लेकिन सड़क निर्माण की उपलब्धियों के बीच यह सवाल भी जरूरी है कि क्या हर गांव में बनी सड़क साल भर उपयोगी बनी रहती है? पिछले कुछ दशकों में ग्रामीण सड़कों के विस्तार ने अनेक गांवों को मुख्य मार्गों और कस्बों से जोड़ा है, लेकिन कुछ बस्तियों में आज भी सड़क का अभाव या उसकी खराब हालत लोगों की आवाजाही पर रोक लगा देती है।

राजस्थान में सड़क निर्माण और रखरखाव की चुनौती राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी है। पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में दूर-दूर बसी ढाणियों और गांवों तक सड़क पहुंचाना आसान नहीं है। यहां बारिश के दौरान रेत और पानी का मेल रास्तों को कमजोर कर सकता है। कई स्थानों पर पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से सड़क के किनारे कट जाते हैं या सतह खराब हो जाती है। जिससे केवल आवागमन की ही परेशानी नहीं रहती है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में बाधा बन जाती है।

राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, मार्च 2025 तक राज्य के 39,666 गांव सड़क से जुड़े थे, जो कुल गांवों का 91.68 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भी राजस्थान में व्यापक काम हुआ है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 तक योजना के सभी चरणों के अंतर्गत राज्य में 76,177 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा किया जा चुका था और 15,970 ग्रामीण बस्तियों को सड़क संपर्क प्रदान किया गया था।

सड़क की खराब हालत का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांग लोगों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह अधिक गंभीर हो सकता है। बारिश के दिनों में रास्ता खराब होने से किसी विद्यार्थी को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है, तो किसी मरीज को अस्पताल ले जाने में देर हो सकती है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन नहीं है, उनके लिए यह समस्या और बढ़ जाती है। सार्वजनिक परिवहन गांव तक न पहुंच पाए तो लोगों को पैदल चलने या अधिक किराया देकर दूसरे साधन तलाशने पड़ सकते हैं। इस तरह खराब सड़क लोगों के समय, पैसे और अवसरों तीनों को प्रभावित करती है।

किसानों के लिए भी सड़क की स्थिति सीधे उनकी आमदनी से जुड़ी है। छोटे और सीमांत किसानों के पास उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। यदि खेत से मंडी तक जाने वाला रास्ता खराब हो, तो फसल को बाजार तक पहुंचाने में अधिक समय और खर्च लग सकता है। बारिश के दौरान वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते, तो उपज की ढुलाई में देरी होती है। सड़क खराब होने से खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री गांव तक लाने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए ग्रामीण सड़कों को केवल परिवहन का साधन मानने के बजाय खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था के जरूरी आधार के रूप में देखना चाहिए।

इन समस्याओं के समाधान के लिए सबसे पहले सड़क निर्माण की प्राथमिकता तय करने का तरीका बदलने की जरूरत है। आमतौर पर आबादी और पात्रता के आधार पर योजनाओं में प्राथमिकता तय की जाती है, लेकिन इसके साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि किसी बस्ती का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है या नहीं, बारिश में उसका संपर्क कितने दिनों तक टूटता है और निकटतम स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र या बाजार कितनी दूर है। इससे उन छोटी बस्तियों को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी, जहां आबादी कम होने के बावजूद सड़क की कमी लोगों के जीवन पर बड़ा असर डालती है।

रेगिस्तानी इलाकों में सड़क बनाने और उसकी मरम्मत करने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी समाधान अपनाने की जरूरत है। जहां पानी भरने से सड़क टूटती है, वहां जल निकासी की व्यवस्था को निर्माण योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। जहां रेत जमा होने से रास्ता बंद होता है, वहां स्थानीय भूगोल के अनुसार सड़क के किनारों की सुरक्षा, रेत हटाने और नियमित निरीक्षण की योजना तैयार की जाए। बारिश के बाद विशेष निरीक्षण कर उन हिस्सों की मरम्मत पहले की जाए, जहां सड़क टूटने से पूरा संपर्क बाधित होने का खतरा है।

ग्रामीण सड़कों का विकास तभी सार्थक होगा, जब गांवों के लोगों को मौसम बदलने के साथ अपनी रोजमर्रा की जरूरतों से समझौता न करना पड़े। राजस्थान में सड़क संपर्क का विस्तार महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अब उन बस्तियों तक पहुंचने और पहले से बनी सड़कों को बेहतर बनाए रखने पर बराबर ध्यान देना होगा, जो अभी पीछे छूट रही हैं।

सरकार, संबंधित विभागों और पंचायतों के बीच जवाबदेही तय करके तथा स्थानीय जरूरतों के आधार पर काम की प्राथमिकता निर्धारित करके इस दिशा में ठोस बदलाव लाया जा सकता है। विकास का असल लक्ष्य केवल ज्यादा से ज्यादा सड़कें बनाना ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जो हर मौसम में सड़क की स्थिति को बेहतर बनाए रखे, जिससे गाँव के लोग विकास के किसी भी अवसर से वंचित न रह जाएं।