मनोज पाण्डेय
प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अजय भनोट कोर्ट रुम (49) मे न्यायाधीश के विरुद्ध अधिवक्ताओं द्वारा किए गए हंगामे और बवाल ने न्यायिक व्यवस्थाओं को लेकर आम जन मानस के मन में गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है और न्यायिक व्यवस्था पर से धीरे धीरे भरोसा कमजोर होते सुनने और देखने को मिल रहा है जानकारी के मुताबिक जस्टिश अजय भनोट को अपनी कोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी को कुर्सी पर बैठने की इजाजत देना अधिवक्ता द्वारा विरोध करना फिर जस्टिस भनोट द्वारा अधिवक्ता को अधिकारी से माफी मांगने पर विवश करना भारी पड़ गया जो कुछ अधिवक्ताओं को नागवार गुजरा और इस प्रकरण को लेकर न्यायकर्ता और अधिवक्ता के बीच अपनी गरिमा के मलाल का मुद्दा बन बवाल का स्वरूप धारण कर लिया अब सवाल यह है कि जिस देश और समाज में न्यायालय को न्याय का मंदिर और न्यायाधीश को न्याय का देवता समझा जाता रहा तथा जो आम नागरिकों के भरोसे का सबसे मजबूत आधार रहा जहां सबसे मजबूत एवं सबसे कमजोर लोग भी अनुशासित एवं शांत रहते हुए न्यायालय के निर्णयों को सुनते एवं देखते रहे है क्या अब उनको इस पवित्र परिसर व भवनों में न्याय कम न्यायकर्ता एवं अधिवक्ता को अपने अधिकारों को लेकर लड़ते देखना होगा यदि ऐसा होता रहा तो यह देश और समाज के लिए अच्छा नहीं होगा इसकी गरिमा व सुचिता हर हाल में बनाए रखने पर गंभीर विचार करना होगा लोगों में इसकी विश्वसनीयता बनी रहे इसके लिए सबको वैचारिक व व्यवहारिक रूप से सीमाओं में रहना होगा





