लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने वॉटर ट्रांसवर्सैलिटी ग्लोबल अवॉर्ड्स एवं कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित किया

Lok Sabha Speaker Om Birla addressed the Water Transversality Global Awards and Conclave 2026

  • विकास और पर्यावरण को विरोधी शक्तियों के रूप में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए: ओम बिरला
  • जल संरक्षण के लिए “रिड्यूस, रीयूज़, रिचार्ज और रीसायकल” के मंत्र को अपनाने पर बल

नीति गोपेन्द्र भट्ट

नई दिल्ली : लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विकास और पर्यावरण को विरोधी शक्तियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें एक-दूसरे के पूरक के रूप में समझा जाना चाहिए।

बिरला शुक्रवार को सायं नई दिल्ली के इंडिया इण्टरनेशनल सेण्टर में आयोजित वॉटर ट्रांसवर्सैलिटी ग्लोबल अवॉर्ड्स एंड कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित कर रहे थे। बिरला ने भारतीय संस्कृति में जल के आध्यात्मिक और जीवनदायी महत्व को रेखांकित किया। जनभागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सार्थक और स्थायी परिवर्तन लाने के लिए पंचायत स्तर से लेकर संसद तक, इन प्रयासों को सक्रिय जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

बिरला ने जल संरक्षण के लिए “रिड्यूस, रीयूज़, रिचार्ज और रीसायकल” के मंत्र को अपनाने के महत्व पर बल दिया। “कैच द रेन” और “जल जीवन मिशन” जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इन अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।बढ़ाने में सहायक है।

उन्होंने कहा कि मानवता के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है और जनप्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।बिरला ने जल संरक्षण, सतत विकास और वैश्विक सहयोग के महत्व पर बल दिया और कहा कि इंटरनेशनल वॉटर फोरम (आईडब्ल्यूएफ ) जैसी पहलें जल संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लेकिन वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब नागरिक जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनें।

बिरला ने कहा कि जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यावरण ऐसे क्षेत्र हैं जो गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा और हरित पहलें भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ कर रही हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की प्रगति उल्लेखनीय है और यह देश को सतत विकास की दिशा में आगे ले जा रही है।