एक विचारधारा को प्रसारित एवं संरक्षित करने का एक शैक्षणिक मिशन है, नमो अध्ययन केंद्र!

Namo Study Centre is an educational mission to propagate and preserve an ideology!

प्रोफ़ेसर जसीम मोहम्मद

किसी भी उन्नत या विकासोन्मुख राष्ट्र के इतिहास में, ऐसे अंतराल आते हैं, जब एक कुशल और अग्रणी सोच का नेतृत्वकर्ता अपने समय-काल से ऊपर उठकर एक समग्र विचार बन जाता है – एक ऐसी विचारधारा जो पीढ़ियों की नियति को आकार देती है। मेरे लिए, यह अनुभव करने और समझने का क्षण सन् 2015 में तब आया, जब मुझे एहसास हुआ कि श्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे समग्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य भारत की अंतर्भावना का पुनर्निर्माण करना है। इस दृष्टि से “राष्ट्र प्रथम” का उनका दृष्टिकोण, “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” का उनका संदेश और कर्तव्य के प्रति उनकी गहरी भावना समग्र जीवनदर्शन को प्रतिबिम्बित करती थी। इसी अहसास और अनुभव ने मुझे अपने जीवन के कार्य को एक शैक्षणिक मंच के माध्यम से उनकी विचारधारा का अध्ययन, दस्तावेज़ीकरण और प्रसार करने के लिए समर्पित करने के विचार से मुझे प्रेरित किया।

मुझे पहली बार 5 मार्च 2016 को श्री नरेंद्र मोदी से उनके सरकारी आवास पर मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। इसके बाद, मैं उनसे 1 फरवरी और 24/25 मार्च 2017 को फिर से आधिकारिक रूप से मिला। प्रत्येक मुलाकात ने मेरे मन और हृदय पर उनके कार्य, व्यवहार और आचरण ने गहरा प्रभाव डाला। उनके शब्दों में दृढ़ विश्वास था, उनके विचार भारत के सभ्यतागत मूल्यों में निहित थे और उनके जीवन में सादगी और शक्ति का एक दुर्लभ संतुलन स्पष्ट रूप से झलकता था। मैं उन मुलाकातों से इस दृढ़ विश्वास के साथ वापस लौटा कि नरेंद्र मोदी एक विचारधारा हैं – एक बौद्धिक और नैतिक शक्ति, जिसका अध्ययन भारत के अन्य महान् विचारकों और सुधारकों की तरह किया जाना चाहिए।

इसी विश्वास के साथ मैंने जनवरी सन् 2021 में नमो अध्ययन केंद्र (CNMS) का स्थापना किया। इसकी स्थापना एक गैर-लाभकारी, शैक्षणिक और शोध-उन्मुख संस्थान के रूप में की गई थी, जिसका स्वरूप पूर्ण कानूनी पंजीकरण और पूर्ण पारदर्शी था । हमारा उद्देश्य स्पष्ट और सरल था – शैक्षणिक कार्यों, प्रकाशनों और संगोष्ठियों के माध्यम से नरेंद्र मोदी की विचारधारा का अध्ययन, चिंतन-मनन और प्रचार-प्रसार करना। जब हमें बाद में पता चला कि प्रधानमंत्री का पूरा नाम इस्तेमाल करने के लिए औपचारिक अनुमति की आवश्यकता हो सकती है, तो हमने बिना किसी हिचकिचाहट के सम्मानपूर्वक इसे “नमो अध्ययन केंद्र” में बदल दिया। इस क्रम में हर निर्णय कानून के सम्मान और प्रधानमंत्री के नाम की गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

अपने मिशन के आरंभ से ही, यह केंद्र बिना किसी से अनुदान, सहायता, आर्थिक सहयोग लिए या स्वीकार किए संचालित होता रहा है। ‘राष्ट्र-प्रथम’ सेवा की विचारधारा के प्रति मेरी निष्ठा के तहत, सभी गतिविधियों, पुस्तकों और सम्मेलनों का वित्तपोषण आद्यावधि मैंने स्वयं किया है। यह केंद्र आस्था का एक ऐसा कार्य है, जो इस विश्वास पर आधारित है कि शैक्षणिक शोध—अनुसंधान एवं उन्नयन भी किसी न किसी रूप में राष्ट्र सेवा का एक रूप हो सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में, सीएनएमएस ने कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग किया है, जिनमें बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, इम्फाल स्थित केंद्रीय खेल विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी महिला महाविद्यालय शामिल हैं। केंद्र ने शैक्षणिक परिषदों और सलाहकार बोर्डों की भी स्थापना की है, जिनमें श्रीमती पी. टी. उषा, पूर्व राज्यपाल श्री विश्वभूषण हरिचंदन और कई विश्वविद्यालयों के कुलपति जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति सम्मिलित हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे केंद्र ने दो दर्जन सम्मेलन और संगोष्ठियाँ आयोजित की हैं, जिनमें श्री शिवराज सिंह चौहान, श्री अर्जुन राम मेघवाल, श्री सी. पी. राधाकृष्णन, श्री राज कुमार भाटिया , श्री आरिफ मोहम्मद खान, श्री रामबहादुर राय, श्री विश्वभूषण हरिचंदन, श्रीमती रेखा शर्मा, श्री किश्वर मकवाना, प्रो जगदीश मुखी, डॉ. किरण बेदी और सुश्री कंगना रनौत सहित वरिष्ठ नेताओं, राज्यपालों, विद्वानों और सार्वजनिक हस्तियों ने भाग लेकर अपनी सहभागिता की है। ये कार्यक्रम सुशासन, समावेशी विकास, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भर भारत की भावना को समझने के लिए बौद्धिक मंच के रूप में कार्य करते हैं।

हमने श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, शासन मॉडल और सामाजिक दृष्टिकोण के विभिन्न पहलुओं पर दो दर्जन से अधिक पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं। ये पुस्तकें विद्वानों और पुस्तकालयों के साथ निःशुल्क साझा की जाती हैं, ताकि भावी पीढ़ियों को आधुनिक भारत को आकार देनेवाले विचारों को समझने में मदद मिल सके।

जब मैं अपने प्रकाशन की यात्रा पर पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो हमारे द्वारा की गई सबसे सार्थक पहलों में से एक ‘मन की बात’ शृंखला के पुस्तक रूप में प्रकाशन का था। हमने इसे सन् 2016 में सबसे पहले प्रकाशित किया था, और इसे लोगों के बीच निःशुल्क वितरित किया गया था। उसके बाद से हमने हर साल इस कार्य को जारी रखा, इसे केवल एक प्रकाशन के रूप में नहीं, बल्कि एक जनसेवा के रूप में माना। प्रत्येक संस्करण में एक नेता की आवाज सीधे नागरिकों से बात करती थी, जो उनकी आशाओं, मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती थी।

समय के साथ, मुझे एहसास हुआ कि ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री और राष्ट्र के बीच एक संवाद है। यह नेतृत्व और जनता के बीच भावनात्मक और बौद्धिक जुड़ाव को दर्शाता है। इस असाधारण संवाद को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने हेतु, हमने ‘मन की बात’ को एक व्यापक पुस्तक शृंखला के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। यह सतत परियोजना एक व्यापक शैक्षणिक और दस्तावेज़ीकरण प्रयास है। हम विभिन्न विषयों और क्षेत्रों के लेखकों, विचारकों और शोधकर्ताओं को अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह कार्य एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय संवाद को विद्वत्तापूर्ण रूप में दर्ज करने की एक शैक्षणिक और सांस्कृतिक ज़िम्मेदारी है।

विचारणीय है कि हम एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण – एक हज़ार साल के परिप्रेक्ष्य – के साथ एक वैश्विक महत्व का केंद्र ‘नमो अध्ययन केंद्र (CNMS)’ विकसित कर रहे हैं, ताकि आनेवाली पीढ़ियाँ यह अध्ययन कर सकें कि कैसे एक नेता, एक शांतिप्रिय नेता की आवाज़ ने एक नए राष्ट्रीय से सार्वभौमिक वैश्विक चरित्र को आकार देने में सहायता की। हमारी टीम दस्तावेज़ीकरण, संकलन और अनुवाद के माध्यम से इस कार्य का विस्तार जारी रखे हुए है और हम कई सहयोगी खंड तैयार कर रहे हैं, जो ‘मन की बात’ से उभरनेवाले विभिन्न विषयों की पड़ताल करेंगे।

हमारे कार्य के दौरान, कुछ लोगों ने अनावश्यक आपत्तियाँ उठाई हैं और बार-बार शिकायतें दर्ज की हैं। इनमें से ज़्यादातर निराधार पाए गए। यह स्पष्ट है कि ऐसी कार्रवाइयाँ किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि एक विचारधारा के विरुद्ध हैं—नरेंद्र मोदी की विचारधारा, जो एकता, अखंडता और प्रगति की पक्षधर है। जब विचार मज़बूत होते हैं, तो उन्हें अक्सर प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। यह इतिहास का एक स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन सत्य की अपनी एक शांत शक्ति होती है, जो अनवरत अपना कार्य करती रहती है।

नमो अध्ययन केंद्र सभी वैधानिक प्राधिकारियों और प्रक्रियाओं के साथ पूर्ण सहयोग करता रहेगा। हमने अपने पंजीकरण प्रमाणपत्रों से लेकर अपने बैंक रिकॉर्ड तक, हर दस्तावेज़ पूरी पारदर्शिता के साथ साझा किया है। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है, क्योंकि हम जो कुछ भी करते हैं, वह ईमानदारी और राष्ट्रसेवा से प्रेरित होता है। व्यवस्था, सत्य और भारत के विचार में हमारा विश्वास अटूट है। नमो अध्ययन केंद्र आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत जैसे विषयों पर शोध और चर्चा को बढ़ावा देता रहेगा—ऐसे विचार जो भारत के पुनर्जन्म के नैतिक और सांस्कृतिक सार को दर्शाते हैं।

मेरे लिए, यह काम कोई कैरियर नहीं, बल्कि एक आह्वान है। यह उस भारत के उत्थान और उन्नयन के लिए मेरा विनम्र योगदान है, जिसकी कल्पना माननीय नरेंद्र मोदी जी करते हैं—एक मज़बूत, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत। हमारे केंद्र के पास संसाधन भले ही कम हों, लेकिन यह दृढ़ विश्वास से भरपूर है। हम अनुशासन, गरिमा और उस विचारधारा में विश्वास के साथ काम करते रहेंगे, जिसने हमारे प्रयासों को सार्थक बनाया है। नरेंद्र मोदी एक ऐसी विचारधारा हैं, जो शाश्वत मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। उनका दृष्टिकोण उन विद्वानों, विचारकों और नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा जो मानते हैं कि राष्ट्रवाद और ज्ञान साथ-साथ चल सकते हैं। नमो अध्ययन केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता रहेगा कि इस विचारधारा का अध्ययन, संरक्षण और आनेवाली पीढ़ियों के साथ साझा किया जाए। ज़ाहिर है, हमारी संस्था का उद्देश किसी भी राजनीतिक अवधारणा या महत्वाकांक्षाओं से परे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उत्थान की दृष्टि से विशुद्ध रूप से अकादमिक कार्यों तक सीमित है।