एक गणेश, अनेक परंपराएं, एक ही आस्था

One Ganesha, many traditions, a single faith

अजय कुमार बियानी

महाराष्ट्र के गणपति बप्पा से तमिलनाडु के पिल्लैयार और मध्यप्रदेश के खजराना गणेश तक, भाषा-भोग-पद्धति भले अलग, श्रद्धा का भाव एक
भारत में भगवान गणेश केवल विघ्नहर्ता ही नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक, शुभारंभ, समृद्धि और मंगल के देवता माने जाते हैं। गणेश चतुर्थी का उत्सव देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। कहीं भव्य सार्वजनिक आयोजन होते हैं, कहीं घर-परिवार में पारंपरिक पूजा होती है तो कहीं गणेशजी विद्या और व्यापार के आराध्य के रूप में पूजे जाते हैं। पूजा की भाषा, प्रसाद और रीति बदलती है, लेकिन आस्था का भाव एक ही रहता है।

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की भव्यता देशभर में प्रसिद्ध है। मुंबई का लालबागचा राजा, सिद्धिविनायक और पुणे का दगडूशेठ गणपति श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं। सार्वजनिक गणेशोत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत किया है। यहां गणपति बप्पा के जयघोष के साथ अगले वर्ष फिर आने का भाव जुड़ा है।

गोवा में गणेश चतुर्थी को ‘चवथ’ कहा जाता है। पुश्तैनी घरों में गणेश स्थापना और परिवार के साथ मिलकर पूजा करने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। कर्नाटक में गणेश उत्सव का संबंध गौरी पूजा से भी जुड़ा है, जबकि आंध्रप्रदेश में इसे ‘विनायक चविथि’ के नाम से जाना जाता है। कनिपाकम का वरसिद्धि विनायक मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है।

तेलंगाना में हैदराबाद का गणेश उत्सव और खैरताबाद की विशाल गणेश प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तमिलनाडु में गणेशजी ‘पिल्लैयार’ के नाम से लोकप्रिय हैं और विनायक चतुर्थी पर कोझुकट्टई जैसे पारंपरिक नैवेद्य का विशेष महत्व है। केरल में भी विनायक की आराधना मंदिरों और परिवारों में श्रद्धा से की जाती है।

गुजरात में गणेशजी को शुभारंभ और मंगल कार्यों से जोड़ा जाता है। मध्यप्रदेश में इंदौर का खजराना गणेश मंदिर गणेश भक्ति का प्रमुख केंद्र है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिलती है। गणेशोत्सव के दौरान इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित अनेक शहरों में घरों और सार्वजनिक स्थलों पर गणेश स्थापना की जाती है।

राजस्थान में जयपुर का मोती डूंगरी गणेश और रणथंभौर का त्रिनेत्र गणेश विशेष प्रसिद्ध हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब और हरियाणा में गणेशजी को शुभ कार्यों के प्रथम पूज्य के रूप में स्मरण करने की परंपरा व्यापक है। विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार आरंभ और धार्मिक अनुष्ठानों में ‘श्री गणेश’ से शुरुआत का भाव इसी परंपरा से जुड़ा है।

पश्चिम बंगाल में गणेशजी व्यापार और शुभारंभ के देवता के रूप में पूजे जाते हैं तथा दुर्गापूजा की परंपरा में भी उनका विशेष स्थान है। ओडिशा में गणेशजी को विद्या और बुद्धि के देवता के रूप में विद्यालयों तथा शिक्षण संस्थानों में विशेष सम्मान मिलता है।

असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में भी मंदिरों, परिवारों तथा विभिन्न समुदायों के बीच गणेश आराधना की परंपरा दिखाई देती है। पूर्वोत्तर राज्यों—सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा—में गणेश चतुर्थी का स्वरूप स्थानीय जनसंख्या और सांस्कृतिक विविधता के अनुसार अलग-अलग है। जहां हिंदू समुदाय और मंदिर हैं, वहां श्रद्धा के साथ गणेश पूजा की जाती है।

अलग-अलग नैवेद्य, एक ही भक्ति
गणेशजी के भोग में भी भारत की सांस्कृतिक विविधता दिखाई देती है। महाराष्ट्र में उकडीचे मोदक, दक्षिण भारत में कोझुकट्टई, कहीं लड्डू, कहीं गुड़-नारियल और कहीं स्थानीय अनाज से बने पकवान भगवान को अर्पित किए जाते हैं। स्वाद और विधि अलग है, लेकिन भावना वही—प्रथम पूज्य गणेश के प्रति श्रद्धा।

इंदौर में खजराना गणेश के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। आज गणेशोत्सव केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। निपानिया और विजय नगर सहित शहर की आवासीय सोसायटियों, विद्यालयों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में भी गणेश स्थापना के साथ सांस्कृतिक और पर्यावरण जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मिट्टी की प्रतिमा और पारंपरिक पूजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई देता है।

महाराष्ट्र में वे ‘बप्पा’ हैं, तमिलनाडु में ‘पिल्लैयार’, आंध्रप्रदेश में ‘विनायक’ और उत्तर भारत में ‘विघ्नहर्ता’। भाषा बदली, पूजा की शैली बदली, प्रसाद बदला, लेकिन श्रद्धा नहीं बदली।

यही भारत की वास्तविक शक्ति है—विविधता में एकता।

मिट्टी अलग-अलग प्रदेशों की हो सकती है, प्रतिमा बनाने की कला अलग हो सकती है और आरती की भाषा भी अलग हो सकती है, लेकिन जब देश के करोड़ों कंठ गणपति का जयघोष करते हैं तो भौगोलिक और भाषाई सीमाएं पीछे छूट जाती हैं।

भगवान गणेश का संदेश भी मानो यही है—बुद्धि से भेद समझिए, विवेक से भेद मिटाइए और प्रेम से सबको जोड़िए।

श्री गणेशाय नमः।
गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया।