तकनीक और संसदीय परंपराओं की समझ से ही प्रभावी होगी सांसदों की भूमिका : हरिवंश

MPs' role will become effective only through an understanding of technology and parliamentary traditions: Harivansh

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि संसद के कामकाज में तेजी से हुए डिजिटलीकरण के कारण राज्यसभा की कार्यप्रणाली काफी हद तक पेपरलेस और अधिक प्रभावी हो गई है। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।

रविवार को राज्यसभा सचिवालय द्वारा नवनिर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय विषय बोध कार्यशाला ‘प्रारंभ’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए हरिवंश ने कहा कि यह कार्यक्रम संसदीय जीवन की शुरुआत है, जबकि सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया पूरे कार्यकाल तक निरंतर चलती रहती है।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य नए सदस्यों को राज्यसभा के नियमों, प्रक्रियाओं, संसदीय परंपराओं और सचिवालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराना था, ताकि वे सदन में प्रभावी और सार्थक भूमिका निभा सकें। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी सदस्यों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि इससे उन्हें संसदीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ मिली होगी।

उपसभापति ने कहा कि राज्यसभा सचिवालय के अधिकारी संसदीय कार्यों का व्यापक अनुभव रखते हैं और वे सदैव सदस्यों की सहायता के लिए पेशेवर एवं विनम्र भाव से उपलब्ध रहते हैं।

हरिवंश ने संसद भवन को लोकतंत्र का आधुनिक मंदिर बताते हुए कहा कि यह एक उच्च सुरक्षा क्षेत्र भी है। उन्होंने सदस्यों से सुरक्षा नियमों का पालन करने और संसद की गरिमा व सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग देने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान बजट प्रक्रिया, प्रश्नकाल, विधायी प्रक्रिया, विभागीय संसदीय समितियों, संसदीय कूटनीति तथा डिजिटल गवर्नेंस जैसे विषयों पर वरिष्ठ सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे प्रभावी संसदीय माध्यम है और इसमें व्यवधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।

डिजिटल सुरक्षा पर जोर देते हुए हरिवंश ने कहा कि सांसदों को अपने डिजिटल उपकरणों और लॉगिन क्रेडेंशियल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों की समझ के बिना संसद तकनीकी बदलाव के दौर में प्रभावी नेतृत्व नहीं कर सकती।

उन्होंने नवनिर्वाचित सदस्यों से पूर्व की महत्वपूर्ण संसदीय बहसों का अध्ययन करने, अटल बिहारी वाजपेयी, अरुण जेटली और चंद्रशेखर जैसे प्रख्यात सांसदों के भाषणों से सीखने तथा विश्व की संसदीय परंपराओं का अध्ययन करने का भी आग्रह किया।

समापन पर हरिवंश ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नए सदस्य अपने कार्यकाल में राज्यसभा की गरिमा को और सुदृढ़ करेंगे तथा प्रभावी जनप्रतिनिधि के रूप में लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।