एन जी भट्ट
राजस्थान में अगस्त का आखिरी रविवार राजनीतिक हलचल, कमजोर मानसून से बढ़ती चिंता, परीक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल और बड़े विकास प्रकल्पों की उम्मीदों के नाम रहा। एक ओर 309 नगरीय निकायों के चुनाव का मैदान सज चुका है और भाजपा-कांग्रेस दोनों में टिकटों को लेकर घमासान मचा है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई हिस्सों में बारिश की कमी ने किसानों और पेयजल व्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। जयपुर में नीट -पीजी परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने की घटना ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी बीच जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण की दिशा में काम आगे बढ़ना प्रदेश की राजधानी के लिए बड़ी विकास खबर बनकर उभरा है।
निकाय चुनाव सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंच गए हैं। 309 नगरीय निकायों के चुनाव 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में होंगे तथा 14 सितंबर को मतगणना होगी। नामांकन प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो चुकी है। चुनाव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए करीब ढाई वर्ष के शासन के बाद जमीनी स्तर पर जनसमर्थन परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
जयपुर सहित कई शहरों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के टिकटार्थियों में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा है। टिकटों की घोषणा में देरी और संभावित बगावत की आशंका ने दोनों दलों की मुश्किल बढ़ाई है। कुछ स्थानों पर टिकट को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी तकरार भी सामने आई है।
नामांकन में शुरुआती सुस्ती, बगावत का डर
निकाय चुनावों में नामांकन के शुरुआती दौर में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दी। पहले दिन राज्यभर में 1,144 नामांकन ही प्राप्त हुए। जयपुर में यह संख्या महज 13 रही। राजनीतिक जानकार इसे उम्मीदवार चयन में दलों की सावधानी और बगावत की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।
दिलचस्प यह है कि कई दावेदारों ने पार्टी की अधिकृत सूची आने से पहले ही नामांकन दाखिल कर दिया, ताकि अंतिम समय में किसी तकनीकी समस्या से बचा जा सके। आने वाले दो-तीन दिन राजस्थान की स्थानीय राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
उदयपुर में कांग्रेस ने 80 वार्डों के उम्मीदवार उतारे
लेकसिटी उदयपुर में चुनावी तस्वीर तेजी से स्पष्ट होने लगी है। कांग्रेस ने नगर निगम के सभी 80 वार्डों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। सूची में कई चर्चित स्थानीय चेहरे शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रविवार को प्रतापगढ़ के दौरे पर रहे, जहां उन्होंने जनसभा के साथ निकाय चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक स्थिति का फीडबैक लिया। इससे साफ है कि कांग्रेस स्थानीय चुनाव को केवल नगर निकाय का चुनाव न मानकर व्यापक राजनीतिक संदेश देने के अवसर के रूप में देख रही है।
कमजोर मानसून ने किसानों और जलाशयों की चिंता बढ़ाई
राजस्थान में इस बार मानसून उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। 30 अगस्त तक राज्य में वर्षा की कमी करीब 18 प्रतिशत बताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार 2 सितंबर के आसपास मानसून के फिर सक्रिय होने की उम्मीद है।
राज्य के अनेक क्षेत्रों में कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सरकार को संभावित सूखे की स्थिति के लिए अभी से तैयारी करने की सलाह दी है।
सबसे अधिक चिंता उन क्षेत्रों की है जहां खेती के साथ पेयजल भी वर्षा और बांधों पर निर्भर है।
बीसलपुर बांध पर बढ़ी चिंता
जयपुर, अजमेर और टोंक की पेयजल जरूरतों का प्रमुख आधार बीसलपुर बांध इस बार अगस्त के अंत तक पूरी तरह नहीं भर पाया है। पिछले कुछ दिनों से बांध में पानी की आवक नहीं होने और लगातार पानी की खपत के कारण जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ी है।
राजस्थान के लिए सितंबर की बारिश इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यदि मानसून का अगला दौर कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में पेयजल प्रबंधन सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
जयपुर में नीट -पीजी परीक्षा ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
जयपुर में रविवार को आयोजित नीट -पीजी परीक्षा के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हुए। सीतापुरा स्थित परीक्षा केंद्र पर तकनीकी समस्या के कारण परीक्षा प्रक्रिया बाधित हुई और बाद में प्रभावित अभ्यर्थियों की पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। पुनर्परीक्षा 5 सितंबर को निर्धारित की गई है।
घटना ने देशभर की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की बिजली, इंटरनेट और बैकअप व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सा शिक्षा के अभ्यर्थियों के लिए एक परीक्षा वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से होती है; ऐसे में तकनीकी लापरवाही का असर केवल एक दिन की परीक्षा तक सीमित नहीं रहता।
जयपुर मेट्रो फेज-2 से राजधानी को बड़ी उम्मीद
जयपुर के विकास के लिहाज से सबसे सकारात्मक खबरों में जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण शामिल है। केंद्र सरकार ने 41 किलोमीटर लंबे उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर, 36 स्टेशनों और लगभग 13,037.66 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ तक प्रस्तावित है और इसमें एयरपोर्ट, टोंक रोड, सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, एसएमएस अस्पताल, विद्याधर नगर सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्र जुड़ेंगे।
परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन, यातायात दबाव और भविष्य के शहरी विस्तार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा क्षेत्र में विद्या संबल योजना आगे बढ़ी
राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विद्या संबल योजना के तहत विभिन्न विषयों के रिक्त पदों पर पात्र अभ्यर्थियों को अस्थायी रूप से गेस्ट फैकल्टी के रूप में लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 29 अगस्त को संबंधित अधिसूचना और आदेश जारी किए गए।
राजस्थान जैसे बड़े और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में ग्रामीण तथा दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता शिक्षा की गुणवत्ता से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए इस व्यवस्था का प्रभाव केवल रिक्त पद भरने तक सीमित नहीं बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य से भी जुड़ा है।
सितंबर पर टिकी राजस्थान की निगाहें
अगले कुछ दिन राजस्थान के लिए कई मायनों में निर्णायक हैं। एक तरफ निकाय चुनाव के प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर सामने आएगी और दूसरी तरफ मौसम विभाग की नजर सितंबर के पहले सप्ताह में संभावित मानसूनी सक्रियता पर है। चुनावी राजनीति में जहां भाजपा और कांग्रेस के सामने संगठनात्मक एकजुटता की चुनौती है, वहीं सरकार के सामने जल, कृषि और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर जनता की अपेक्षाएं हैं।
कुल मिलाकर अगस्त का अंतिम रविवार राजस्थान के सामने दो बिल्कुल अलग तस्वीरें रखता है—एक तरफ चुनावी राजनीति का उफान और दूसरी तरफ पानी के लिए आसमान की ओर देखते खेत। जयपुर मेट्रो जैसी दीर्घकालीन परियोजनाएं विकास की उम्मीद जगाती हैं, तो बीसलपुर और खरीफ फसलों की चिंता तत्काल चुनौतियों की याद दिलाती है।
सितंबर राजस्थान के लिए केवल मानसून का अंतिम महत्वपूर्ण महीना नहीं होगा; यह स्थानीय राजनीति में जनता के मूड का भी महीना बनने जा रहा है। निकाय चुनाव के परिणाम सरकार और विपक्ष दोनों को यह संकेत देंगे कि शहरों की जनता किस दिशा में सोच रही है।





