पुस्तक: सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति
पृष्ठ: 300
लेखक: योगेश कुमार गोयल
समीक्षक: सिमर सदोष
प्रकाशक: मीडिया केयर नेटवर्क, गोपाल नगर, नजफगढ़, नई दिल्ली-110043.
मूल्य: 695 रुपये।
रक्षा एवं सुरक्षा के धरातल पर भारत आज केवल आत्म-निर्भर ही नहीं, अपितु एक क्रांतिकारी राष्ट्र और शक्ति-प्रतीक बना है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष 1947 में जिस देश में एक सुई तक नहीं बनती थी, यहां तक कि दो जून की रोटी हेतु पर्याप्त मात्रा में जहां गेहूं भी उपलब्ध नहीं था, वहां आज अत्याधुनिक युद्धक विमान, नौसैनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और मिसाइलें तक बनती हैं, यह इस देश की वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति का ही परिणाम है। प्रारंभ से लेकर आज तक और सागर से लेकर अंतरिक्ष तक की इस गाथा को अतीव रोचक एवं तथ्य-परक ढ़ंग से लेखनीबद्ध किया है प्रख्यात लेखक, पत्रकार, विश्लेषक और ज्ञाता योगेश कुमार गोयल ने।
योगेश कुमार गोयल बेशक अपने आप में एक एन्साइक्लोपीडिया हैं, शब्द-कोष हैं। सुई से लेकर विमान तक, आकाश से लेकर पाताल तक, और दूर क्षितिज के होने तक, उनकी दूर-दृष्टि जितना कुछ समेट सकती है, उतना भर समेट लेने की बौद्धिक क्षमता उनके भीतर है। ‘सागर से अंतरिक्ष तक’ के अपने इस संग्रह में योगेश कुमार गोयल ने निसंदेह रक्षा हेतु और सामरिक क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाली किसी भी प्रकार की रक्षा-सामग्री को सविस्तार और उपयोगी तरीके से अपने पाठक और देश/समाज के प्रत्येक प्राणी के लिए बड़े उपयुक्त तरीके से व्यक्त किया है। निसंदेह, उनकी बौद्धिक क्षमता ने इस पुस्तक को देश के जन-जन के लिए बेहद उपयोगी और अहम बना दिया है।
वर्तमान में, और खासतौर पर भावी समय में विज्ञान और तकनीक ने युद्धों को बेहद खर्चीला और तकनीक आधारित बना दिया है। विज्ञान और तकनीक ने युद्धों को आज धरा के साथ गगन और गगन से भी परे अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों तक पहुंचा दिया है। रूस-यूक्रेन और फिर ईरान-अमरीका-इजरायल युद्ध ने इस खाके को भावी विनाश की तस्वीरों सहित जाहिर किया है। योगेश कुमार गोयल ने इस विनाशक कल्पना को सामाजिक क्षेत्र में मौजूद शस्त्रास्त्रों, उपकरणों और आविष्कारों के व्यापक स्वरूप के साथ इस पुस्तक में चित्रित किया है। पुस्तक में स्वतंत्र भारत की रक्षा नीति, इसरो, मिसाइलों, युद्धपोतों, युद्धक विमानों, पनडुब्बियों आदि की निर्माण प्रक्रिया, इनके सुधार, इनके विस्तार आदि पर बड़े सटीक ढ़ंग से खुलासा किया गया है। रक्षा क्षेत्र में विदेशी सहयोग और साझेदारियों पर भी बड़े उपयुक्त और सटीक ढंग से चित्रण किया गया है।
निसंदेह भारत आज एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उसकी सैन्य सामर्थ्य, वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति की दुंदुभि अब सुदूर क्षितिजों के पार तक सुनाई दे रही है। इस गौरवशाली यात्रा और बदलते भारत की सामर्थ्य को शब्दों में अभिव्यक्त करती योगेश कुमार गोयल की यह पुस्तक देश, समाज और समूचे विश्व के लिए भारत की वैज्ञानिक एवं सामरिक शक्ति की एक प्रभावशाली शिनाख्त प्रस्तुत करती है। पुस्तक में तथ्य, शोध और विश्लेषण का सुंदर समन्वय है। यह न केवल सामान्य पाठकों बल्कि पुस्तकालयों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी और संदर्भनीय कृति बन पड़ी है।
(समीक्षक श्री सिमर सदोष दैनिक अजीत समाचार, जालंधर के समाचार सम्पादक तथा पंजाब कला साहित्य अकादमी के अध्यक्ष हैं)





