बहुत गंभीर है बैंक कैश चैस्ट में करोड़ों के नकली नोटों का मिलना

The discovery of counterfeit notes worth crores in the bank cash chest is a very serious matter


अशोक मधुप


सहारनपुर की पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने का मामला साधारण नही है। ये एक असाधारण और असामान्य घटना है। इसकी जांच भी असामान्य घटना के रूप में होनी वाहिए। नोटबंदी के समय सरकार ने दावा किया था कि नए नोट इस तरह बनाए गए है, कि उनकी नकल नही हो सकती। ये ही घोषणा नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में की थी। ऐसे में प्रश्न यह है कि सरकार के दावे के बाद पांच सौ के नकली नोट कैसे बना गए। नोट इक्का दुक्का कहीं आते तो मान लिया जाता कि किसी खुराफाती ने फोटो स्टेट मशीन से बना लिए है। ये मामला दो− चार ,सौ दो सो नोट का नही है। अभी तक एक करंसी चैस्ट की चल नही जांच में 17 करोड़ रूपये मिल चुके हैं। शुरू में सात करोड़ रूपये मिले थे। ये राशि बढकर अब 17 करोड़ हो गई। अभी ये नही कहा जा सकता कि इतनी ही राशि है। अभी तो जांच शुरू हुई है। ये संख्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है। ये एक कैश चैस्ट का मामला है। देश भर के बैंकों की कैश चैस्ट की जांच होनी चाहिए। इससे बैंक की शाख को धक्का लगा है। बैंक और सरकार अब इस बात की गांरटी कैसे देगी कि बैंक से वितरित की जाने वाली करेंसी असली है? एटीएम से निकलने वाले नोट नकली नही है? करेंसी चैस्ट से करोड़ो की तादाद में नकली नोटों का मिलना बैंक की शाखा पर प्रश्न है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (घंटाघर / सोफिया मार्केट) स्थित पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से असली नकदी बदलकर करोड़ों रुपये की नकली करेंसी रखी गई। शुरुआती जांच और प्राथमिकी में यह रकम ₹7.40 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन विस्तृत ऑडिट के दौरान जाली नोटों का आंकड़ा ₹17 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई है।पंजाब नेशनल बैंक की की ओर से अगस्त 2026 में लगभग ₹11.50 करोड़ की नकदी आरबीआई (जयपुर) भेजी गई थी। मामला तब खुला जब वहां भेजी गई करेंसी की गिनती हुई। गिनती में ₹4,30,900 की कमी पाई गई। मेरठ जोनल ऑफिस से आई जांच टीम ने करेंसी चेस्ट का सीसीटीवी फुटेज खंगाला। फुटेज में पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार नोटों की गड्डियों से नोट निकालता हुआ दिखाई दिया। उसके खिलाफ अलग से चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद नौ अगस्त 2026 से करेंसी चेस्ट का विस्तृत ऑडिट शुरू हुआ। जब चेस्ट में रखी गड्डियों का मिलान किया गया, तो ₹500 के नोटों के 148 से अधिक बंडलों सहित भारी मात्रा में नकली (लो-क्वालिटी) नोट बरामद हुए। गड्डियों के ऊपर और नीचे असली नोट लगाए गए थे, जबकि बीच में नकली नोट भरे गए थे।

बैंक कैश चेस्ट जैसे अत्यंत सुरक्षित क्षेत्र में जहां सख्त निगरानी और बायोमेट्रिक असेस होता है, वहां से असली पैसे गायब कर नकली नोट रख देना बिना बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा है। इस प्रकरण में बैक के तीन अधिकारी और एक पार्ट टाइम हाउसकीपर निलंबित कर उनके विरूद्ध मुकदमें दर्ज कराए गए। सहारनपुर पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए विशेष जांच टीम एसआईटी गठित की है। पुलिस, बैंक की विजिलेंस टीम और आरबीआई की टीम संयुक्त रूप से चेस्ट रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन लेजर और सीसीटीवी की पड़ताल कर रही है। जांच का दायरा हरियाणा और उत्तराखंड तक फैलाया गया है। चल रही जांच के बीच तीन आरोपितों के बैंक खातों को सीज कर दिया गया है।

वहीं आरोपितों की गिरफ्तारी को हरियाणा प्रदेश के यमुनानगर जिले के जगाधरी में दबिश भी दी गई। इसके साथ ही लखनऊ के आरबीआई जोनल कार्यालय की एक और टीम जांच के लिए जिले में पहुंची है। आरबीआई की यह टीम तीन आरोपित वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सहारनपुर सुशील शर्मा व जगाधरी के चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के बैंक खातों में हुए लेनदेन और रकम के स्रोत की जांच करेगी। आरबीआई की नई टीम बैंकिंग रिकार्ड और करेंसी चेस्ट से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही पुरानी जांच टीम की भी मदद करेगी। खास तौर पर नकली नोटों के चेस्ट तक पहुंचने की कड़ी को समझने के लिए कैश की आवाजाही और संबंधित रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि खातों में किन लोगों से रकम आई और किन खातों में रकम ट्रांसफर की गई। नकली करेंसी से जुड़े किसी नेटवर्क तक पहुंचने में बैंकिंग ट्रेल अहम साबित हो सकती है। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की नकली करेंसी मिलने के बाद अब जांच का दायरा जिलेभर के बैंकों तक पहुंचने जा रहा है। इसको लेकर सरकारी और निजी बैंकों में नकदी को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अब जिले के विभिन्न बैंकों में ऑडिट और नकदी के रिकार्ड का मिलान कराने को लेकर संभावना जताई जा रही है। सामान्य तौर पर चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकदी जमा और वितरित होती है। ऐसे में किसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की संदिग्ध या नकली करेंसी का मिलना सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। घटना के बाद मेरठ जोन की सभी करेंसी चेस्ट में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बैंकों को कैश प्राप्त करते समय नोटों की जांच और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। खासतौर पर बड़ी मात्रा में आने वाली नकदी में नकली नोटों की पहचान को लेकर कर्मचारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 17 करोड़ की नकली करेंसी मिलने के बाद पूरे मेरठ जोन की चेस्टों पर अलर्ट जारी होना बताता है कि मामला कितना संवेदनशील है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जांच एजेंसियां नकली नोटों के स्रोत तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं और क्या इस मामले से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है।

ये तो जांच चल ही रही है किंतु इससे काम चलने वाला नही लगता । जांच इस बात की होनी चाहिए कि नकली नोट कहां से आए। ये नकली नोट किस जगह और प्रेस में छप रहे हैं। बैंक की केस चैस्ट में ये नोट कैसे पहुंचे। ऐसा एक ही जगह हुआ या अन्य जगह भी ऐसा ही हो रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार को विशेष जांच टीम गठित करनी होगी। पूरे काकस की जांच सीबीआई और रॉ जैसी संस्थाओं से कराकर संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे। बैंक तक नोट पंहुचाने वाले और छापने वालों पर भी कार्रवाई करानी होगी।

लोगों और व्यापारियों का बैंकों पर बड़ा विश्वास है। वह बिना गिने और नोटों की बिना जांच किए करोडों का लेन−देन करते है। ये घटना बैंकिग व्यवस्था का विश्वास डिगाने वाली है। इस प्रकरण में संलिप्त की संपत्ति की जांच और उसे कब्जे में लेना होगा। जनता में विश्वास पैदा करना होगा कि आगे से ऐसा नही होगा। तेजी से जांच कराकर उसके निर्णय और कार्रवाई भी जनता को बतानी होगी।