राजस्थान में गाँवों की सरकार बनाने का बिगुल, चार चरणों में होगा पंचायत चुनाव

Bugle sounded for forming village governments in Rajasthan; Panchayat elections to be held in four phases

एन जी भट्ट

राजस्थान में अब शहरों के बाद गांवों की सरकार चुनने का समय आ गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पंचायतीराज संस्थाओं के आम चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। इसके साथ ही ग्रामीण राजस्थान में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और संबंधित क्षेत्रों में आचार संहिता लागू हो गई है। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के लिए चुनाव होंगे और करीब 4.03 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसके अलावा 1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य भी चुने जाएंगे। इन चुनावों के बाद 41 जिला प्रमुख और 457 प्रधान चुने जाएंगे।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पंचायती राज संस्थाओ के लिए चार चरणों में मतदान होगा। सरपंच और वार्ड पंचों के लिए मतदान 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होगा। जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया भी चरणबद्ध ढंग से चलेगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से, जबकि सरपंच और वार्ड पंचों का चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाएगा। पंचायत चुनाव की मतगणना की प्रक्रिया भी अलग-अलग स्तर पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी ।

चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही दावेदारों की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है। 8 अक्टूबर से चुनावी प्रक्रिया के तहत लोक सूचना जारी होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई है। 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 15 अक्टूबर को नाम वापसी होगी। इसके बाद मैदान में बचे प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो जाएगी।

सबसे ज्यादा उत्सुकता ग्राम पंचायतों के चुनाव को लेकर है, क्योंकि यहीं से गांव की रोजमर्रा की विकास व्यवस्था और स्थानीय नेतृत्व तय होता है। 14,403 सरपंच और 1,30,584 वार्ड पंचों के निर्वाचन के साथ गांवों को नई पंचायत सरकार मिलेगी। इस चुनाव में सामाजिक प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण रहेगा। पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। आरक्षण व्यवस्था के अनुसार लगभग 7,200 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी। वहीं जिला प्रमुख और प्रधान के पदों पर भी महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में सरपंच के सभी 1,253 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

इन चुनावों को केवल सरपंच और पंच चुनने की प्रक्रिया मानना पर्याप्त नहीं होगा। गांव की सड़क, पेयजल, स्वच्छता, नाली, रोशनी, आवास, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतीराज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए ग्रामीण मतदाता के सामने स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों की कार्यक्षमता का आकलन करने की चुनौती भी होगी। राजस्थान में हाल में नगरीय निकाय चुनावों के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं की परीक्षा होगी। गांव की चौपालों से लेकर पंचायत मुख्यालयों तक चुनावी चर्चा तेज होगी। हालांकि अंतिम फैसला मतदाता अपने स्थानीय अनुभव, मुद्दों और प्रत्याशियों को देखकर करेंगे।

इस तरह पंचायत चुनाव राजस्थान के लोकतांत्रिक ढांचे की जड़ों तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया है। 25 अक्टूबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलने वाला यह चुनावी दौर गांवों की नई सरकार की नींव रखेगा। अब गांव की चौपाल से लेकर जिला परिषद नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और राजस्थान का ग्रामीण मतदाता एक बार फिर अपनी लोकतांत्रिक ताकत का इस्तेमाल करने जा रहा है।