अजय कुमार
अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और अहम बदलाव होने जा रहा है। लंबे समय से चल रही अटकलों और प्रशासनिक कसावट की कवायद के बीच, रामनगरी के प्रबंधकीय तंत्र को नई गति देने के लिए एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में तीन प्रमुख नामों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इन नामों का पैनल पूरी गोपनीयता के साथ एक बंद लिफाफे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सौंप दिया गया है, जिस पर मंगलवार यानी आज होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में गहन मंत्रणा के बाद मुहर लगने की पूरी संभावना है।
गौरतलब हो, राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। देश-विदेश से रोजाना लाखों की संख्या में रामभक्त अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर परिसर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, आंतरिक व्यवस्था और तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक कार्यों का दायरा बहुत बड़ा हो गया है। मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था इस भारी-भरकम दबाव के बीच कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। ट्रस्ट से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, अयोध्या का स्वरूप अब केवल एक धार्मिक कस्बे का नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र का केंद्र बन चुका है। हमें एक ऐसे प्रशासनिक चेहरे की जरूरत है जो मंदिर निर्माण के साथ-साथ सुदृढ़ व्यवस्था और जन-संवाद के संतुलन को साध सके। नए सीईओ की नियुक्ति इसी दिशा में उठाया जा रहा एक बेहद निर्णायक कदम है।
चर्चित तीन नामों के पैनल में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले कुछ खास वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधन विशेषज्ञों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व में बड़े सरकारी उपक्रमों या महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। ट्रस्ट के भीतर यह आम सहमति बन चुकी है कि आने वाले समय में अयोध्या को सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक आधुनिक और अनुशासित प्रबंधन मॉडल के रूप में विकसित करना होगा। राम मंदिर के दूसरे और तीसरे चरण का निर्माण कार्य, संग्रहालय का विकास, तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण व विकास कार्यों की मॉनिटरिंग जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स कतार में हैं। इन तमाम प्राथमिकताओं को गति देने के लिए एक पूर्णकालिक और ऊर्जावान सीईओ की अनिवार्यता महसूस की जा रही थी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में केवल नाम की घोषणा ही नहीं होगी, बल्कि नए सीईओ के अधिकारों और उनके कार्यक्षेत्र की रूपरेखा भी स्पष्ट की जाएगी ताकि प्रशासनिक निर्णयों में किसी प्रकार के विलंब की गुंजाइश न बचे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य ने अनौपचारिक बातचीत में संकेत देते हुए कहा, ट्रस्ट पारदर्शिता और कार्यक्षमता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। जो भी नाम बंद लिफाफे में आए हैं, वे सभी अपनी कार्यशैली और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। कल की घोषणा से अयोध्या के प्रशासनिक गलियारों में एक नया संदेश जाएगा।अयोध्या की जनता और देश भर के राम भक्तों की निगाहें अब ट्रस्ट की इस बैठक पर टिकी हैं। यह नियुक्ति केवल एक पद को भरना मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा होगी कि रामनगरी का भविष्य का प्रशासन कैसे तकनीक, समन्वय और जन-भावनाओं के तालमेल के साथ आगे बढ़ता है। यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो कल शाम तक अयोध्या के नए प्रशासनिक मुख्य के रूप में किसी एक नाम पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी, जो आने वाले वर्षों में राम मंदिर के भव्य और दिव्य स्वरूप को संभालने की धुरी बनेंगे।





