ऋतुपर्ण दवे
आज विश्व हृदय दिवस है। पिछले एक दशक में, स्वस्थ हृदय के महत्व को समझने वालों की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है लेकिन साथ ही दुखद पहलू यह भी है कि हृदय संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। दरअसल, गतिहीन जीवनशैली, खराब खान-पान और बढ़ता तनाव लोगों की आम दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। इसी के चलते हृदय रोग दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। लेकिन यह भी सही है कि जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए हृदय संबंधी बहुतेरी समस्याओं को रोका जा सकता है या बेहतर जीवनशैली से प्रबंधित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी इन्हीं सब कारणों से विश्व हृदय दिवस की परिकल्पना को साकार कर एक दिन विशेष इसे पूरे विश्व में मनाने के निश्चय किया गया ताकि लोगों को इस रोग की बारीकी और शुरुआती लक्षणों को पहचानने में मदद मिल सके। कम से कम इतनी जागरूकता तो आए कि लोग जरूरत पड़ने पर प्राथमिक उपचार और त्वरित स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने की दिशा में जागरूक हो सकें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में सबसे ज्यादा मौतें हृदय रोग से होती हैं। हर साल लगभग एक करोड़ अस्सी लाख लोग इसकी वजह से अपनी जान गंवा देते हैं
विश्व हृदय दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में विश्व हृदय महासंघ द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई। इसका उद्देश्य हृदय रोगों और उनकी रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों के बारे में वैश्विक जागरूकता पैदा करना था। यह दिन हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है, जो दुनिया भर के व्यक्तियों, स्वास्थ्य संगठनों और समुदायों को हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने और निवारक उपायों को प्रोत्साहित करने के लिए एक साथ लाता है।
हृदय रोग के बढ़ते जोखिम और इसके कारकों को समझने, चेतावनी संकेतों को पहचानने और स्वस्थ आदतों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डालने के लिए इस पहल की शुरुआत की गई थी जो सार्थक प्रतीत हो रही है। अब यह विगत 26 वर्षों से, समूचे विश्व में स्वस्थ हृदय को लेकर जागरूकता फैलाने, रोकथाम और प्रारंभिक देखभाल के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए एक वैश्विक मंच बन गया है। हर वर्ष यह दिन एक अलग थीम के साथ मनाया जाता है। इस बार इस दिन पर विश्व हृदय महासंघ ने “डोंट मिस ए बीट” थीम रखी है जिसमें काफी कुछ संकेत छुपे हैं। इस संदेश को दोहराया गया है कि हृदय रोग अक्सर गंभीर जटिलताओं का कारण बनने तक अनदेखा रह जाता है। हार्ट अटैक आने से कुछ हफ्ते पहले सीने में हल्का दर्द, अत्यधिक थकान और सांस फूलने जैसे संकेत मिलने लगते हैं। एसीडिटी, सीने में हल्का दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना, जो काम करने पर बढ़ता है और आराम करने पर कम हो जाता है। बिना किसी भारी काम के हर समय बहुत ज़्यादा थका हुआ और कम ऊर्जा महसूस होना। सांस लेने में तकलीफ जैसे सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य काम करने के दौरान अचानक सांस फूलना। शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द. जबड़े में जकड़न, गर्दन, पीठ, कंधे या बाएं हाथ तक फैलना। ठंडा पसीना और बिना किसी मेहनत के चक्कर आना, अचानक से ठंडा पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस करना। अचानक नींद न आना या सोते वक्त बेचैनी महसूस होना आदि इसके संकेत हैं।
2026 का अभियान तीन प्रमुख संदेशों पर आधारित है लक्षणों को पहचानें, अपने दिल की रक्षा करें, जीवन शैली परिवर्तन में समय के साथ बदलाव करें। जरा सी आहट होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। दरअसल, हृदय रोग को लेकर एक भ्रान्ति भी है कि यह वृद्ध वयस्कों से जोड़ा जाता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, दीर्घकालिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, अपर्याप्त नींद और हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास जैसे कारक समय के साथ जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इनमें से कुछ जोखिम धीरे-धीरे विकसित होते हैं और स्थिति गंभीर होने तक स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ऐसी स्थिति में दिल के बचाव के लिए संतुलित आहार, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, तंबाकू से परहेज और रक्तचाप को नियंत्रित रखने जैसे छोटी-छोटी नियमित आदतें काफी हद तक जोखिम को कम कर सकती हैं। इनमें कई जोखिम की पहचान या संकेत हमारा शरीर दे देता है। सच तो यह है कि हृदय की धड़कन को पहचानने की कला से भी काफी हद तक इस रोग को समझ कर समय रहते चेता जा सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति की हृदय की धड़कन 60 से 100 प्रति मिनट होनी चाहिए। इसके लिए नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्श व जाँच की आजकल हर कहीं आसानी से सुविधाएं उपलब्ध है। हृदय की एक-एक धड़कन महत्वपूर्ण है। इसलिए “डोंट मिस ए बीट” थीम के साथ इस बार हृदय संबंधी रोगों को लेकर जन-जागरूकता को और फैलाएं।





