सुर संगम के 37वें राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह का आगाज, पहले दिन 30 प्रतिभाओं ने शास्त्रीय गायन में दिखाया हुनर

37th National Youth Music Festival by Sur Sangam kicks off; 30 talents showcase their skills in classical vocal music on the first day

समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में दो अक्टूबर को सायं राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि होंगे

रविवार दिल्ली नेटवर्क

जयपुर : राजस्थान रत्न और सुर संगम संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सी मालू के सी मालू को समर्पित दो दिवसीय 37वें राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह और प्रतिभा चयन प्रतियोगिता गुरुवार को जयपुर के होटल बीलवा पैलेस में शुरू हुई।इसमें 10 राज्यों की 70 से अधिक चयनित युवा प्रतिभाएं भाग ले रही है।

समारोह में सायं के संगीत समारोह में राजस्थान के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा मुख्य अतिथि थे। इससे पूर्व सवेरे समारोह का उद्घाटन बॉलीवुड की जानी मानी ग़ज़ल गायिका पद्मश्री पीनाज मसानी, प्रदेश की पहली ध्रुवपद गायिका प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग, बॉलीवुड संगीतकार एवं वायलिन वादक दीपक पंडित, सुर संगम के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश अग्रवाल, वीणा म्यूजिक के प्रबंध निदेशक हेमजीत मालू, प्रसन्नजीत मालू, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के मानद सलाहकार जी. एन. भट्ट और बीलवा पैलेस के प्रबंध निदेशक नीरज कुमार जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया। संचालन शिक्षाविद आर. डी. अग्रवाल ने किया।

30 प्रतिभाओं ने दिखाई शास्त्रीय संगीत की तैयारी
कभी राग यमन की स्वर लहरियां, कभी भीमपलासी का भाव पक्ष तो कभी मियां की तोड़ी, मालकोंस और पूर्वी की शास्त्रीय बारीकियां…। देश के अलग अलग हिस्सों से आई युवा प्रतिभाओं ने जब सात मिनट की समय सीमा में अपनी संगीत साधना को सुरों में ढाला तो निर्णायकों ने भी केवल तैयार प्रस्तुति सुनकर उन्हें नहीं परखा, बल्कि अपनी ओर से राग और गायन के अलग अलग पक्ष सुनाने को कहकर उनकी तालीम और तैयारी की गहराई जानी।

पहले दिन शास्त्रीय गायन के जूनियर और सीनियर वर्ग की प्रतियोगिताएं हुईं। इनमें जयपुर, वाराणसी, बीकानेर, दिल्ली, ग़ाज़ियाबाद, अहमदाबाद, ग्वालियर, इंदौर, मैहर, भटिंडा और सरदार शहर से आई 30 प्रतिभाओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने किराना और ग्वालियर घरानों की गायकी के प्रभाव के साथ राग यमन, भीमपलासी, मियां की तोड़ी, मालकोंस और पूर्वी की प्रस्तुतियां दीं।

जूनियर और सीनियर वर्ग में जयपुर सहित देश के विभिन्न शहरों से आये 35 युवक युवतियों ने भाग लिया

दोपहर बाद हुई सुगम संगीत की प्रतियोगिता के जूनियर और सीनियर वर्ग में जयपुर सहित देश के विभिन्न शहरों से आये 35 युवक युवतियों ने गीत, ग़ज़ल और भजनो की अदायगी से परिसर को सुरमयी कर दिया I

प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक ग्रैमी अवार्ड विजेता पद्मभूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट और संगीतकार समीर सेन ने समारोह में दोपहर बाद उपस्थित रहकर युवा प्रतिभाओं की प्रस्तुतियां सुनीं और उनका हौसला बढ़ाया। प्रत्येक प्रतियोगी को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए सात मिनट दिए गए। निर्णाय प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने तो कई प्रतिभागियों से उनकी निर्धारित प्रस्तुति के अतिरिक्त राग के अलग अलग पक्ष और स्वर विन्यास सुनाने को कहा। इससे प्रतियोगियों की स्वर शुद्धता, रागदारी, लयबोध और संगीत की समझ का समग्र आकलन किया गया।

इस अवसर पर मुंबई से आए सुर संगम के पूर्व ‘सुरश्री’ विजेता और जाने माने ग़ज़ल गायक मोहम्मद वकील का भी अभिनंदन किया गया। सुर संगम के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश अग्रवाल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

प्रतियोगिता के लिए तैयार भव्य और विशाल मंच अपनी प्रकाश सज्जा और प्रस्तुति शैली के कारण किसी संगीत आधारित टेलीविजन रियलिटी शो के मंच जैसा आभास दे रहा था।

दादरा, कजरी, ग़ज़ल और लोक के रंगों से सजी संगीत संध्या

दिनभर युवा प्रतिभाओं की शास्त्रीय संगीत साधना को परखने के बाद शाम को सजी संगीत संध्या में दादरा, कजरी, ग़ज़ल, लोक और लोकप्रिय गीतों के विविध रंग सुनने को मिले। असम की तनुश्री ने ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’ दादरा और ‘बाजे रे मुरलिया’ कजरी की प्रस्तुति से उपशास्त्रीय संगीत का रंग जमाया।

बनारस की डालिया मुखर्जी ने ‘एक राधा एक मीरा’, ‘अब ना बजाओ श्याम बांसुरिया’ और ‘पिया मेहंदी लिया जा मोतीझील से’ की प्रस्तुति देकर महफिल को आगे बढ़ाया। बनारस की ही श्वेता ने ‘तड़पे बिन बालम मोरा जिया’ से विरह की अनुभूति को स्वर दिए। इसके बाद ‘मेरे हमनफस मेरे हमनवा’, ‘हमारी अटरिया पे आ जाओ सांवरिया’ और ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’ की प्रस्तुतियों में ग़ज़ल और उपशास्त्रीय गायकी के अलग अलग रंग उभरे।

इलाहाबाद के सुधेन्दु कुमार ने ‘कैसे कटे दिन रैन सजनी बिन’ के बाद दादरा ‘ना जा ना जा मोरे सांवरिया’ प्रस्तुत किया। उनकी लोक प्रस्तुति ‘बिरहिया’ ने विरह के लोक भाव को सुरों में पिरोते हुए संगीत संध्या को एक अलग रंग दिया।

समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में दो अक्टूबर को सायं राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि होंगे

सुर संगम के 37वें राष्ट्रीय युवा संगीत समारोह एवं गायन प्रतिभा प्रतियोगिता के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में दो अक्टूबर को सायं राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि होंगे । वे प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करेंगे ।