स्वरूपरानी अस्पताल बनता अपराधियों का अड्डा मरीजों तीमारदारों में भय का माहौल

Swarooprani hospital becomes a den of criminals, an atmosphere of fear among the patients and attendants

मनोज पाण्डेय

प्रयागराज : समूचे विश्व में चर्चित संगमनगरी इलाहाबाद / प्रयागराज शहर जो कभी राष्ट्र गौरव चंद्रशेखर आजाद साहित्यकार लेखक शिक्षाविद न्यायविद एवं प्रधानमंत्री पंडित नेहरू संत शिरोमणि प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जैसे दिव्य विभूतियों के कृत कर्मों से आलोकित पुष्पित पल्लवित होते हुए राष्ट्रनिर्माण में अपनी अलग पहचान रखने में जाना जाता रहा है एवं जिसकी आध्यात्मिक सांस्कृतिक आभा समूचे राष्ट्र को सदियों से एक सूत्र में बांधने का काम करता रहा तथा जिसकी चिकित्सा पद्धति एवं संस्कार युक्त कुशल चिकित्सक चर्चा के केंद्र बिंदु रहे है किंतु पिछले कुछ वर्षों से सरकार द्वारा संचालित सभी सुविधाओं से सुदृढ़ स्वरूपरानी अस्पताल प्रयागराज एवं प्रदेश के बहुत से जनपदों में आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण एवं शहरी मरीजों के भरोसे का प्रतीक रहा है पर आजकल अपराधियों एवं अराजकता का अड्डा बनता जा रहा है अब यहां के चिकित्सक अपनी उत्तम चिकित्सा से पहचान रखने में रुचि नहीं रखते बल्कि अपने मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन संगठन की शक्ति का अस्पताल में भर्ती मरीजों तीमारदारों एवं सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं / व्यवस्थाओं पर सवाल करने वालों पर कड़ा प्रहार करते है जिससे अस्पताल में सदैव भय का वातावरण बना रहता है जहां कानून का नहीं डाक्टर्स एसोसिएशन का राज चलता है इसी कड़ी में इसी अस्पताल की गुंडागर्दी से कुछ माह पूर्व एक महिला अधिवक्ता मरीज की मौत हो गई थी जिसको लेकर कुछ अधिवक्ताओं में आक्रोश था कुछ दिन बाद सब सामान्य हो गया इसी क्रम में पुनः एक अधिवक्ता सर्वेश शुक्ला को भी किसी मरीज के प्रकरण को लेकर डाक्टरों के व्यवहार पर सवाल करने एवं अपने को अधिवक्ता बताने पर दबंग महिला पुरुष डाक्टरों द्वारा जमकर मारा पीटा जाता है जिससे अधिवक्ता समाज अस्पताल प्रशासन दोषी डाक्टरों के खिलाफ कठोर कार्यवाही हेतु अस्पताल परिसर में धरना देता रहा जिससे गंभीर रोगियों में भय का वातावरण देखने को मिला जो एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है क्या स्वरूपरानी अस्पताल सरकार की पकड़ से परे है क्या स्वास्थ्य संगठनों की शक्तियां सरकार से ज्यादा ताकतवर है क्या सरकार संगठनों के शक्तियों के आगे नतमस्तक है क्या शाशन प्रशासन के मिलीभगत से सब हो रहा है यदि ऐसा है तो आम नागरिकों को सोचना होगा और अपने ऊपर आये दिन अस्पताल परिसर में हो रहे अपराध अत्याचार के लिए मजबूती से संगठित होकर लड़ना होगा