- 25 अक्टूबर को शाह ऑडिटोरियम में कृष्ण भक्ति, राधा-कृष्ण प्रेम और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम
- रासाचार्य रामबल्लभ जी के निर्देशन में होगा आयोजन
नीति गोपेन्द्र भट्ट
नई दिल्ली : शरद पूर्णिमा की पावन बेला पर राजधानी दिल्ली में सिविल लाइंस के राजनिवास मार्ग स्थित शाह ऑडिटोरिय में 25 अक्टूबर को श्री राम कृष्ण सेवा संस्थान के तत्वावधान में वृंदावन की विश्वप्रसिद्ध रासलीला परंपरा जीवंत होने जा रही है।
श्री राम कृष्ण सेवा संस्थान के संस्थापक चेयरमेन प्रवासी राजस्थानी ओ पी बागला ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा के अलौकिक प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक मिलन का संदेश देने वाला ‘रासलीला एवं महारास महोत्सव’ रविवार, 25 अक्टूबर को शाह ऑडिटोरियम में सायं 5:30 बजे से आरंभ होगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं को ब्रज की आध्यात्मिक संस्कृति और कृष्ण-भक्ति की परंपरा से जोड़ने का प्रयास है।
संस्था के प्रधान महेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि वृंदावन की विश्वप्रसिद्ध रासलीला मंडली द्वारा प्रस्तुत इस महोत्सव में रासाचार्य पद्मश्री स्व. स्वामी रामस्वरूप जी के सुपुत्र रासाचार्य श्री रामबल्लभ जी के निर्देशन में महारास लीला का मंचन किया जाएगा। प्रवेश निमंत्रण कार्ड द्वारा होगा।
संस्था के महामंत्री जय प्रकाश गोयल ने बताया कि आयोजन में समिति में मुख्य रूप से नीरज गोयल, प्रदीप बेरिवाल, पुष्पेंद्र कुमार गोयल, श्याम सुंदर गुप्ता, ललित पोद्दार, के.सी. लाठ और हरीश नारसरिया, प्रवीण जालान पिंकी, सतीश जिन्दल,रतीश मित्तल,राजेश बंसल, प्रमोद कंसल,पवन जैन,पवन कुमार गोयल, बी के गुप्ता,राजू सिंघल, विपिन पोद्दार,रमेश बागला,अश्विनी चौधरी,नितिन गुप्ता, क्षीतिज मित्तल और तरुण सिंघल सहित अन्य पदाधिकारी भी शामिल हैं।
चेयरमेन ओ पी बागला ने बताया कि तेजी से बदलते शहरी जीवन में ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भारतीय परंपराओं, लोकनाट्य और भक्ति साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। रासलीला भारतीय रंगमंच की ऐसी विशिष्ट परंपरा है, जिसमें संगीत, नृत्य, संवाद और अध्यात्म एक साथ दिखाई देते हैं। महोत्सव में राधाजी की श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति, गोपियों की प्रेम-साधना, नारदजी और कामदेव से जुड़े प्रसंग तथा भगवान शिव के गोपी रूप में रासलीला में सम्मिलित होने की कथा जैसे प्रसंगों को मंचित किया जाएगा । गोपी गीत और महारास की भावपूर्ण प्रस्तुति इस आयोजन का विशेष आकर्षण होगी।
ब्रज संस्कृति से जुड़ने का अवसर
शरद पूर्णिमा पर आयोजित यह महोत्सव दिल्लीवासियों को ब्रज की रास परंपरा का अनुभव कराने के साथ श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम, करुणा, समर्पण और आध्यात्मिक एकात्मता का संदेश देगा। महारास के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधाजी और गोपियों के उस दिव्य आध्यात्मिक संबंध को प्रस्तुत किया जाएगा, जो लौकिक प्रेम से परे आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक माना जाता है।
महारास: प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
शरद पूर्णिमा का भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला से विशेष संबंध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना तट पर शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाकर प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराई थी। इस लीला का मर्म केवल नृत्य और संगीत नहीं, बल्कि अहंकार से मुक्ति, निष्काम प्रेम और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण है।





