शख्सियत: खोजी पत्रकारिता व वैचारिक शुचिता के पुरोधा दिग्गज पत्रकार ‘राम बहादुर राय’

Personality: Veteran journalist Ram Bahadur Rai—a stalwart of investigative journalism and ideological integrity.

दीपक कुमार त्यागी

  • धरा पर विरले ही जन्म लेती हैं ‘राम बहादुर राय’ जैसे शानदार व्यक्तित्व वाली शख्सियत
  • जीवनपर्यंत चकाचौंध से दूर रहते हुए सादा जीवन, उच्च विचार के सिद्धांतों पर अमल करते दिग्गज पत्रकार ‘राम बहादुर राय’
  • सिद्धांतों पर अडिग रहने वाली एक अनुकरणीय शख्सियत हैं वरिष्ठ पत्रकार ‘राम बहादुर राय’
  • छात्र जीवन से ही आम जनमानस की सशक्त आवाज़ बनकर लगभग 15 वर्षों तक विभिन्न जनांदोलनों से जुड़े रहे ‘राम बहादुर राय’
  • ‘राम बहादुर राय’ ने देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन शख्सियतों से बेहद प्रगाढ़ संबंध होने के बाद भी कभी भी अपनी कलम को सत्य लिखने से ठिठकने नहीं दिया
  • लेखनी के दम पर सिस्टम की नींद उड़ानें वाले पत्रकार हैं ‘राम बहादुर राय’

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के सोनाड़ी गांव में साधारण किसान परिवार पिता शिव दत्त राय व माता फूलमती के यहां 1 जुलाई 1946 को जन्मे ‘राम बहादुर राय’ का जीवन सफर हर चरण में ही बेहद ही प्रेरणा स्रोत रहा है। उनकी कक्षा पांच तक की शिक्षा पश्चिम बंगाल के मालदह (मालदा) में हुई थी। इसके बाद कक्षा छह से आठवीं तक की शिक्षा निकटवर्ती गांव अवथही के पूर्व माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त करने के बाद ‘राम बहादुर राय’ ने दसवीं तक की शिक्षा एसएमएन इंटर कालेज मच्छटी से ग्रहण की थी। फिर वो बारहवीं कक्षा की पढ़ाई के लिए उत्तर प्रदेश के गाजीपुर चले गए जहां एमएच इंटर कालेज से इंटमीडिएट पास किया। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने बनारस के डीएवी कॉलेज में दाखिला लिया जहां से उन्होंने स्नातक करने के पश्चात अर्थशास्त्र में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। ‘राम बहादुर राय’ छात्र जीवन से ही विभिन्न तरह की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ गए थे। उनका विवाह विद्यावती राय से हुआ और उनके भरे-पूरे परिवार दो बेटे देवेंद्र नाथ राय व अमोघ देव राय और उनका पूरा भरा-पूरा परिवार है। ‘राम बहादुर राय’ आज के दौर में अखबारों की सुर्खियों में भले ही न हों, लेकिन उनके द्वारा किये गये देश व समाज हित के कार्यों व लेखन का व्यापक प्रभाव आज के समय में भी देश के सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट रूप से नज़र आता है। वह छात्र जीवन से ही आम जनमानस की सशक्त आवाज़ बनकर के लगभग 15 वर्षों तक विभिन्न जनांदोलनों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एम.ए. (अर्थशास्त्र) में पढ़ाई की थी। वहीं उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल किया था। उन्होंने बीएचयू से हिंदू शब्द हटाने से रोकने के अपने छात्र जीवन की संघर्षपूर्ण राजनीति से लेकर के जयप्रकाश नारायण के द्वारा चलाए गए जेपी आंदोलन में सहभागिता करते हुए मीसाबंदी और देश में लगे आपातकाल में पुनः बंदी के रूप में और अपनी लेखनी से देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व उनके पूरे सिस्टम की नींद उड़ा कर के इतिहास रचने का कार्य किया था, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से लेकर के पत्रकारिता तक उन्होंने हर कदम पर अपने विचारों और सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया है। उनका जीवन रचना, सृजन और संघर्षपूर्ण जीवन की लंबी यात्रा का एक बेमिसाल, अनुकरणीय उदाहरण है। हालांकि उन्होंने जीवन यात्रा के अपने इस सफ़र में सबसे ज्यादा समय एक ऐसे पत्रकार के रूप में गुजारा है, जो अपनी लेखनी से देश व समाज को सकारात्मक नयी दिशा देने की ताकत रखता हो। उन्होंने पढ़ाई के बाद राष्ट्रहित व समाज हित के सरोकारों के उद्देश्य से एक पत्रकार के रूप में वर्ष 1979 में कार्य करना शुरू किया था। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत की थी। हिन्दुस्थान समाचार, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, हिन्दी पाक्षिक ‘प्रथम प्रवक्ता’ और ‘यथावत’ हिन्दी पाक्षिक में संपादक का दायित्व संभाला। जनसत्ता और नवभारत टाइम्स के लिए लगातार 18 वर्ष तक लोकसभा की रिपोर्टिंग की। उनके राजनीतिक विश्लेषण, दल प्रणाली, चुनाव सुधार, संविधान, राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना और उत्तर पूर्व के राज्यों पर अध्ययन और लेखन काबिले-तारीफ है। उन्होंने अनायास और जनसत्ता अखबार में ‘पड़ताल’ कॉलम भी नियमित रूप से लंबे समय तक लिखा। वहीं राष्ट्रीय सहारा के कॉलम हस्तक्षेप में भी लिखा, उन्होंने विशेष आग्रह पर देश व दुनिया के समाचार पत्र, पत्रिकाओं न्यूज़ वेबपोर्टल आदि के लिए भी लेखन का कार्य किया है। उनकी देश व दुनिया में प्रसिद्ध पुस्तकों में भारतीय संविधानः एक अनकही कहानी, रहबरी के सवाल (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जीवनी), मंजिल से ज्यादा सफर (पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की जीवनी), आचार्य जे.बी. कृपलानी की जीवनी- शाश्वत विद्रोही राजनेता, काली खबरों की कहानी (पेड न्यूज पर केंद्रित), भानुप्रताप शुक्ल- व्यक्तित्व और विचार, पंडित दीनदयाल उपाध्याय समग्र के पहले खंड में ‘वह काल’ और आखिरी खंड में ‘अवसान’ का लेखन, नीति-राजनीति, अर्थ-अनर्थ, समाज-संस्कृति, प्रतिपक्ष, इमरजेंसी के 50 साल, हमारे बाला साहब देवरस आदि प्रमुख हैं।

“देश के बेहद प्रतिष्ठित पदम भूषण और पद्मश्री जैसे सम्मानों से सम्मानित अपनी लेखनी से ही सिस्टम को हिलाने का दम रखने वाले दिग्गज पत्रकार ‘राम बहादुर राय’ फिलहाल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2015 से अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी से निर्वहन कर रहे हैं। उनका ओजस्वी व्यक्तित्व, क्रांतिकारी, आंदोलनकारी, राष्ट्र व समाज हितों के लिए समर्पित पत्रकार, समाज की नब्ज व मानवीय संवेदनाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को पहचानने वाला लेखक, कुशल नेतृत्वकर्ता और संगठन को नये आयाम देने वाला संगठनकर्ता का देश व दुनिया के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण है।”

दिग्गज पत्रकार ‘राम बहादुर राय’ के देश के शासन-प्रशासन के सर्वोच्च पदों पर आसीन बेहद ही ताकतवर लोगों से बेहद घनिष्ठ संबंध हैं, लेकिन इसके बावजूद भी वह अहंकार से कोसों दूर रहते हुए बेहद सादगी, सरलता, सौम्यता, ईमानदारी व देशभक्ति के भाव से परिपूर्ण होकर जीवन व्यतीत करते हैं, धरती पर ऐसे उच्च कोटि वाले व्यक्तित्व की शख्सियत विरले ही देखने को मिलती है। ‘राम बहादुर राय’ ने हर पल जीवन पथ पर बेखौफ होकर के चलते हुए उच्च आदर्शों और नैतिकता के मानदंडों का पालन किया, चाहे उनके व उनके परिवार सामने कैसी भी विकट परिस्थिति हो वह हमेशा ही एक पर्वत की तरह अडिग होकर के सिद्धांतों पर खड़े रहे। उन्होंने कठिन से कठिन समय में कभी भी क्षणिक स्वार्थों की पूर्ति की खातिर सिद्धांतों से समझौता नहीं किया है। उन्होंने पत्रकारिता व राजनीति में सक्रिय अन्य बहुत सारे लोगों की तरह कभी भी दोगला जीवन नहीं जिया, हमेशा सिद्धांतों के हिसाब से जीवन के वास्तविक मूल्यों का अनुसरण किया। पत्रकारिता के मूल सिद्धांत, नियम-कायदे, कानून व आदर्शों को जीवन में उतारने वाले पत्रकारिता जगत के शिखर पुरुष ‘राम बहादुर राय’ ने राजनीति के शिखर पुरुषों से बेहद ही मधुर संबंध होने के बावजूद भी रिश्तों की डोर के चलते कभी भी अपनी कलम को सत्य लिखने से ठिठकने नहीं दिया है।

पत्रकार के साथ-साथ ‘राम बहादुर राय’ ने विभिन्न सामाजिक दायित्व का भी बखूबी निर्वहन किया है, वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र का अध्यक्ष के साथ-साथ प्रभाष परंपरा न्यास के प्रबंध न्यासी और श्री गुरु गोविंद सिंह ट्राई सेंटेनरी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद में राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत विजीटर सदस्य भी रहे। प्रधानमंत्री संग्रहालय की आम सभा के सदस्य रहे। सर्वश्रेष्ठ सांसद चयन समिति 2014-2019 के भी सदस्य रहे। दिल्ली के राजघाट पर स्थित गांधी-समाधि समिति के सदस्य। अटल स्मृति न्यास के सचिव। वहीं माटी संस्था के अध्यक्ष, कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट में ट्रस्टी के रूप में, प्रसिद्ध प्रज्ञा संस्थान में ट्रस्टी के रूप में। प्रसिद्ध बहुभाषी न्यूज़ एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार में निदेशक मंडल के सदस्य और उसके अन्य प्रकाशनों के समूह के संपादक के रूप में दायित्व निर्वहन कर रहे हैं।

दिग्गज पत्रकार ‘राम बहादुर राय’ को मिले सम्मानों की भी एक लंबी फेहरिस्त है, उन्हें भगवान दास जनजागरण पत्रकारिता पुरस्कार – 1990, हिन्दी अकादमी, दिल्ली, पत्रकारिता पुरस्कार -1994-95,
एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान आपातकाल (26 जून, 1975 से मार्च, 1977) लोकतंत्र के लिए संघर्ष की गाथा एवं सत्याग्रही सम्मान, जयपुर – 2009, माधवराव सप्रे संग्राहलय स्मृति समाचार एवं शोध संस्थान सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता के लिए – 2010, विकल्प संस्था का का पत्रकारिता सम्मान 2010, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान – 2013,
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान – 2014,
राष्ट्रपति द्वारा प‌द्मश्री सम्मान – 2015, माणिक चंद्र वाजपेयी, राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान – 2015,
दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन, भोपाल, भारत का विश्व हिन्दी सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ, पत्रकारिता भूषण सम्मान – 2020, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा मध्यप्रदेश के कला संकाय के अंतर्गत डी. लिट की मानद उपाधि, राष्ट्रपति के द्वारा पद्मभूषण सम्मान – 2025 आदि सम्मान इसकी एक बानगी मात्र हैं।

हालांकि सरल स्वभाव की शानदार शख्सियत वरिष्ठ पत्रकार ‘राम बहादुर राय’ को केवल पत्रकारिता को सीमाओं के दायरे में बांधना उचित नहीं है, वह अकूत ज्ञान का भंडार हैं, उनके सामाजिक व राजनीतिक विश्लेषण का आज भी कोई तोड़ नहीं है, वह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक ऐसी संस्था हैं जिनके लिए हर परिस्थिति में राष्ट्र व समाज हित सर्वोपरि है। मैं राष्ट्र की ऐसी महान विभूति को अपनी चंद पंक्तियां समर्पित करता हूं –

“मैं सिद्धांतों पर अडिग रहने वाला विचार हूँ, मैं देशवासियों की अभिव्यक्ति की पुकार हूँ, मैं सत्य पर अडिग रहकर करता विचारों का प्रसार हूँ, मैं निड़र निर्भीक ‘राम बहादुर राय’ पत्रकार हूँ।।”