शिया समुदाय को क्षेत्रीय राजनीति का माध्यम न बनाया जाए — मौलाना हसन अली राजानी

Shia community should not be made a medium of regional politics – Maulana Hasan Ali Rajani

रविवार दिल्ली नेटवर्क

नई दिल्ली : मौलाना हसन अली राजानी ने ईरान की क्षेत्रीय नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान को इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और अन्य देशों के आंतरिक मामलों में कथित राजनीतिक एवं सैन्य हस्तक्षेप की नीति छोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वतंत्र देश को अपनी राजनीतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का फैसला स्वयं करने का अधिकार है। किसी दूसरे देश को धर्म या विचारधारा के नाम पर दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। मौलाना राजानी ने कहा कि पिछले लगभग चार दशकों में ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और उससे जुड़े सशस्त्र संगठनों एवं राजनीतिक नेटवर्क की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इराक के राजनीतिक फैसले बगदाद में होने चाहिए, तेहरान में नहीं। इसी प्रकार सीरिया, लेबनान और यमन के नागरिकों को भी अपने भविष्य का फैसला स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार मिलना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि शिया धर्म और शिया समुदाय को किसी एक देश की सरकार की नीतियों से जोड़ना उचित नहीं है। शिया मुसलमान दुनिया के विभिन्न देशों के नागरिक हैं और उनकी राष्ट्रीय निष्ठा अपने-अपने देश के प्रति होनी चाहिए। मौलाना राजानी ने कहा कि ईरान के आम नागरिकों और ईरानी सरकार की नीतियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। ईरान की जनता भी शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर भविष्य की हकदार है।उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और इस्लामी देशों से अपील की कि क्षेत्रीय संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।उन्होंने कहा कि शिया पहचान का मूल संदेश न्याय, इंसानियत, शांति और एकता है। धर्म को युद्ध, राजनीतिक हस्तक्षेप या क्षेत्रीय वर्चस्व का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। मौलाना राजानी ने कहा कि मध्य पूर्व को अब युद्ध और प्रॉक्सी संघर्षों की नहीं, बल्कि शांति, संप्रभुता, पुनर्निर्माण, शिक्षा और मानवीय विकास की आवश्यकता है।