मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा हरियाणवी कवि-सम्मेलन आयोजित

Haryanvi Kavi-Sammelan organized by Manumukt 'Manav' Memorial Trust

4 महाद्वीपों और 7 देशों के 20 कवियों ने की सहभागिता

डॉ. सत्यवान सौरभ/डॉ. प्रियंका सौरभ

नारनौल। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा 60वें हरियाणा-दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य वर्चुअल ‘वैश्विक हरियाणवी कवि-सम्मेलन’ का आयोजन गत शाम किया गया। नारनौल के उद्योग विस्तार अधिकारी डॉ. सुनील भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत चीफ ट्रष्टी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ के प्रेरक सान्निध्य तथा डॉ. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस कवि-सम्मेलन में भारत, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, स्पेन, डेनमार्क और अमेरिका सहित सात देशों के बीस कवियों ने हरियाणी भाषा में काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि तथा ब्रजभाषा साहित्य अकादमी, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के निदेशक डॉ. केशवदेव शर्मा ने हरियाणवी को जन-मानस की भाषा बताते हुए कहा कि इसमें हरियाणा की माटी की महक और संस्कृति की मिठास को सहज ही अनुभव किया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मनोज भारत (भिवानी) ने, ट्रस्ट द्वारा हरियाणवी भाषा के विकास हेतु किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए, कहा कि हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण हेतु हरियाणवी भाषा और साहित्य का विकास जरूरी है। विशिष्ट अतिथि तथा‌ कोल इंडिया लिमिटेड के पूर्व महानिदेशक राजपाल यादव (गुरुग्राम) ने, हरियाणवी भाषा और संस्कृति‌ के महत्त्व को रेखांकित करते हुए, कहा कि प्रत्येक हरियाणावासी को अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए।

तत्पश्चात् आयोजित कवि-सम्मेलन में ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) के रोहितकुमार हैप्पी ने ‘हरियाणा का मान बढावैं’, सिडनी (आस्ट्रेलिया) की डॉ. भावना कुंँअर ने ‘माट्टी की म्हैक’, आबूधाबी (यूएई) के अवधेश राणा ने ‘चौधरी साहब’, आसन (नीदरलैंड) की डॉ. ऋतु ननंन पांडे ने ‘अनोक्खा हरियाणा’, मैड्रिड (स्पेन) की पूजा अनिल ने ‘अस्सी बरस’, कोपनहेगन (डेनमार्क) की सविता जाखड़ ने ‘म्हारा हरियाणा’, अमेरिका से सैन डियगो की डॉ. कमला सिंह ने ‘हरियाणा की गोरव-गाथा’ और कैलिफोर्निया की ओमपति ग्रेवाल ने ‘बाळकपण कै खेल’ तथा भारत से अलवर के संजय पाठक ने ‘माणस हीणा होग्या’, गुरुग्राम के राजपाल यादव ‘राज’ ने ‘बीरांँ की धरती’, सिरसा के‌ बलबीरसिंह वर्मा ने ‘बाळक मैं हरियाणे का’, भिवानी के डॉ. मनोज भारत ने ‘हरियाणवी दोहे’ और डॉ. वीएम बेचैन ने ‘लुगाई की बैरण लुगाई’, सिवानी मंडी की डॉ. प्रियंका सौरभ ने ‘साँझ का टेम’ और डॉ. सत्यवान सौरभ ने ‘चोपाल’ तथा नारनौल से डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने ‘बेट्टी म्हारी आन’, डॉ. पंकज गौड़ ने ‘हरियाणा कै माणस’ और डाॅ. कृष्णा आर्या ने ‘हरियाणा कै वासी’ शीर्षक रचना का पाठ किया। इससे पूर्व चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ ने हरियाणवी भाषा के स्वरूप और स्थिति पर प्रकाश डाला तथा अपने हरियाणवी दोहे प्रस्तुत किये। उनका एक दोहा देखिये– “बड़-पिप्पळ कै देस म्हैं, पुज्जित आज कणेर। बुड्ढा बरगद मोन सै, देख्य समै का फेर।।”

उल्लेखनीय है कि लगभग दो घंटों तक चले इस कवि-सम्मेलन में कवियों ने, अपनी कविताओं के माध्यम से, हरियाणा प्रदेश, हरियाणी बोली और हरियाणवी संस्कृति का गौरव-गान कर ‘हरियाणा-दिवस’ की गरिमा को चार चांँद लगा दिए।

कवि-सम्मेलन में वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) से डॉ. एस अनुकृति, सिडनी (आस्ट्रेलिया) से प्रगीत कुअँर, वार्सीलोना (स्पेन) से सुरेंद्र हरियाणवी, टोरंटो (कनाडा) से हरमहेंद्र यादव और भारत से डॉ. पीए रघुराम (तलश्शेरी), डॉ. संतोषकुमार शर्मा (अलीगढ़), डॉ. (प्रिंसिपल) यश वीर दहिया (रतनगढ़), डॉ. राजेश शर्मा और सुमन भाटी (हिसार), राजपालसिंह गुलिया (झज्जर) तथा ट्रस्टी डॉ. कांता भारती, डॉ. पुष्पलता भारद्वाज, श्रद्धा शर्मा, सरोज कश्यप, कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट, नीतेश भारद्वाज, एडवोकेट और सुभाष कश्यप (नारनौल) की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।