अशोक भाटिया
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा ने एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी मोड़ लिया है। ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से अनुप्राणित प्रधानमंत्री मोदी का रणनीतिक दृष्टिकोण भारत को एक मूक दर्शक या केवल प्रतिक्रिया देने वाले राष्ट्र की छवि से बाहर निकालकर एक सक्रिय, दृढ़ और निर्णय लेने वाले वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करता है। इस रणनीतिक दृष्टिकोण का सबसे प्रखर और स्पष्ट रूप आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस यानी शून्य सहिष्णुता की नीति के रूप में दिखाई देता है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भारत ने अपनी रक्षात्मक नीति का परित्याग कर ‘आक्रामक-रक्षात्मक’ रणनीति को अंगीकार किया है, जिसका सीधा अर्थ है कि भारत अब संकट के समय केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करता, बल्कि संकट के मूल स्रोत पर प्रहार करने की क्षमता रखता है। इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की साख को अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ किया है और देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री मोदी के रणनीतिक विजन का मुख्य स्तंभ रणनीतिक स्वायत्तता है। इसका तात्पर्य यह है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए बिना किसी वैश्विक दबाव के अपनी सुरक्षा और विदेश नीतियां स्वयं निर्धारित करता है। अतीत में भारत की पहचान अक्सर एक ऐसे राष्ट्र की थी जो आतंकी घटनाओं के पश्चात वैश्विक समुदाय से गुहार लगाता था अथवा केवल राजनयिक विरोध दर्ज कराता था। इस दृष्टिकोण को रणनीतिक हलकों में ‘रणनीतिक संयम’ कहा जाता था। परंतु प्रधानमंत्री मोदी ने इस परिपाटी को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने वैश्विक मंचों से यह स्पष्ट उद्घोष किया कि आतंकवाद और द्विपक्षीय बातचीत कभी भी एक साथ नहीं चल सकते। सुरक्षा और विकास के इस अनूठे समन्वय ने देश के भीतर एक ऐसे सुदृढ़ वातावरण का निर्माण किया है, जहां आर्थिक प्रगति और आंतरिक सुरक्षा एक दूसरे के पूरक बनकर उभर रहे हैं।
आतंकवाद के विरुद्ध इस कड़े प्रहार का सबसे पहला और जीवंत उदाहरण वर्ष २०१६ में उरी सैन्य शिविर पर हुए कायरतापूर्ण हमले के पश्चात देखने को मिला। भारतीय सेना के विशेष बलों ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को ध्वस्त कर दिया। इस सर्जिकल स्ट्राइक ने दुनिया को यह कड़ा संदेश दिया कि भारत अपनी रक्षा के लिए सीमाओं के बंधन को आड़े नहीं आने देगा। इसके पश्चात वर्ष २०१९ में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले का उत्तर देते हुए भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट के भीतर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर हवाई हमला किया। इस साहसिक कदम ने न केवल सीमा पार बैठे आकाओं के हौसले पस्त किए, बल्कि दुश्मन देश के परमाणु ब्लैकमेल के मिथक को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। इन दोनों घटनाओं ने वैश्विक सैन्य इतिहास में भारत की एक नई और आक्रामक छवि को रेखांकित किया।
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी के रणनीतिक दृष्टिकोण ने देश के भीतर छिपे देशविरोधी तत्वों और उनके वित्तीय तंत्र पर चौतरफा प्रहार किया है। इस दिशा में ५ अगस्त २०१९ को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० और ३५ए का उन्मूलन करना आधुनिक भारत के इतिहास का सबसे साहसिक राजनीतिक और रणनीतिक निर्णय था। इस कदम ने उस संवैधानिक विसंगति को सदैव के लिए समाप्त कर दिया, जिसका अनुचित लाभ उठाकर अलगाववादी और सीमा पार के तत्व घाटी के युवाओं को गुमराह करते थे। इस ऐतिहासिक निर्णय के फलस्वरूप कश्मीर में पथराव की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, स्थानीय आतंकी भर्ती में ऐतिहासिक गिरावट आई है और यह क्षेत्र अब अशांति के दौर से निकलकर पर्यटन और आर्थिक विकास के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।
इसी प्रकार देश के एक बड़े भूभाग को प्रभावित करने वाले वामपंथी उग्रवाद अर्थात नक्सलवाद पर भी केंद्र सरकार ने अत्यंत कठोरता से नकेल कसी है। सरकार ने इसके लिए ‘कड़ी सुरक्षा कार्रवाई’ और ‘तीव्र विकास’ की दोहरी नीति अपनाई। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में नक्सली हिंसा की घटनाओं में सत्तर प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। सुरक्षा बलों ने उन सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में अपने शिविर स्थापित किए हैं, जिन्हें कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माना जाता था। इसके साथ ही देश के भीतर सक्रिय स्लीपर सेल्स और अफवाह तंत्र पर प्रतिबंध लगाकर उनके राष्ट्रविरोधी मंसूबों को समय रहते निष्प्रभावी कर दिया गया है।
आतंकवाद को जीवित रखने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक यानी ‘टेरर फंडिंग’ पर भी सरकार ने आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक की है। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में व्यापक संशोधन करके उन गैर-सरकारी संगठनों के वित्तीय स्रोतों को बंद कर दिया गया जो विदेशों से धन प्राप्त कर उसका उपयोग देश विरोधी गतिविधियों में करते थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी को असीमित शक्तियां प्रदान की गईं, जिससे वे देश के बाहर भी भारतीयों के खिलाफ हुए आतंकी मामलों की स्वायत्तता से जांच कर सकें और आतंकियों की संपत्तियों को सीधे कुर्क कर सकें। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के मंच का प्रभावी उपयोग करते हुए भारत ने पाकिस्तान के आतंकी वित्तपोषण को बेनकाब किया, जिसके कारण वह देश दीर्घकाल तक वैश्विक प्रतिबंधों की सूची में बना रहा और उसकी अर्थव्यवस्था पंगु हो गई।
वैश्विक कूटनीति के पटल पर प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद की परिभाषा को लेकर महाशक्तियों के दोहरे मापदंडों को निरंतर चुनौती दी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, जी२०, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे हर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच से यह संदेश दिया कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसमें ‘अच्छे आतंकवाद’ या ‘बुरे आतंकवाद’ जैसी कोई श्रेणी नहीं हो सकती। भारत ने नई दिल्ली में ‘नो मनी फॉर टेरर’ सम्मेलन की मेजबानी कर वैश्विक वित्तीय प्रणाली को आतंकियों की पहुंच से दूर रखने की रूपरेखा तैयार की। प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत कूटनीतिक प्रयासों के कारण आज अमेरिका, फ्रांस और खाड़ी देशों के साथ भारत का खुफिया समन्वय अत्यंत सुदृढ़ हुआ है, जिससे भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण अत्यंत सुगम हो गया है।
एक सशक्त रणनीतिक विजन तब तक पूर्ण नहीं हो सकता जब तक देश रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर न हो। प्रधानमंत्री मोदी ने इस वास्तविकता को स्वीकार करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अंतर्गत रक्षा विनिर्माण को स्वदेशी रूप दिया। सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों के माध्यम से हजारों सैन्य उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया, जिससे उनका निर्माण अब भारत की धरती पर हो रहा है। भारतीय सेनाओं को राफेल विमान, एस-४०० मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत जैसे आधुनिक हथियारों से सुसज्जित किया गया है। आज भारत केवल हथियारों का आयातक नहीं रहा, बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल जैसी उन्नत तकनीक का निर्यात कर दुनिया के अग्रणी रक्षा निर्यातकों की श्रेणी में सम्मिलित हो रहा है।
बदलते समय के साथ आतंकवाद का स्वरूप भी डिजिटल और तकनीकी हो गया है। आज साइबर युद्ध, क्रिप्टोकरेंसी और ड्रोन्स के माध्यम से सुरक्षा को नई चुनौतियां मिल रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी का ‘विजन २.०’ इन उभरते खतरों से निपटने के लिए देश को तैयार कर रहा है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति को सुदृढ़ किया गया है और सीमाओं पर अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियां तैनात की गई हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार और कट्टरपंथ को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रणनीतिक दृष्टिकोण २1वीं सदी के एक नए, आत्मविश्वासी और संप्रभु भारत की साख स्थापित करता है। आतंकवाद पर उनका यह कड़ा प्रहार यह प्रमाणित करता है कि भारत शांति का उपासक अवश्य है, परंतु अपनी क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों के प्राणों की आहुति देकर वह कभी भी किसी कायरता को सहन नहीं करेगा। सैन्य पराक्रम से लेकर विधायी सुधारों तक और आर्थिक प्रतिबंधों से लेकर वैश्विक कूटनीति तक, भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि उसके पास देश की रक्षा के लिए अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति और अद्वितीय सामरिक सामर्थ्य दोनों उपलब्ध हैं।





