आत्मा का ज्ञान ही मुक्ति कहलाता है” – कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज

"Knowledge of the soul is what constitutes liberation" – Storyteller Atul Krishna Bhardwaj Maharaj

दीपक कुमार त्यागी

मोदीनगर : श्री राम कथा समिति मोदीनगर के तत्वाधान में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के विराम दिवस पर कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान सप्तम दिवस सभी श्रद्धालुओं के समक्ष भौमासुर के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भौमासुर राक्षस द्वारा अपहृत सोलह हजार एक सौ कन्याओं को युद्ध कर मुक्त कन्याओं को युद्ध कर मुक्त कराया। समाज द्वारा उनका तिरस्कार न हो, इसीलिए स्वयं भगवान ने उन सबका अपने साथ विवाह किया। भगवान श्रीकृष्ण से बढ़कर दयालु और कौन हो सकता है? जिन्हें संसार अपमानित करता है, उन्हें भी भगवान अपनी शरण में ले लेते हैं।

आगे कथा व्यास में बताया कि सुदामा ब्राह्मण दरिद्र नहीं थे। जीवन में गरीबी होना अलग बात है और दरिद्र होना अलग बात। कोई धनवान भी दरिद्र हो सकता है। ब्राह्मण दान लेने का अधिकारी है, परंतु भीख माँगने का नहीं। गरीबी के बावजूद सुदामा जी ने कभी भीख नहीं माँगी। पूजा-पाठ और कथा से जो कुछ प्राप्त होता, उसे भगवान की कृपा मानकर स्वीकार कर लेते और प्रसन्न रहते। सुदामा संतोषी स्वभाव के थे। जब वे भगवान श्रीकृष्ण से मिलने गए, तो श्रीकृष्ण ने उन्हें अपने सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरणों में बैठकर अत्यंत भावविभोर होकर रो पड़े। यह स्वागत एक ब्राह्मण का था, न कि किसी दरिद्र का।

समाज को सुदामा से यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि गरीबी हो या अमीरी, जीवन को भगवान का प्रसाद मानकर जीना चाहिए।

कथा व्यास ने दत्तात्रेय के 24 गुरु का उल्लेख कर सरल ढंग से समझाया कि प्रत्येक छोटे-बड़े जीव में भी परमात्मा का दर्शन करना चाहिए। पशु-पक्षी भी हमारे जीवन के मार्गदर्शक हो सकते हैं, उनसे सीखना चाहिए।

अंत में कथा व्यास ने परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने समझाया—मृत्यु का अर्थ है जब शरीर शान्त हो जाए।
माया क्या है इसकी व्याख्या करते हुए कथा व्यास ने कहा कि—“मैं मेरा, तू तेरा।” जो व्यक्ति इससे ऊपर उठकर अपने वास्तविक स्वरूप को देखता है, उसका भ्रम मिट जाता है और वह सत्य के समीप पहुँचता है। जो भगवान से भिन्न है, वही माया है और जो भगवान में रमा है, उनसे जुड़ा है, वही सत्य है।

आज कथा में मोदीनगर नगर पालिका के अध्यक्ष विनोद वैशाली के द्वारा आगामी कार्तिक माह में तुलसी पूजन करने के लिए 300 तुलसी के वृक्षों का कथा के में आए भक्तों को वितरण किया गया व पंजाबी बिरादरी के अजय ग्रोवर, राज ढींगरा, ललित अरोड़ा, कल कपूर ने महाराज जी का सम्मान किया।

कथा के विराम के अवसर पर कथा समिति के अध्यक्ष डॉ पवन सिंघल ने सभी लोगों का धन्यवाद दिया उन्होंने कहा मोदीनगर के भक्तों के द्वारा आर्थिक व शारीरिक सहयोग किया इस सभी धन्यवाद के पात्र हैं विशेष रूप से सहयोग के लिए अनिल गर्ग बारदाने वालो का भी आभार व्यक्त किया । नई पीढ़ी के युवाओं ने जिस प्रकार कथा की व्यवस्थाओं को अच्छे से संभाला और कथा का श्रवण भी किया इसका प्रभाव उनके जीवन में अवश्य आएगा और वे एक अच्छे नागरिक बनकर आध्यात्मिक रूप से भी अपने जीवन को उन्नत करेंगे ऐसा मेरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि महाराज श्री के द्वारा ग्रंथ को सरलता से समझाने की शैली ने सभी को प्रभावित किया। मंच का संचालन जगवीर शर्मा ने किया।

आज कथा में यजमान मनोज शर्मा चेयरमैन, जितेंद्र, सुनील गोयल मुख्य रूप से बागपत सांसद राजकुमार सांगवान, क्षेत्रीय विधायक मंजू सिवाच, ब्लॉक प्रमुख सुचेता सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख कृष्णवीर सिंह, विपिन चौधरी, रामआसरे शर्मा, मोनू धाम आदि उपस्थित रहे।