संजय सक्सेना
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत सोशल मीडिया पर एक नई शक्ल में उतर आई है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच अब पारंपरिक भाषण-बाज़ी से आगे बढ़कर एआई-निर्मित वीडियो और पोस्टरों की जंग छिड़ गई है, जिसे कई हलकों में एआई वॉर कहा जा रहा है। हालिया मामले की बात की जाए तो वह ताज़ा पोस्टर है, जिसमें अखिलेश को आजम-अतीक और मुख्तार के साथ दिखाया गया है। पोस्टर के मुख्य नारे हैं- ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार।’ दूसरा नारा है- ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश।’ कुछ पोस्टरों में वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया के नारे के साथ अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कई नाम दिखाए गए हैं। जैसे अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आजम खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना और अवध क्षेत्र के पोस्टर में गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर जैसे नाम भी शामिल हैं। इसकी शुरुआत तब हुई, जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा एक एआई वीडियो जारी किया। पार्टी के अनुसार, यह वीडियो एक जवाबी कार्रवाई थी। अखिलेश यादव का कहना था कि यह वीडियो समाजवादी पार्टी का बनाया हुआ नहीं था, बल्कि किसी व्यक्ति ने उन्हें भेजा था, और यह भाजपा समर्थक हैंडलों से पहले शेयर किए गए एक वीडियो के जवाब में सामने आया।
भाजपा की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई। पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत शारदा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का ऐसा वीडियो बनाना बेहद आपत्तिजनक है और इसे सपा की राजनीति के स्तर को उजागर करने वाला बताया। भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव से सार्वजनिक माफी मांगने और वीडियो को तुरंत हटाने की मांग रखी। वहीं, भाजपा महासचिव सुब्रत पाठक ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि संत भी हैं, और इस एआई वीडियो से सपा की सोच उजागर हुई है। इसके जवाब में सपा पीछे नहीं हटी। भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद समाजवादी पार्टी ने एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें योगी आदित्यनाथ को एआई के जरिए दिखाते हुए लिखा गया कि उत्तर प्रदेश धुएं से घुट रहा है। अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि पार्टी इस मोर्चे पर पीछे नहीं रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है और कहा कि अगर सरकार एआई के जरिए समाजवादी पार्टी को घेरने की कोशिश करेगी तो पार्टी भी पीछे नहीं रहेगी। दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी, भाजपा की छवि खराब करने के लिए रोज नया नैरेटिव तैयार करती है। परिणाम यह हुआ कि यह जंग जल्द ही डिजिटल दायरे से निकलकर सड़क पर पोस्टरों तक पहुंच गई। वाराणसी में भाजपा नेता सुधीर सिंह ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए एक पोस्टर जारी किया, जिसमें हार्पिक की बोतल पर उनकी तस्वीर लगाकर उन्हें हार्पिक का ब्रांड एंबेसडर बताया गया। दोनों दलों के कार्यकर्ता अब इस तरह की रचनात्मक (और आपत्तिजनक भी मानी जा रही) सामग्री बनाकर इस जंग को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को लेकर एक और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जिसके बाद भाजपा ने और तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। इस पर अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि अगर भाजपा एआई के जरिए उनके खिलाफ गाने और वीडियो बनाएगी तो समाजवादी पार्टी भी गानों से जवाब देगी। सोशल मीडिया पर जंग के साथ-साथ आरक्षण का मुद्दा भी इस चुनावी बहस के केंद्र में है। जब राज्य में आरक्षण सुधार को लेकर चर्चा शुरू हुई, तो उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की आरक्षण विरोधी छात्रों से मुलाकात के बाद यह मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में आ गया। इस पर अखिलेश यादव ने भाजपा को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सुधार या समीक्षा जैसे शब्दों की आड़ में आरक्षण खत्म करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता, और आरक्षण को पीडीए समाज का अधिकार बताया, जिसे किसी की इच्छा पर निर्भर नहीं किया जा सकता। सपा प्रमुख ने आगे कहा कि आरक्षण सुधार के नाम पर आरक्षण समाप्ति की कोशिश पीडीए समाज के खिलाफ एक गहरी साजिश है। हाल ही में एक कार्यकारिणी बैठक में उन्होंने कहा कि युवाओं में बेरोजगारी बढ़ी है, सरकारी नौकरियां नहीं हैं और आरक्षण के साथ खिलवाड़ किया गया है। डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं का मुद्दा भी हाल में जोर पकड़ चुका है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा शासन में 72 जिलों में 151 आंबेडकर प्रतिमाएं तोड़ी गईं और हर साल औसतन 15 से अधिक प्रतिमाएं तोड़ी गईं, जिनमें बलिया में सबसे अधिक मामले सामने आए। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया कृत्य बताते हुए कहा कि भाजपा संविधान बदलना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं कर पाई, इसीलिए इस तरह की घटनाएं हुईं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि दस साल के भाजपा शासन में सबसे ज्यादा आंबेडकर प्रतिमाएं तोड़ी गईं और अब वही जिम्मेदार लोग चुनाव से पहले बजट में मदद देकर गलत संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही दलितों, पिछड़ों और पीडीए वर्ग के साथ भेदभाव जारी रहने का आरोप भी दोहराया गया।
दूसरी ओर, भाजपा और खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति सपा को हिंदू आस्था और सामाजिक सौहार्द के विरोधी के रूप में पेश करने पर केंद्रित रही है। मुख्यमंत्री ने कई सार्वजनिक सभाओं में सपा पर सीधा हमला बोला है। रुदौली में एक जनसभा में उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की आस्था भगवान राम के प्रति नहीं, बल्कि बाबर के प्रति है, क्योंकि उन्होंने अब तक राम मंदिर के दर्शन नहीं किए और अपने विधायकों को भी अयोध्या जाने से रोका। एक अन्य मौके पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समाजवादी लोग राम से दूरी बनाते हैं और बाबर को आदर्श मानते हैं। योगी आदित्यनाथ ने सपा के इतिहास पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस समाजवादी आंदोलन को डॉ. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, जनेश्वर मिश्र और मोहन सिंह जैसे चिंतकों ने ऊंचाई दी थी, आज सपा ने उसी आंदोलन को गुंडों, पेशेवर माफियाओं और अपराधियों का अड्डा बना दिया है। सपा ने इन आरोपों का जवाब भी उतनी ही तीखी भाषा में दिया है। विधान परिषद में अखिलेश यादव ने कहा कि 2017 से पहले मुख्यमंत्री के खिलाफ कई मामले दर्ज थे और समाजवादी पार्टी ने उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया था, और आरोप लगाया कि दंगा, आगजनी व नफरत फैलाना मुख्यमंत्री की राजनीतिक शैली का हिस्सा रहा है। शंकराचार्य से जुड़े एक विवाद पर भी अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि उन्हें यह प्रमाणपत्र कहां से मिला।कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर 2027 के चुनाव से पहले यह टकराव कई मोर्चों पर एक साथ चल रहा है एआई वीडियो और पोस्टरों की तकनीकी जंग से लेकर आरक्षण, सामाजिक न्याय, आंबेडकर प्रतिमाओं और धार्मिक आस्था जैसे भावनात्मक मुद्दों तक। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों और आंकड़ों के सहारे जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं, और आने वाले महीनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।





