अजय कुमार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को एक्स पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने साफ लिखा, ‘जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।’ यह पोस्ट ठीक उसी समय आया जब देश भर में बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर युवाओं का गुस्सा अभी भी थमा नहीं है। कोटा और देहरादून के बाद अब यह अभियान ‘छात्रों की गूंज’ 8 अगस्त को प्रयागराज के केपी कॉलेज मैदान में उतरने जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि मिस्ड कॉल और क्यूआर कोड के जरिए डेढ़ लाख से ज्यादा छात्रों ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराया है। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा संकेत है।प्रयागराज कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मक्का माना जाता था। यहां हर साल देश-प्रदेश से लाखों युवा आते हैं। फॉर्म भरते हैं, फीस जमा करते हैं, सालों साल कोचिंग करते हैं और फिर इंतजार करते रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियां और परीक्षा पैटर्न में बदलाव ने इन युवाओं का भरोसा तोड़ दिया। नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक के बाद पूरे देश में गुस्सा फूट पड़ा। मई में करीब 22 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। लीक की खबर आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। फिर जून में दोबारा परीक्षा हुई जिसमें करीब 20 लाख छात्र शामिल हुए। दो लाख के आसपास छात्र दोबारा नहीं बैठे। यह आंकड़ा बताता है कि कितने युवाओं का एक साल बर्बाद हो गया।दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए प्रदर्शन ने इस गुस्से को नया रूप दिया। जुलाई में जब हजारों छात्र संसद की ओर बढ़े तो पुलिस ने लाठियां चलाईं और पैलेट गन का इस्तेमाल भी हुआ। कई युवा घायल हुए। कुछ दिनों बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही। लेकिन युवाओं का सवाल अभी भी वही है कि सिस्टम क्यों बार-बार नाकाम साबित होता है।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में ठीक यही बात दोहराई। उन्होंने लिखा कि पेपर लीक ने युवाओं का आज छीन लिया, रुकी हुई भर्तियों ने उनका कल छीन लिया और दिल्ली में सिर्फ इसलिए लाठियां चलीं क्योंकि उन्होंने अपने हक की बात कही। अब बहाने नहीं चलेंगे। जवाबदेही लीजिए या कुर्सी छोड़िए।कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय खुद प्रयागराज में कैंप कर रहे हैं। पार्टी के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे। केपी ग्राउंड पर मंच तैयार हो रहा है। आसपास के जिलों से छात्रों को लाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कौशांबी, प्रतापगढ़, अमेठी, रायबरेली, भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों से युवा आने वाले हैं। भदोही से अकेले हजारों छात्रों के पहुंचने का दावा किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को एक मंच देने की कोशिश है।उत्तर प्रदेश में युवा और बेरोजगारी का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार और केंद्र की डबल इंजन सरकार रोजगार देने के दावे करती रही है। लेकिन पेपर लीक के मामले और भर्तियों में देरी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रयागराज में तैयारी करने वाले छात्रों में ब्राह्मण, भूमिहार, मौर्य, कुर्मी और दलित समुदाय के युवा बड़ी संख्या में हैं। इनमें से कई पारंपरिक रूप से भाजपा के साथ रहे हैं। लेकिन अगर ये युवा बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस या इंडिया गठबंधन की ओर झुकते हैं तो 2027 के समीकरण बदल सकते हैं।इतिहास गवाह है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय और छात्र राजनीति ने देश को कई नेता दिए। चंद्रशेखर आजाद की शहादत की भूमि से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, वीपी सिंह और हेमवती नंदन बहुगुणा तक की राजनीतिक यात्रा यहीं से शुरू हुई। छात्र आंदोलन हमेशा सत्ता के खिलाफ जनमत बनाने में निर्णायक भूमिका निभाता आया है।
राहुल गांधी का यह दौरा उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश लगता है।कोटा में 17 जून को अभियान शुरू हुआ था। देहरादून में 17 जुलाई को दूसरा चरण हुआ। अब प्रयागराज तीसरा और शायद सबसे महत्वपूर्ण चरण है। पहले दिल्ली में 9 अगस्त को बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति न मिलने के बाद इसे प्रयागराज शिफ्ट कर दिया गया।कांग्रेस की रणनीति साफ है। 2027 के चुनाव को जातिगत समीकरणों के बजाय युवा और बेरोजगारी के नैरेटिव पर केंद्रित करना। सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ अगर कांग्रेस छात्र शक्ति को जोड़ लेती है तो गठबंधन का आधार और मजबूत हो सकता है। झारखंड में जेपीएससी को लेकर भी छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर का असर कई राज्यों में दिख रहा है। ऐसे में प्रयागराज का कार्यक्रम सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संदेश बन सकता है।डेढ़ लाख पंजीकरण का दावा अगर मैदान में भीड़ में तब्दील होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ी कामयाबी होगी। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं। प्रशासनिक अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और मौसम सब कुछ देखना होगा। पार्टी के अंदर भी तैयारियों को लेकर कुछ घर्षण की खबरें आई हैं। फिर भी अजय राय और स्थानीय नेता दावा कर रहे हैं कि केपी ग्राउंड से लेकर शहर की गलियां युवाओं से भर जाएंगी।राहुल गांधी के पोस्ट का स्वर आक्रामक है। सिंहासन हिलने की बात सिर्फ नारा नहीं, बल्कि युवाओं के गुस्से को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश है। पेपर लीक के बाद शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, भर्तियों में देरी और दिल्ली की घटना ने एक नई पीढ़ी को सड़क पर उतार दिया। अब देखना यह है कि 8 अगस्त को प्रयागराज में यह गूंज कितनी दूर तक जाती है।अगर युवा सच में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं तो 2027 के यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस के मिशन का आगाज यहीं से हो सकता है। प्रयागराज की धरती ने हमेशा राजनीति को नई दिशा दी है। इस बार भी वही इतिहास दोहराया जा सकता है।





