प्रस्तावित उपनिबंधक कार्यालय के स्थानांतरण के विरोध में अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन

Advocates submitted a memorandum to the District Magistrate opposing the proposed relocation of the Sub-Registrar's office

शशांक त्यागी

गाजियाबाद : तहसील गाजियाबाद से राजनगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित उपनिबंधक कार्यालय के स्थानांतरण के विरोध में अधिवक्ता लामबंद होने लगे हैं। उसी कड़ी में तहसील बार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक वर्मा, सचिव एडवोकेट दीपक वार्ष्णेय, द ले ए के अध्यक्ष संजीव कौशिक की अगुआई में अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी गाजियाबाद के कार्यालय जाकर प्रस्तावित उपनिबंधक कार्यालय के स्थानांतरण के विरोध स्वरूप एक ज्ञापन प्रेषित किया।

अशोक वर्मा अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में शहर के बीचोंबीच गांधीनगर में चल रहा निबंधन कार्य सुरक्षा एरिया वाइज पार्किंग आदि के दृष्टिगत कार्य सुगम एवं सुचारु रूप से चल रहा हैं, फिर भी ना जाने क्यों प्रशासन के द्वारा राजनगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित सब रजिस्ट्रार कार्यालय में तीन सब-रजिस्ट्रार कार्यालय को स्थानांतरित किए जाने की योजना बना दी गई है। उन्होंने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन में निर्मित कार्यालय में मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है, जिस स्थल पर कार्यालय बना है, वहां पहुंचने के लिए कोई भी सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं है। कार्यालय को लगभग छः फुट गहरे गड्ढे में बना दिया गया है, जिससे बारिश के मौसम में जलभराव की गंभीर समस्या होगी, परिसर या उसके आसपास में अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों व स्टाम्प वेंडरों आदि के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी है, एटीएम, पार्किंग आदि की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यदि शासन प्रशासन ने हमारी मांगों को अनदेखा किया तो मजबूरन हमें अपने परिवार सहित अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाना पड़ेगा।

जिलाधिकारी के नाम दिये गये ज्ञापन में कहा किया गया है कि प्रस्तावित सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को राजनगर एक्सटेंशन में स्थानांन्तरित न किया जाये, यदि उक्त हस्तांतरण की प्रक्रिया को अगले एक हफ्ते के अन्दर नहीं रोका जाता है, तो सदर तहसील बार एसोसिएशन व दस्तावेज लेखक एसोसिएशन, स्टाम्प वेंडर, कम्प्यूटर ऑपरेटर, मुंशीगण आदि सहित हजारों लोगों को हडताल पर जाने के लिए विवश होना पडेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी। उक्त नवनिर्मित बिल्डिंग का उपयोग ए.आई.जी. स्टाम्प, रिकॉर्ड रूम व ए. आई.जी. ऑडिट के कार्यालय के रूप में प्रयोग किया जाना सर्वथा उपयोगी है, क्योंकि ए.आई.जी. ऑडिट का कार्यालय किराये की बिल्डिंग में संचालित है, जिसमें किराये के रूप में शासकीय धन का दुरुपयोग रोका जा सकता है।

वहीं इस संदर्भ में एडवोकेट शैलेन्द्र त्यागी ने बताया कि जब-जब तहसील परिवार किसी भी शासन प्रशासन के बेतुके एवं अर्थहीन कदम के विरोध में एक जुट होकर संकल्पित हुआ हैं बिना सकारात्मक परिणाम प्राप्ति के सुकून से घर नहीं बैठा है।

ज्ञापन प्रेषित करने के दौरान एडवोकेट राजकुमार शर्मा पूर्व अध्यक्ष, एडवोकेट पंकज शर्मा पूर्व अध्यक्ष, एडवोकेट विकास त्यागी पूर्व सचिव, एडवोकेट के पी सिंह पूर्व सचिव, एडवोकेट शैलेन्द्र त्यागी (सिहानी) एडवोकेट कुणाल त्यागी, एडवोकेट शंकर सिंह, एडवोकेट विनोद गौतम, एडवोकेट रितेश गौतम, एडवोकेट विवेक चौधरी, एडवोकेट नितिन डागर, एडवोकेट गौरव इंदौरिया, एडवोकेट दिवाकर शर्मा, एडवोकेट सुशांत कुमार, पंडित कुणाल शर्मा, एडवोकेट मनीष कुमार आदि उपस्थित रहे।