नीति गोपेन्द्र भट्ट
नई दिल्ली/गांधीनगर : रक्षाबंधन के पर्व पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चियों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चियों ने अमित शाह को राखी बांधी। इस मौके पर शाह ने टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के लिए जीवनभर मुफ्त इंसुलिन उपलब्ध कराने की पहल को सरकार की संवेदनशील स्वास्थ्य नीति का उदाहरण बताया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह नगर वडनगर के निकटवर्ती विशनगर की दो डॉक्टर बहनें डॉ स्मिता जोशी और डॉ शुक्ला बेन भी मौजूद थी जोकि पिछले कई वर्षों से देश विदेश में बच्चों के मधुमेह के लिए जन जागरण का कार्य कर रही हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने इस मौके पर कहा कि टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को जीवनभर इंसुलिन की आवश्यकता होती है और इसका खर्च परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ डाल सकता है। गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 0 से 18 वर्ष तक के टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए स्क्रीनिंग, निदान, इंसुलिन/उपचार, निगरानी और फॉलोअप को जोड़कर एक एकीकृत व्यवस्था तैयार की गई है।
रक्षाबंधन को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का नया अर्थ
अमित शाह ने कहा कि बेटियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, जिस तरह रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है, उसी भावना को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ना इस पहल की विशेषता है।
उन्होंने इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘सेवा, संवेदनशीलता और सुरक्षा’ के सिद्धांतों से जोड़ा। शाह ने कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य सुरक्षित होगा, तभी परिवार और समाज का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी शुरू हुई है नई व्यवस्था
शाह ने बताया कि यह पहल केवल गांधीनगर तक सीमित संदर्भ नहीं रखती। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2026 में बच्चों में डायबिटीज की स्क्रीनिंग, निदान और दीर्घकालिक उपचार को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (RBSK) 2.0 के तहत व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के माध्यम से मुफ्त दीर्घकालिक देखभाल का प्रावधान रखा गया है।
गांधीनगर में विकसित की गई व्यवस्था इसी व्यापक स्वास्थ्य ढांचे के तहत टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों तक निरंतर इंसुलिन और उपचार पहुंचाने का स्थानीय मॉडल है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इंसुलिन में किसी तरह की अनियमितता बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
राखी की डोर से स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश
रक्षाबंधन पर अमित शाह और बच्चियों की यह मुलाकात रक्षाबंधन के पारंपरिक पर्व को सामाजिक सरोकार से जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आई। राखी की डोर ने जहां भावनात्मक रिश्ते को मजबूत किया, वहीं मुफ्त और निरंतर इंसुलिन की पहल ने स्वास्थ्य सुरक्षा को उस रिश्ते का व्यावहारिक विस्तार दिया।
यह मॉडल अब इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा कि गांधीनगर में इसके अनुभव के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में किस स्तर तक लागू किया जाता है। यदि यह व्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावी ढंग से लागू होती है तो टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए यह आर्थिक तथा स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से बड़ी राहत साबित हो सकती है।





