संगीतकार जयदेव को समर्पित जयदेव स्मृति संगीत संध्या दिवंगत के.सी. मालू की श्रद्धांजलि बनी

The Jaidev Smriti Sangeet Sandhya, dedicated to music composer Jaidev, turned into a tribute to the late K.C. Malu

नीति गोपेन्द्र भट्ट

जयपुर : कला और संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाली सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका पद्मश्री पिनाज़ मसानी ने जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित संगीतकार जयदेव को समर्पित जयदेव स्मृति संगीत संध्या में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में राजस्थान के कला-मर्मज्ञ एवं संस्कृति-सेवी स्वर्गीय के.सी. मालू को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मालू जी के निधन को संपूर्ण कला जगत की अपूरणीय क्षति बताते हुए पिनाज़ मसानी ने कहा कि आज कला जगत में एक अजीब-सा सन्नाटा और दिल को चुभने वाली खामोशी है।

पिनाज़ मसानी ने अपने भावुक उद्बोधन में कहा कि “के.सी. मालू जी वह शख्स थे, जिन्होंने मुझे जयपुर से परिचित कराया। जयदेव जी के कहने पर उन्होंने मुझे अपनी संस्था ‘सुर संगम’ में गाने के लिए जयपुर आने का अवसर दिया। यह मेरे लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जयपुर से जुड़ने की एक ऐसी शुरुआत थी, जो आज भी जारी है जिसने मेरे जीवन में विशेष स्थान बनाया।”

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह ‘सुर संगम’ की वार्षिक प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का हिस्सा बनती रही हैं। इस मंच ने नई प्रतिभाओं को अवसर देने के साथ-साथ संगीत और संस्कृति की दुनिया में अनेक यादगार रिश्ते बनाए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “आज पहली बार मैं मालू जी की अनुपस्थिति में इस मंच पर खड़ी हूं। उनकी जगह और उनकी शून्यता को भर पाना आसान नहीं है।”

पिनाज़ मसानी ने कहा कि के.सी. मालू केवल कला के संरक्षक नहीं थे, बल्कि कलाकारों को जोड़ने, नई प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने का जुनून रखने वाले एक संवेदनशील व्यक्तित्व थे। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति और संवेदना को समाज तक पहुंचाने का माध्यम था।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मालू जी के साथ सुर संगम संस्था का गठन करने वाले सहयोगी मुकेश अग्रवाल तथा मालू जी के दोनों पुत्र हेमजीत मालू और प्रसनजीत मालू उनके सपनों और अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि जिस सांस्कृतिक यात्रा को के.सी. मालू ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया, उसे उनके परिजन और सहयोगी उसी ऊर्जा के साथ निरंतर जारी रखें।

संगीत संध्या में उपस्थित दिल्ली की प्रख्यात गायिका छाया गांगुली भी के.सी. मालू को याद कर भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए उन्हें आमंत्रित करने वाले के.सी. मालू आज दुनिया में नहीं हैं, यह एहसास ही मन को भर देता है। उन्होंने कहा कि मालू जी से जुड़ी स्मृतियां और कला के प्रति उनका समर्पण हमेशा कलाकारों के बीच जीवित रहेगा। मंच प्रस्तुति देने वाले दोनों गायक कलाकारों मुख्य गायिका बेला सुलाखे (मुंबई) गायक चिराग़ पांचाल (मुंबई) ने कहा कि इस संगीत संध्या के लिए के.सी. मालू जी ने उन्हें स्वयं आमंत्रित किया था और कुछ चुने हुए गीत गाने का सुझाव भी दिया था जिन्हें हम सुनाते हुए हमारा मन भर आ रहा है।

गायिका बेला सुलाखे ने कहा कि मालू जी ने मुझे राजस्थानी गीत पीतल की मोरी गागरी दिलड़ी से मोल मंगाई रे के बोल – पीतल की मोरी गागरी दिलड़ी से मोल मंगाई रे… गाने को कहा था जिसे मैं सुना रही हूँ । इस पर सभागार का माहौल गमगीन हो गया।

जयदेव के संगीत को समर्पित इस संध्या में एक ओर जहाँ सुरों ने वातावरण को भाव-विभोर किया, वहीं के.सी. मालू जी की स्मृतियां भी बार-बार उपस्थित होती रहीं। मंच पर उनके न होने का एहसास जितना गहरा था, उतनी ही शिद्दत से उनकी कला-सेवा और कलाकारों के प्रति आत्मीयता को याद किया गया।

यह संगीत संध्या वस्तुतः केवल महान संगीतकार जयदेव को सुरों के माध्यम से नमन करने का अवसर नहीं रही, बल्कि कला-संस्कृति के उस समर्पित साधक के.सी. मालू को भी श्रद्धांजलि देने की संध्या बन गई, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संगीत, संस्कृति और कलाकारों को समर्पित कर दिया था।उनकी देह भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके द्वारा रोपे गए सुरों और संस्कृति के बीज आने वाली पीढ़ियों तक अपनी खुशबू बिखेरते रहेंगे।

जयदेव जी की याद को समर्पित इस संगीत संध्या में संगीत संयोजन सतीश पोपली और कार्यक्रम का प्रभाव शाली मंच संचालन पीयूष भारद्वाज ने किया।