संसदीय गृह कार्य संबंधी स्थायी समिति ने संसद में तीन महत्वपूर्ण प्रतिवेदन पेश किए, साइबर अपराध, जम्मू-कश्मीर और आपदा प्रबंधन पर दिए अहम सुझाव

The Parliamentary Standing Committee on Home Affairs tabled three significant reports in Parliament, offering key recommendations on cybercrime, Jammu & Kashmir, and disaster management

प्रमोद शर्मा

नई दिल्ली : राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली विभाग-संबंधित गृह कार्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को संसद में तीन महत्वपूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। इनमें साइबर अपराध की रोकथाम, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में प्रशासनिक व्यवस्था, विकास और सुरक्षा, तथा देश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत सिफारिशें की गई हैं।

समिति ने 5 अगस्त 2026 को हुई बैठक में इन प्रतिवेदनों को मंजूरी दी थी। रिपोर्टों में सरकार से कई क्षेत्रों में समयबद्ध सुधार और नीतिगत बदलाव करने का आग्रह किया गया है।

साइबर अपराध पर सख्त और एकीकृत व्यवस्था की सिफारिश
समिति ने साइबर अपराध पर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए एक समान, बहुभाषी और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की है। इसमें शिकायत की ऑनलाइन ट्रैकिंग, निर्धारित समय सीमा, यूनिक शिकायत संख्या और स्वत: एस्केलेशन जैसी सुविधाएं शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

समिति ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सामग्री के प्रभावी नियमन के लिए स्वतंत्र पोस्ट-रिलीज समीक्षा पैनल गठित करने, मजबूत आयु सत्यापन प्रणाली, अभिभावकीय नियंत्रण तथा नियम उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान लागू करने की आवश्यकता जताई।

ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए विदेशी विज्ञापनदाताओं की कड़ी पहचान प्रक्रिया, डिजिटल सत्यापन और रियल-टाइम निगरानी व्यवस्था विकसित करने की भी सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत साइबर अपराध कानून, विशेष साइबर अपराध कार्यबल, सभी राज्यों में ई-एफआईआर व्यवस्था, स्कूलों में अनिवार्य साइबर सुरक्षा शिक्षा तथा साइबर अपराध कानूनों की नियमित समीक्षा की भी पैरवी की गई है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास व सुरक्षा पर विशेष जोर
समिति ने जम्मू-कश्मीर में रेलवे, सड़क, हवाई अड्डों, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक कल्याण योजनाओं में हुई प्रगति की सराहना की।

रिपोर्ट में कटरा में हवाई अड्डा स्थापित करने की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने, रेलवे और सड़क परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने, पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुरक्षा तंत्र विकसित करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को और मजबूत करने की सिफारिश की गई है।

समिति ने खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, जल जीवन मिशन, कृषि, औद्योगिक विकास, बैंकिंग सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। माध्यमिक स्तर पर बढ़ती ड्रॉपआउट दर पर चिंता जताते हुए विशेष छात्र प्रतिधारण कार्यक्रम लागू करने की सिफारिश की गई।

कश्मीरी प्रवासी परिवारों के पुनर्वास, नशा मुक्ति अभियान, गरीबी उन्मूलन और पर्यटन सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत सुझाव दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन नीति में बड़े बदलाव की जरूरत
समिति ने वर्ष 2009 की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति की व्यापक समीक्षा करने और उसे जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक तकनीक तथा नई आपदा चुनौतियों के अनुरूप अद्यतन करने की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं के मानकीकरण, नियमित मॉक ड्रिल, आधुनिक अग्निशमन व्यवस्था, सभी राज्यों में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की स्थापना तथा शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के गठन पर जोर दिया गया।

समिति ने लू और वज्रपात को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदा घोषित करने, बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने, बाढ़, भूकंप, सुनामी, भूस्खलन और औद्योगिक दुर्घटनाओं के लिए आधुनिक तकनीक आधारित तैयारी बढ़ाने तथा राहत और पुनर्वास प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की सिफारिश की।

रिपोर्ट में जोखिम न्यूनीकरण पर अधिक निवेश, महत्वपूर्ण अवसंरचना को आपदा-रोधी बनाने, स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने तथा “बिल्ड बैक बेटर” सिद्धांत के तहत पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया गया।

समिति ने कहा कि इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन से देश की आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन क्षमता तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के समग्र विकास को नई मजबूती मिलेगी।