सत्ता, सरपंची और खनन विवाद : राजस्थान में हिंसा की ये घटनाएं चिन्ता जनक

Power, Sarpanchi and mining dispute: These incidents of violence in Rajasthan are worrying.

एन जी भट्ट

लोकतंत्र में प्रतिष्ठा की लड़ाई जब जानलेवा बन जाए, तो सवाल केवल अपराध का नहीं, सामाजिक मूल्यों और कानून के राज का भी होता है।राजस्थान में पंचायत चुनावों की सरगर्मी के बीच चूरू जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना और भरतपुर में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरपंच बनने की जिद में पिता पर अपने बेटे और बहू को गाड़ी से कुचलकर मारने का आरोप है, तो दूसरी ओर क्रशर प्लांट और खनन से जुड़े विवाद में पूर्व विधायक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। दोनों घटनाएं अलग परिस्थितियों में हुईं, लेकिन इनके केंद्र में विवादों का हिंसक रूप लेना और कानून-व्यवस्था की चुनौती प्रमुख है।

भजन लाल सरकार ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर हाल ही एक उच्च स्तरीय बैठक की ओर पूर्व विधायक की कथित हत्या को लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदेश में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो इस के लिए अधिकारियों को पाबन्द किया है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी राज्य कe पुलिस महानिदेशक राजेीव शर्मा के समक्ष अपनी चिंता जताई है,।

चूरू जिले के तारानगर क्षेत्र के चंगोई गांव में 60 वर्षीय रामचंद्र जाट सरपंच का चुनाव लड़ना चाहते थे। उनके बेटे रविंद्र और बहू महिंद्रा इस निर्णय का विरोध कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, इसी बात को लेकर परिवार में कई दिनों से विवाद चल रहा था। मंगलवार रात विवाद बढ़ने के बाद रामचंद्र पर बोलेरो गाड़ी से बेटे और बहू को कुचलने का आरोप है। दोनों की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू की। इस घटना ने परिवार को उजाड़ने के साथ एक 11 वर्षीय बच्ची के भविष्य पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। गांव की सेवा करने के लिए लड़ा जाने वाला चुनाव यदि पारिवारिक संबंधों से भी बड़ा हो जाए, तो लोकतांत्रिक आकांक्षा के सामाजिक अर्थ पर विचार करना आवश्यक है।

दूसरी घटना भरतपुर जिले के भौंडा गांव की है। यहां बयाना के पूर्व भाजपा विधायक अतर सिंह भड़ाना पर रविवार शाम क्रशर प्लांट को दोबारा शुरू करने से जुड़े विवाद के दौरान ग्रामीणों के समूह ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया। गंभीर रूप से घायल भड़ाना की जयपुर के एसएमएस अस्पताल में मौत हो गई। उनके सहयोगी गगन शर्मा भी घायल हुए। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, क्रशर प्लांट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और ग्रामीण अवैध खनन तथा अतिक्रमण के विरोध में धरना दे रहे थे। मामले में पुलिस जांच जारी है।

इन दोनों घटनाओं को केवल व्यक्तिगत दुश्मनी या चुनावी विवाद मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। पंचायत चुनाव ग्रामीण लोकतंत्र की बुनियाद हैं। सरपंच का पद विकास कार्यों, स्थानीय संसाधनों और जनसमस्याओं के समाधान से जुड़ा है, न कि व्यक्तिगत वर्चस्व का प्रतीक बनने के लिए। इसी प्रकार, खनन और क्रशर से संबंधित विवादों में प्रशासनिक निगरानी, वैधानिक कार्रवाई और स्थानीय लोगों की शिकायतों का समय पर निस्तारण जरूरी है।

राजस्थान की सामाजिक परंपरा संवाद, सह-अस्तित्व और सामुदायिक सहयोग की रही है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा, आर्थिक हित और स्थानीय वर्चस्व यदि इन मूल्यों पर हावी होते हैं, तो नुकसान केवल कुछ परिवारों का नहीं, पूरे समाज का होता है। लोकतंत्र की असली ताकत पद हासिल करने में नहीं, असहमति का सम्मान करने और कानून के दायरे में रहकर विवाद सुलझाने में है।