संदीप त्यागी
गुरुवार की शाम की होते होते एक सर्कुलर से बुद्धिजीवी राजनैतिक व पत्रकारिता जगत मे तापमान आसमान चढ़ गया, मामला था उपराज्यपाल व राज्यपालो के फेरबदल व कुछ नई नियुक्तियों को लेकर आए आदेश का।।
दिल्ली के उप राज्यपाल वी के सक्सेना को लद्दाख भेजना अचंभित करता है, दूसरा मामला बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का जिन्हे कही कोई स्थान नहीं मिला वही बंगाल के सी वी आनंद बोस से इस्तीफा ही ले लिया गया है, उनका स्थान पे केरल केडर के तेज तर्रार आई पी एस रहे आर एन रवि की नियुक्ति कोई बड़ी कानूनी योजना को अमल मे लाने की कोशिश की शुरुआत हो सकती है, सी वी आनंद बोस के इस्तीफा लिए जाने से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने पोस्ट कर नाराजगी व्यक्त की है वही विपक्ष ने दिल्ली के उपराज्यपाल के ट्रांसफर को लेकर असहमति व्यक्त की है।
अचानक इतने बड़े फेरबदल से सरकार कोई बड़ी योजना को लागु करने मंशा को दर्शता है, बंगाल मे SIR कार्यपूर्ण मे कठिनता होना और यह कार्य पूर्ण का समय विधानसभा गठन के समय से आगे बढ़ता है तो बंगाल मे धारा 356 के स्थान पे व धारा 355 का लगना अब तय है जिसमे पुलिस प्रशासन राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र मे आता है, आर एन रवि के कार्यदक्षता व पिछले अनुभव को देखते हुए और बंगाल के चुनाव हिंसा मुक्त हो, इस दृष्टि उनकी नियुक्ति की गईं है यह हो सकता है।।
वही पटना साहिब बिहार से 7 बार भाजपा के विधायक रहे नंदकिशोर यादव का बिहार विधानसभा चुनाव मे टिकट का कटना और उनका एक सच्चे सिपाही की तरह पुरे चुनाव मे पार्टी कार्य करना यह उनको उनकी ईमानदारी व सादगी का इनाम मिला है उसके एवज मे नागालैंड का राज्यपाल बनाकर भेजा गया है और पार्टी कैडर को विश्वास मे लेकर जातिगत समीकरण को साधा गया है, वही मामला आरिफ मोहम्मद खान जिनका कार्य बिहार मे बेहतरीन रहा है उनकी छवि मुस्लिम होते हुए भी एक दृढ सनातनी के रूप पहचान बनी हुई है, उनको राष्ट्रपति की अनुशंसा द्वारा राज्यसभा भेजकर, राज्य सभा का उपसभापति बनाकर मुस्लिम चेहरे के रूप मे आगे बढ़ाये जाने की कोशिश हो सकती है, क्योंकि भाजपा के मोदी काल मे अचंभित करने वाले निर्णयों से इंकार नहीं किया जा सकता है।





