गोपेन्द्र नाथ भट्ट
राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी अजमेर को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। लंबे समय से यहां आयुर्वेद विश्वविद्यालय स्थापित करने की जो परिकल्पना की जा रही थी, वह अब साकार होती दिखाई दे रही है। इस पहल के पीछे प्रमुख भूमिका निभाने वाले राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का वर्षों पुराना सपना अब मूर्त रूप ले रहा है।
राजस्थान विधानसभा में सोमवार को राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया है।अजमेर को 38 साल के बाद मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में दूसरा राजकीय विश्वविद्यालय मिला है।अधिनियम के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रबंध, विद्रद्या, संकाय, अध्ययन, वित और लेखा समिति, अनुसंधान, खेल एवं छात्र कल्याण और नवाचार बोर्ड होंगे। कुलाधिपति द्वारा कुलगुरू की नियुक्ति किए जाने के बाद प्रबंध बोर्ड का गठन होगा। विश्वविद्यालय में संकाय बोर्ड के अंतर्गत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अन्य संकायों में अध्ययन होगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर की भूमि में से 11.93 हैक्टेयर भूमि का आंवटन किया गया है।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना से न केवल अजमेर बल्कि पूरे राजस्थान में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
अजमेर को सदियों से शिक्षा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र माना जाता रहा है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु और विद्यार्थी आते हैं। ऐसे शहर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। वासुदेव देवनानी ने अपने राजनीतिक जीवन के दौरान लगातार इस विषय को प्रमुखता से उठाया और राज्य सरकार के समक्ष इसकी आवश्यकता को रेखांकित किया। जब वासुदेव देवनानी राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री रहे, तब भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार और संस्थानों की स्थापना के प्रयास किए थे। अजमेर को एक बड़े शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की उनकी सोच रही है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना उसी दूरदर्शी सोच का परिणाम मानी जा रही है।
राज्य सरकार भी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को नई पहचान देने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अजमेर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राजस्थान आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। यहां आयुर्वेद से संबंधित स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रम संचालित किए जा सकेंगे। साथ ही आयुर्वेदिक अस्पताल, अनुसंधान केंद्र और औषधीय पौधों के अध्ययन से जुड़े संस्थानों के विकास की भी संभावना है। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि आज दुनिया भर में आयुर्वेद की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। विशेषकर महामारी के बाद लोगों का झुकाव प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर बढ़ा है। ऐसे समय में अजमेर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना से राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकती है। यह संस्थान आयुर्वेदिक चिकित्सा के वैज्ञानिक शोध और औषधीय पौधों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।इसके अलावा विश्वविद्यालय की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। शिक्षकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है, जिससे अजमेर की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।वासुदेव देवनानी ने कई अवसरों पर कहा है कि भारतीय परंपरा और संस्कृति में निहित ज्ञान को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे नई पीढ़ी को भारतीय चिकित्सा परंपरा के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा में विधेयक पारित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने उनका सपना साकार किया है । कुल मिलाकर देखा जाए तो अजमेर में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना केवल एक शैक्षणिक संस्थान की स्थापना नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संगम का प्रतीक है। यह पहल अजमेर के शैक्षणिक और चिकित्सा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी और वासुदेव देवनानी के लंबे समय से संजोए गए सपने को साकार करेगी।





