- उपलब्धियों का नहीं, ट्रॉफियों को जीतने का जश्न मनाओ
- यह ट्रॉफी द्रविड़ और लक्ष्मण को समर्पित करना चाहूंगा
सत्येन्द्र पाल सिंह
नई दिल्ली : सूर्य कुमार यादव की अगुआई में भारत ने न्यूजीलैंड पर अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में रविवार रात दसवें आईसीसी टी 20 क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में 96 रन से जीत के साथ खिताब बरकरार रख इतिहास दोहराने के साथ इतिहास को हरा दिया। भारतीय टीम अपने घर में खिताब जीतने व लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार टी 20 विश्व कप खिताब जीतने वाली इतिहास की पहली टीम बन गई । गौतम गंभीर बतौर क्रिकेटर और चीफ कोच टी 20क्रिकेट विश्व कप जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। चीफ कोच गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार के पहली से आखिरी गेंद तक दे दनादन करने तथा टीम के लिए हर खिलाड़ी के नि:स्वार्थ होकर टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ देने के दर्शन से भारत ने कुल तीसरी बार क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट का विश्व कप जीता। भारत की इस जीत में चीफ कोच गंभीर और कप्तान सूर्य के टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए लगातार तीन अर्द्धशतकों सहित 321 रन बनाने वाले सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन, अचानक अपनी लय खोने के बाद फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतरीन अर्द्धशतक जड़ने वाले आईसीसी रैंकिंग मे दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और दुनिया के नंबर एक गेंदबाज और दुनिया के नंबर एक गेंदबाज मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती पर कायम भरोसे ने अहम भूमिका निभाई। रिंकू सिंह के टूर्नामेंट के बीच अपने पिता खान चंद को खोने के बाद जिस तरह टीम इंडिया का हर साथी खिलाड़ी, चीफ कोच गंभीर व कप्तान सूर्य दुख की इस घड़ी में उन्हें संबल दे उनके साथ खड़ा रहा। भारतीय टीम की इस खिताबी जीत में उसकी एकजुटता ने अहम भूमिका निभाई। मैदान पर जिस भी खिलाड़ी को खेलने का मौका मिला उसने तो बेहतरीन प्रदर्शन ही किया ही एकादश से बाहर रहने पर उपकप्तान अक्षर पटेल, मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर, रिंकू सिंह और लेग स्पिनर कुलदीप यादव भी टीम इंडिया की जीत की खुशी सभी के साथ बांटते दिखे।
सूर्य कुमार यादव(2026) अब महेंद्र सिंह धोनी (2007) और रोहित शर्मा (2024) के बाद भारत को टी 20 क्रिकेट विश्व कप खिताब जिताने तीसरे कप्तान बन गए। भारत ने रविवार को 86 हजार क्रिकेट प्रेमियों की मौजूदगी में टी 20 विश्व कप खिताब जीतने के साथ 2023 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों अहमदाबाद में वन डे विश्व कप फाइनल में छह विकेट से हार की कसक भी मिटा दी। भारत इससे पहले टी 20 विश्व कपों में न्यूजीलैंड से तीन बार हार चुका था। भारत ने रविवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के सिलसिले को फाइनल में तोड़ उसके खिलाफ पहली जीत के साथ तीसरी बार खिताब जीत नया इतिहास रच दिया।
मैन ऑफ द’ मैच तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (4/15 ) के गेंद से चौके व सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा व इशान किशन के तूफानी अर्द्धशतकों ने भारत ने पहले बल्लेबाजी की दावत पाकर निर्धारित 20ओवर में 5 विकेट पर 255 रन बनाने के बाद अपने अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (4/15) व उपकप्तान अक्षर पटेल (3/27 ) की धारदार गेदबाजी की बदौलत सलामी बल्लेबाज टिम सिरफिट((52 रन, 26 गेंद, पांच छक्के, दो चौके) के अर्द्धशतक और डैरल मिचेल ((17रन, 11 गेंद, दो छक्के) व कप्तान मिचेल सेंटनर (43 रन, 35 गेंद, दो छक्के, 3 चौके) की छठे विकेट की 52 रन की भागीदारी के बावजूद न्यूजीलैंड को 19 ओवर में 159 रन पर समेट फाइनल व खिताब जीत लिया।
भारत के चीफ कोच गौतम गंभीर ने साफ साफ कहा कि आप निजी उपलब्धियों का दौर खत्म हो चुका है। गंभीर ने कहा, ‘ जब तक मैं चीफ कोच हूं, हम उपलब्धियों की बाबत चर्चा नहीं करेंगे। आप आसानी से यह देख भी सकते हैं। आप भारत के लिए फाइनल सहित पिछले तीनों मैचों को देख सकते हैं और इनमें संजू सैमसन ने -अविजित 97, 89 और 89 रन की पारियों खेल कर बताया कि वह निजी उपलब्धियों के लिए नहीं खेले। आप जरा कल्पना करें कि भारतीय बल्लेबाज यदि उपलब्धियों के लिए खेल रहे होते तो हम संभवत: 250 रन तक नहीं पहुंच पाते। मीडिया को भी यह बात समझनी होगी। भारतीय क्रिकेट में निजी उपलब्धियों की चर्चा अब तक ज्यादा होती रही है। मेरा कहना है उपलब्धियों का जश्न मनाना बंद करो,ट्रॉफियों को जीतने का जश्न मनाओ। यही अहम रहेगा क्योंकि टीम का बड़ा मकसद ट्रॉफी जीतना होता है। मेरे लिए किसी खिलाड़ी का खुद के लिए रन बनाना मायने नहीं रखता और न ही कभी रखेगा। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि इस बाबत हमारे कप्तान सूर्य कुमार यादव और मेरी सोच एक सी है। कप्तान सूर्य कुमार यादव ने टी 20 क्रिकेट में मेरा काम बहुत आसान कर दिया। सूर्य कुमार यादव बेहतरीन लीडर है। सूर्य को लीडर इसलिए कह रहा हूं कि क्योंकि वह ड्रेसिंग रूम और मैदान पर कप्तान से बड़ी शख्सियत होता है। सूर्य खुद को कप्तान की बजाय लीडर कहलाना पसंद करते हैं।’
सेमीफाइनल में संजू 88 और फाइनल में 89 रन बनाने के बाद छक्का जड़ने की कोशिश में आउट हो शतक जड़ने से चूक गए लेकिन उन्होंने कहा वह अपनी इस सोच से संतुष्ट थे। संजू की इन पारियों से भारत सेमीफाइनल और फाइनल, दोनों में ही 250 के पार पहुंचा। गंभीर ने कहा, ‘इस टी 20 विश्व कप जीतने राज इसी में छिपा था कि जब कोई बल्लेबाज 100 रन के करीब हो तो तब तब एक एक रन लेता या बाउंड्री जड़ता है। यदि कोई बल्लेबाज 94 रन पर खेल रहा है तो उसमें अगली गेंद पर छक्का जड़ने का जिगरा होना चाहिए बजाए इसके वह अपना शतक पूरा करने के लिए तीन या चार गेंद खेले। बतौर बल्लेबाज आप 96 रन से 100 जाने में चार गेंद खेलते तो आप अपनी टीम 20 रन पीछे कार देते है यही 10-20 रन ही टी 20 विश्व कप में जीत और हार में अहम हो जाते हैं। आप यदि 96 रन के स्कोर पर बड़ा स्ट्रोक खेलने की कोशिश में आउट भी हो जाते हैं तो कोई बात नहीं। हमारी टीम की सोच यही है कि आपकी 96 रन की पारी को उतना ही सराहा जाएगा। इसी सोच आपकी टीम बड़े स्कोर बना हमारे सकती है। ऐसा तभी मुमकिन है जब आप टीम को खुद से पहले रखते हैं। हमारी टीम में हर किसी ने खुद की बजाय टीम को ज्यादा तवज्जो दी। बतौर चीफ कोच और कप्तान हमारे पास तीन,चार, पांच संयोजन उपलब्ध थे। हम दो कलाई के स्पिनरों को एकादश में शामिल कर सकते थे या फिर हम आठवें नंबर तक बल्लेबाज को खिला सकते थे। शीर्ष पर हमारे पास तीन सलामी बल्लेबाजों के रहते हम किसी को कहीं भी खिला सकते थे। यह सिर्फ एक टीम को विरासत में पाना नहीं है, बल्कि अपनी खुद की एक नई टीम बनाना भी है। मैं बतौर कोच के हमेशा से यही करना चाहता था कि क्या हम बिल्कुल अलग शैली से क्रिकेट खेल सकते हैं। जहां लोग कह सकें कि यह वह टीम है जिसने लगातार बराबर रन बनाए हैं। बेहतर गेंदबाजी की है। यह टीम बेखौफ खिलाड़ियों का एक समूह है जो क्रिकेट का मैच हारने से नहीं डरता है।’
गंभीर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मुझे यह ट्रॉफी राहुल (द्रविड़) भाई और फिर लक्ष्मण को समर्पित करनी चाहिए। राहुल भाई ने भारतीय क्रिकेट को इतनी बढ़िया स्थिति में बनाए रखने के लिए जो कुछ भी किया है, उसके लिए मैं उन्हें उनके बतौर चीफ उनके कार्यकाल के दौरान किए गए हर काम के लिए उनका आभार जताना चाहता हूं। वीवीएस लक्ष्मण पर्दे के पीछे खासतौर पर नि:स्वार्थ भारतीय क्रिकेट के लिए जो कुछ भी योगदान किया और भारतीय क्रिकेट की पाइपलाइन सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (सीओए) के लिए जो कुछ भी योगदान किया उसके लिए उनका भी धन्यवाद करना चाहूंगा। तीसरे मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर का भी आभार जताना चाहूंगा जिन्होंने ईमानदारी से अपना काम करने के लिए बहुत आलोचना झेली। राहुल द्रविड़ के2024 में भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच का पद छोड़ने क बाद मेरे टीम इंडिया के चीफ कोच की जिम्मेदारी संभालने के बाद पूर्व बीसीसीआई मानद सचिव व मौजूदा आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने बतौर चीफ कोच मेरे शिखर पर पहुंचने में अहम भूमिका निभाई। मुझे आज भी याद जब मुझे भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी तो तब तक मुझे किसी फ्रेंचाइची व किसी टीम के चीफ कोच के रूप में कोई अनुभव नहीं था, लेकिन तब मुझ यह जिम्मेदारी दी और मैं इसके लिए उनका भी आभारी हूं। आखिर में जय (शाह) भाई को भी धन्यवाद दूंगा, क्योंकि बतौर चीफ कोच जब मैं न्यूजीलैंड सीरीज औार फिर दक्षिण अफ़्रीका सीरीज़ के बाद खासे मुश्किल दौर से गुजर रहा था तो बहुतेरे लोगों का मुझे फोन नहीं आया था लेकिन जिस एक व्यक्ति ने तब मुझे फोन किया वह जय भाई ही थे। मैं बतौर कोच मुझ पर भरोसा बनाए रखने के लिए जय भाई को धन्यवाद देना चाहूंगा, क्योंकि मुझे याद है कि जब मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी तब मेरे पास किसी फ़्रेंचाइजी के साथ भी चीफ कोच का अनुभव नहीं था। मेरा मानना है कि जब तक ये लोग हैं भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है।
गंभीर ने कहा,‘ यदि बड़ी कामयाबी पानी है तो टीम को बेखौफ क्रिकेट खेलनी होगी। पहली बात तो यह है कि मुझे खिलाड़ियों ने मजिताया है। मैं बराबर यह कह रहा हूं कि आप उतने ही अच्छे0 कोच होते हैं जितने अच्छे आपके खिलाड़ी होते हैं। इस खिताब जीत का श्रेय खिलाड़ियों को मिलना चाहिए। हमारे सभी खिलाड़ी एकदम पेशेवर तरीके से और बेखौफ पूरे जीवट के साथ टी 20 क्रिकेट विश्व कप में खेले। जैसा कि कप्तान सूर्य कहते हैं कि हम द्विपक्षीय सीरीज और आईसीसी टूर्नामेंटों, दोनों अलग-अलग तरह से खेलते थे। इस एक चीज़ को हम बदलना चाहते थे । मुझे भरोसा है कि सभी ने यह देखा भी होगा। यदि आप सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल में 250 से अधिक रन बना लेते हैं तो ये यह आपकी उत्कृष्टता के साथ उस जीवट को भी भी दिखाता है जिससे आपने टूर्नामेंट खेला है। टी 20 फ़ॉर्मेट में सबसे अहम बात यह है कि हम हारने से डरते नहीं हैं। आप हारने से डरते हैं तो कभी जीत नहीं पाते। मेरा हमेशा है कि टी 20 क्रिकेटमें ‘ जितना बड़ा जोखिम, उतना बड़ा इनाम’ सबसे अहम है। ऐसे में हम यदि110-120 पर आउट हो जाते तो भी मैं खुश रहता हूं। बावजूद इसके हमारा लक्ष्य हमेशा 250 रन बनाने का ही होता है। मेरे हिसाब से हम लंबे तक 160-170 रन वाली वाली क्रिकेट अब नहीं खेलना चाहते हैं। दक्षिण अफ़्रीका से हम 76 रन से हारे थे। लेकिन बावजूद इसके हमारी सोच कभी नहीं बदली। हमारा सोच वैसी ही रही। हमने कभी नहीं सोचा कि हमें थोड़ा संभलकर खेलना चाहिए। साफ तौर पर यदि कप्तान और कोच दोनों में तालमेल नहीं होगा तो यह मुमकिन नहीं है। कप्तान खुद बड़ा जोखिम, बड़ा इनाम‘ वाली क्रिकेट खेलना चाहते हैं। इसीलिए इसका श्रेय कप्तान को भी दिया जाना चाहिए।’





