भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया गुरिंदरवीर सिंह का नाम

Gurindervir Singh's name has been etched in golden letters in the history of Indian athletics

डॉ विजय गर्ग

भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में गुरिंदरवीर सिंह का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। उन्होंने 100 मीटर दौड़ में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर पूरे देश को गौरवान्वित किया। रांची में आयोजित नेशनल फेडरेशन कप 2026 में उन्होंने 10.09 सेकंड का समय निकालकर भारत के सबसे तेज धावक बनने का गौरव हासिल किया। वे 10.10 सेकंड से कम समय में 100 मीटर दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय बने।

प्रारंभिक जीवन

गुरिंदरवीर सिंह पंजाब के एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखते हैं। बचपन से ही उन्हें दौड़ने का शौक था। परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। लगातार अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

संघर्ष और मेहनत

गुरिंदरवीर की सफलता के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत छिपी है। शुरुआती दिनों में उन्हें आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पाईं, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास और लगन के दम पर खुद को मजबूत बनाया। उनकी तेज शुरुआत और फिनिशिंग स्पीड ने उन्हें अन्य धावकों से अलग पहचान दिलाई।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने का सफर

साल 2025 में गुरिंदरवीर सिंह ने पहली बार 10.20 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद 2026 के फेडरेशन कप में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 10.09 सेकंड का अद्भुत प्रदर्शन किया। यह भारतीय स्प्रिंट इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण माना गया।

भारतीय नौसेना में सेवा

गुरिंदरवीर सिंह भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर के रूप में भी सेवा दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर भारतीय नौसेना ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि “भारत का सबसे तेज आदमी सफेद वर्दी पहनता है।” उनकी सफलता यह दिखाती है कि भारतीय सशस्त्र बल खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में मिली प्रशंसा

उनकी ऐतिहासिक दौड़ के बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई। क्रिकेट के महान खिलाड़ी Sachin Tendulkar और उद्योगपति Anand Mahindra सहित कई प्रसिद्ध हस्तियों ने उन्हें बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें भारत का नया “फ्लाइंग सिख” कहकर सम्मान दे रहे हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा

गुरिंदरवीर सिंह की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से कोई भी व्यक्ति बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। एक छोटे से गांव से निकलकर भारत का सबसे तेज धावक बनना लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। आने वाले वर्षों में उनसे एशियाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और भी बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।