ओ पी उनियाल
देहरादून : यदि आप सचमुच प्रकृति प्रेमी हैं तो चले आइए हिमालय के ऑंचल में। तरह-तरह के हरे-भरे मखमली बुग्याल, हरियाली से लकदक ऊँचे-पहाड़, कल-कल करते गाड-गदेरे, झरनों की दहाड़, जंगलों में नाना प्रकार के पक्षियों की चहचहाट, हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं के अलावा आपकी ऑंखों को सुकून देने वाली वह घाटी जिसकी शायद आप सपनों में कल्पना जरूर करते होंगे। तो बस आपका इंतजार अब खत्म हो गया है। बस यूं समझिए आपका सपना पूरा हो चुका है। तैयारी कर लीजिए इस घाटी में महकती हवा का आनंद लेने के लिए। जी हां, हम बात कर रहे हैं विश्व विख्यात “फूलों की घाटी” की।
देश विदेश के पर्यटक अब चमोली जनपद स्थित फूलों की घाटी का दीदार कर सकेंगें। आज से नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान ने फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया है। अब पर्यटक घाटी में आवाजाही कर सकेंगे।
फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए किसी खजाने से कम नहीं मानी जाती। यहां बड़ी संख्या में हिमालयी जड़ी बूटियाँ और फूल पाए जाते हैं। घाटी की जैव विविधता को देखते हुए यूनेस्को द्वारा फूलों की घाटी को विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। घाटी के खुलने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी जून महीने के शुरुआती सप्ताह में घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। आमतौर पर यह घाटी अक्टूबर के अंत तक या बर्फबारी शुरू होने तक खुली रहती है। मानसून के आगमन के साथ यहां फूलों की बहार शुरू होती है, जो जुलाई से सितंबर के बीच अपने चरम पर पहुंचती है। इस दौरान ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता और कोबरा लिली समेत सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के फूल घाटी की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।
हां, यदि आप यहां आ रहे हैं या आ चुके हैं तो प्रकृति का सम्मान जरूर करें। जितना इसे सम्मान मिलेगा उससे ज्यादा आपको सुखद अनुभव का आभास कराएगी।





