तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव में हार जीत के बाद सभी पार्टियों में दे दना- दन

After the victory and defeat in the Tamil Nadu Assembly elections, all the parties are in a frenzy

अशोक भाटिया

तमिलनाडु में मदुरै (मदुराइस), धरमपुरी, पेरनदुरई, त्रिची पूर्व और अंबासमुद्रम की 5 विधानसभा सीटें हाल ही में विधायकों के इस्तीफे के कारण खाली हुई हैं। इन उपचुनावों में सभी की निगाहें टिकी हैं क्योंकि अभिनेता विजय की ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ के सत्ता में आने के बाद यह पहला बड़ा चुनावी परीक्षण होगा। तमिलनाडु में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करके सरकार बनाई है। इन 5 उपचुनावों के परिणामों का हार पार्टी के लिए अलग अलग है व अपनी पार्टी को सुर्ख़ियों बनाए रखने की जरुरत भी । 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत (118) के लिए सत्तारूढ़ टीवीके को कुछ और सीटों की आवश्यकता है, जिससे इन उपचुनावों में राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

तिरुचिरापल्ली में आयोजित रैली में विजय ने कहा कि त्रिची के लोगों का मैं विशेष रूप से धन्यवाद करता हूं। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? क्योंकि कानूनी तौर पर अब, वे मुझे पेरम्बूर का विधायक कहेंगे। लेकिन, मेरे दिल के बहुत करीब, त्रिची ही है। गौरतलब हो कि त्रिची ईस्ट सीट पर अब जल्द ही उप चुनाव होगा। राज्य में कुल पांच सीटों पर उपचुनाव होंगे। ऐसे में सीएम विजय के इस दौरे को अहम माना जा रहा था। सीएम विजय ने यह भी साफ किया कि मैं आप में से ही किसी कॉमन मैन को ही त्रिची से उम्मीदवार बनाऊंगा।

उधर दूसरी पार्टियों में उनके घर के अन्दर ही विधान सभा चुनाव के बाद से ही कुछ झगड़े या विवाद चालू है । सबसे पहले बात करें भाजपा की तो उसमें बगावत की बू आ रही है और मामला टूट तक पहुच गया है । कभी सूबे में भारतीय जनता पार्टी का सबसे आक्रामक और चमकता हुआ चेहरा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी के। अन्नामलाई के बारे में यह खबर उड़ रही है कि वह भाजपा का दामन छोड़ सकते हैं। मीडिया और सियासी हल्कों में यह दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई दिल्ली दरबार के कुछ फैसलों से बेहद खफा हैं, खासकर राज्य में क्षेत्रीय दलों के साथ पार्टी के नए तालमेल को लेकर। चर्चा तो यहां तक है कि वह जून के इसी हफ्ते में अपने अगले बड़े कदम का ऐलान कर सकते हैं और अपनी खुद की नई पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर वो कौन से समीकरण हैं, जिन्होंने पीएम मोदी के इस सबसे भरोसेमंद सिपाही को बगावत और नई राह चुनने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

सोशल मीडिया से लेकर चेन्नई के चाय के अड्डों तक यह अफवाह इस वक्त बेहद गर्म है कि अन्नामलाई अब किसी राष्ट्रीय पार्टी के अनुशासन के दायरे में बंधकर रहने के मूड में नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि अन्नामलाई के बेहद करीबी समर्थक और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर लगातार एक नई राजनीतिक लहर की बातें कर रहे हैं। यहां तक कि उनके प्रशंसक नई पार्टी के संभावित नाम, उसकी विचारधारा और तमिलनाडु की माटी से जुड़े कुछ खास प्रतीकों को भी आपस में शेयर कर रहे हैं।कहा जा रहा है कि जून के पहले या दूसरे हफ्ते में अन्नामलाई कोई बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। द्रविड़ राजनीति के इस मजबूत गढ़ में अपनी एक अलग और बेदाग पहचान बनाने वाले पूर्व आईपीएस के चाहने वाले भी यही चाहते हैं कि वह किसी केंद्रीय गाइडलाइन के नीचे काम करने के बजाय, तमिलनाडु के युवाओं की आवाज बनकर अपनी एक अलग क्षेत्रीय पार्टी खड़ी करें। अगर ऐसा होता है, तो यह दक्षिण भारत में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश में जुटी भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।

अन्नामलाई के भाजपा छोड़ने की अटकलों के पीछे जो सबसे बड़ी और ठोस वजह निकलकर सामने आ रही है, वो है राज्य के बड़े क्षेत्रीय दल एआईएडीएमके के साथ भाजपा के रिश्तों का उतार-चढ़ाव। अन्नामलाई शुरू से ही इस स्टैंड पर अड़े थे कि भाजपा को तमिलनाडु में बिना किसी बैसाखी के, अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ना चाहिए और द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान द्रविड़ पार्टियों की नीतियों पर जमकर तीखे हमले किए थे, जिससे राज्य के युवाओं में उनका क्रेज बढ़ा था।

अन्नामलाई स्वभाव से बेहद कड़क, स्वाभिमानी और लीक से हटकर राजनीति करने वाले नेता माने जाते हैं। कुछ समय पहले जब उनके साइडलाइन होने या पार्टी लाइन से अलग चलने की खबरें उड़ी थीं, तब उन्होंने मीडिया के सामने आकर बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह राजनीति में किसी पद या कुर्सी के लालच में नहीं आए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा था, “मैं जब तक अपनी मर्जी से और अपनी शर्तों पर राजनीति में रहना चाहूंगा, रहूंगा। जिस दिन मुझे लगेगा कि मैं कुछ नहीं बदल पा रहा, मैं वापस अपने गांव जाकर खेती करने लगूंगा।”

उनका यह पुराना तेवर साफ दिखाता है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाले इंसान नहीं हैं। मौजूदा समय में तमिलनाडु की सियासत में सिनेमा से राजनीति में आए जोसेफ विजय (विजय थलपति) की पार्टी टीवीके ने भी एक मजबूत तीसरी ताकत के रूप में हलचल मचा रखी है। ऐसे में अन्नामलाई को लगता है कि सूबे के युवाओं और द्रविड़-विरोधी वोटर्स के बीच उनके लिए अपनी खुद की जमीन तैयार करने का यह बिल्कुल सही मौका है। अब देखना यह है कि दिल्ली का बुलावा उन्हें रोकता है या ‘अन्ना’ अपनी नई राह चुनते हैं।

तमिलनाडु में भाजपा नेता अन्नामलाई द्वारा नई पार्टी बनाने की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री विजय ने भी एक बड़ा बयान दिया है। सोमवार को मुख्यमंत्री बनने के बाद टीवीके चीफ ने तिरुचिरापल्ली में पहली पब्लिक मीटिंग की। इस रैली में विजय ने डीएमके को निशाने पर लिया है। विजय ने कहा कि तमिलनाडु में अब सिर्फ मुकाबला दो दलों के बीच है। विजय ने कहा कि एक डीएमके और दूसरी टीवीके। विजय ने कहा कि इनमें बीच इनके बीच किसी और के लिए कोई भूमिका या जगह नहीं है। विजय के इस बयान के बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। एआईएडीएमके से विधायक टीवीके में गए हैं, लेकिन उन्होंने डीएमके पर हमला बोलकर साफ कर दिया है आने वाले दिनों में डीएमके नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज के मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि वे कह रहे थे कि छह महीने कुछ नहीं बोलेंगे लेकिन छठवें दिन ही शिकायत करने लगे। विजय ने कहा कि वे छह दिन भी नहीं टिक पाए। विजय ने तिरुचिरापल्ली की सभा में इमोशनल कार्ड भी खेला। टीवीके की जीत के बाद त्रिची पूर्व में खुद को जिताने के लिए उन्होंने लोगों का शुक्रिया अदा किया। जनसभा में इस इवेंट के प्रमुख के पी कृष्णन ने कहा कि आप त्रिची में वैसे ही आए हैं जैसे लोग चाहते हैं। यह दुनिया का चमत्कार है कि आप पार्टी शुरू करने के 2।5 साल में पावर में आ गए। सीएम विजय ने त्रिची में एक रोड शो भी किया। त्रिची सीट विजय के खाली करने से अब यहां उपचुनाव होगा।

उधर बताया जाता है कि आज तमिलनाडु में AIADMK के एक और बागी विधायक ने इस्तीफा दे दिया, इसी के साथ अब AIADMK के 4 विधायकों के इस्तीफे को विधानसभा में मंज़ूर कर लिया है। फ्लोर टेस्ट के दौरान AIADMK के 25 विधायक बागी हो गए थे, जिसमे से अब तक 4 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया, तमिलनाडु विधानसभा में AIADMK के 47 विधायको ने जीत हासिल की थी, लेकिन फ्लोर टेस्ट में 25 विधायकों ने पाला बदलते हुए विजय थलापति का साथ दिया। अगर AIADMK अपने बागी विधायकों पर दबाव बनाती है तो सभी बागी विधायक इस्तीफा दे सकते है, ये सब इसीलिए हो रहा है क्योंकि विजय थलापति की सरकार को देखते हुए इन्हे अपना भविष्य खतरे में नज़र आ रहा है ,ये सभी चलता रहा तो AIADMK पार्टी नाम तमिलनाडु में इतिहास बनकर रह जायेगा , AIADMK पूरी तरह से खत्म हो जाएगी ।।?

इस आपा धापी में कांग्रेस भी लाभ लेने में पीछे नहीं रहना चाहती । अब जब विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम राज्यसभा में एंट्री लेने की तैयारी में हैं उसकी इस योजना में साथी दल कांग्रेस रुकावट पैदा कर सकती है। दरअसल टीवीके सरकार में 5 विधायकों के साथ गठबंधन करने वाली कांग्रेस ने विजय के सामने इस राज्यसभा सीट की मांग रख दी है। यह इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इस इकलौती सीट पर होने वाले चुनावों के जरिए TVK संसद में डेब्यू करने की तैयारी में थी। हालांकि अब कांग्रेस ने अब इस सीट पर अपना दावा ठोककर विजय के सामने धर्मसंकट की स्थिति पैदा कर दी है।