मुशायरा जश्न – ए – आज़ादी संपन्न

'Jashn-e-Azadi' Mushaira Concludes

ऐ ग़ज़ल पास आ, गुनगुना लूं तुझे,
तू संवारे मुझे , मैं संवारूं तुझे।

रविवार दिल्ली नेटवर्क

दिल्ली : उर्दू अकादमी दिल्ली द्वारा हिन्दी भवन नई दिल्ली में भव्य मुशायरा जश्न – ए – आज़ादी आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात शायर दीक्षित दनकौरी ने की। अल्प संख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ़ रशीद मुख्य अतिथि और सहारा के ग्रुप एडिटर अब्दुल माजिद निज़ामी एवं शिक्षाविद फ़िरोज़ बख़्त विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। हिंदी भवन के खचाखच भरे ऑडिटोरियम में, ऐजाज़ अंसारी की शानदार निज़ामत में इकबाल अशहर ने पढ़ा –
नहीं है तेरी चमक में कोई कमी सूरज,
मैं ख़ुद वहाँ हूँ जहाँ रोशनी नहीं आती।
अलीना इतरत ने कहा –
अधूरी प्यास का चर्चा नहीं किया जाता,
ख़ुद अपनी ज़ात को रुसवा नहीं किया जाता।
खुर्शीद हैदर ने कहा –
न जाने कौन से लहजे में समझाया गया होगा,
वो ख़ुद आया नहीं होगा उसे लाया गया होगा।
अल्ताफ ज़िया ने पढ़ा –
सफ़र की इब्तिदा है और मैं हूँ,
मुख़ालिफ़ रास्ता है और मैं हूँ।
शकील आजमी ने चिर परिचित अंदाज़ में पढ़ा –
किसी काग़ज़, किसी तहरीर से पहले वाला,
गुमशुदा शे’र हूँ मैं मीर से पहले वाला।
हिमांशी बावरा ने पढ़ा –
अभी से ख़ुश नहीं होना अभी ज़ंजीर खोली है,
फ़क़त ज़ंजीर खुलने से कोई आज़ाद होता है।

जावेद मुशीरी का कहना था –
अपनी आँखों को गुनहगार नहीं कर सकता,
मैं किसी और का दीदार नहीं कर सकता।

दीक्षित दनकौरी ने अपने पुरकशिश तरन्नुम में ग़ज़ल का आवाह्न किया –
ऐ ग़ज़ल पास आ गुनगुना लूं तुझे,
तू सँवारे मुझे, मैं संवारूं तुझे।

सुंदर मालेगांवी, राही निज़ामी, वारिस वारसी,आमिर अज़हर, शाकिर देहलवी, शकील बरेलवी, निकहत अमरोहवी, रेशमा जैदी ने भी बाकमाल शायरी पेश करके वाह-वाही लूटी।

इस मौके पर अकादमी के सचिव लेखराज ने कहा कि उर्दू अकादमी हर साल जश्न-ए-आज़ादी के मौके पर मुशायरा आयोजित करके देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करती है। उन्होंने दिल्ली सरकार, ख़ास तौर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री कपिल मिश्रा की ओर से उर्दू अकादमी को मिल रहे सहयोग और प्रोत्साहन की सराहना की।

शिक्षाविद् फ़िरोज़ बख़्त ने कहा कि उर्दू प्यार, भाईचारे और आपसी मेल जोल की भाषा है। यह किसी एक धर्म या समुदाय की भाषा नहीं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति की भाषा है। अब्दुल माजिद निज़ामी ने कहा कि यह मुशायरा कई वज़हों से खास है। उन्होंने कहा कि मुशायरे की पुरानी परंपरा और उसकी गरिमा को फिर से मजबूत करने की ज़रूरत है।

मुख्य अतिथि आतिफ़ रशीद ने कहा कि ’हिंदी भवन में उर्दू का मुशायरा अपने आप में एक बहुत खूबसूरत मेल है। उन्होंने उर्दू के विकास के लिए सरकार और उर्दू प्रेमियों को मिलकर काम करने की ज़रूरत पर जोर दिया।

अंत में अतहर सईद ने सभी मेहमानों, शायरों, श्रोताओं, आयोजकों और कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया। मुशायरा जश्न-ए-आज़ादी, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ।