वंदना शर्मा की कहानियां पढ़ कर एहसास हुआ जिंदगी वाकई खूबसूरत है; हमें जीना आना चाहिए; जिजीविषा जीने की होनी चाहिए। हिम्मत, साहस, आत्मविश्वास हो तो वाकई जिंदगी खूबसूरत है यह वंदना शर्मा की कहानियों ने सिद्ध कर दिया। वंदना जी की पहली कहानी ऑनलाइन शॉपिंग पर करारा कटाक्ष है मिलजुल कर रहने की प्रेरणा और स्थानीय बाजार की बेकद्री पर करारा व्यंग्य है।
कैफे वाली मुलाकात में परिस्थितियों के ताने-बाने को स्वीकारना सबसे बड़ा सबक है। स्वाभिमान से जीना और बच्चों को जीना सिखाना, अदम्य साहस व खुद्दारी का पाठ पढ़ाती है।
ईश्वर की कृपा बहुत ही रुचिकर और खूबसूरत कहानी है जिस पर भगवान की कृपा है वह हर परिस्थिति से सहज गुजर जाता है।
समय का चक्र- विधि का लेखा सिर्फ विधाता ही जानता है। समय का पहिया चलता रहता है। बिन मेहनत सब लुट जाता है तीन पीढ़ियां ही अमीरी जी पाती हैं यदि निकम्मी हों तो बहुत सुंदर संदेश।
अपना घर -यह कहानी जिंदगी की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। नारी सशक्त कहां हुई; अभी पितृसत्ता कहां खत्म हुई… संवेदनीय कहानी है।
जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है – सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है जिंदगी को खुद खूबसूरत बनाना पड़ता है ऐसे ही घर को अपना घर बनाना पड़ता है खुशियां बिखरी पड़ी हैं लेकिन बटोरने के लिए हाथ बढ़ाना पड़ता है। हरियाली तीज के बहाने मीना ने पुरानी खिल खिलाती चहकती मीना को वापस पा लिया।
जिंदगी खूबसूरत है – महिलाओं को जागरूक करती सुंदर कहानी है। कभी वजन को लेकर, बीमारी को लेकर, अपने शरीर की कमियों को लेकर आत्मविश्वास खो देने वाली महिलाएं कैसे सजग हो, वापस अपनी शौकों से जुड़े और अपनी जिंदगी को खुशनुमा बना दूसरों के लिए उदाहरण बन जाए सब अपने हाथ में है।
औपचारिकता भरे रिश्ते- अपने हुए पराए। सच कहा लेकिन वंदना मम्मी पापा तो दुख में साथ ही देते हैं। मां तो कभी मुंह मोड़ ही नहीं सकती। बच्चे ही मुंह मोड़ते हैं… हो सकता है नए जमाने की मां ऐसी हों।
कर्म फल- जैसा बीज वैसा पेड़ सही कहा और जम्मू यात्रा में जम्मू और वैष्णो देवी की यात्रा का पूरा विवरण दे माता वैष्णो देवी तक पहुंचा दिया।
यादों का खजाना- बचपन की बातें बुढ़ापे में भी नहीं भूल पाते और ये बातें चेहरे पर मुस्कान बिखेर देती हैं।
चांदनी कहानी में अपनी बच्ची की खातिर चांदनी का घमंड टूट गया। बच्चे माता-पिता को सही राह दिखाते हैं। नियति का खेल- जो लिखा है वही होगा; सच कहा। चिड़चिड़ा -खूबसूरत कहानी है पत्नी के खुशनुमा व्यवहार ने ‘सुनो चिड़चिढ़े’ शब्दों की फुहार से गंभीर माहौल को हल्का कर दिया। यह छोटी-छोटी चुटकियां सीखने वाली हैं।
अनामिका -इस खूबसूरत कहानी में सखियों की सच्ची दोस्ती ने एक दूसरे को हौसले की उड़ान दी। तिरंगे की शान का उत्सव मनाया ही नहीं; महसूस किया गया।
होनी थी हो गई में विरोधाभासी व्यवहार के पति पत्नी की शादी भी खूब जमीं।
दोस्ती- परिवार सबसे पहला दोस्त होता है सही कहा। मोबाइल की लत- में बच्चों को गैजेट नहीं माता-पिता का समय चाहिए एकदम सही। ऐसे ही छोटी-छोटी ढेरों सीख देती जीवन के अनुभव की कहानियां हैं। हम सबको पढ़नी चाहिए और जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहिए।
समीक्षक नील मणि





