एआई बनाएगा भारत के माइनिंग सेक्टर को स्मार्ट
मुंबई/नई दिल्ली (अनिल बेदाग): भारत के माइनिंग और मेटल्स सेक्टर में टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ), ऑटोमेशन और विश्वसनीय डेटा बदलाव की नई इबारत लिख रहे हैं। फिकी के ‘डिजिटलीसैशन, एआई , आटोमेशन एंड टेक्नोलॉजी इंटेग्रेशन इन माइनिंग एंड मेटल्स ’ सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से खनन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा, “टेक्नोलॉजी, एआई और डिजिटलाइजेशन बेहतर निगरानी, पारदर्शी निर्णय और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन को सक्षम बनाकर माइनिंग सेक्टर को बदल सकते हैं।” उन्होंने डेटा को उद्योग और समाज के बीच भरोसे का सेतु बताया। रक्षा उत्पादन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दिनेश महुर ने कहा, “क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड मैटेरियल्स इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
फिकी नॉन-फेरस मेटल्स कमेटी के मेंटर एस.के. रूंगटा ने प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ड्रोन, ऑटोनॉमस उपकरण और एआई आधारित समाधानों को भविष्य की प्रतिस्पर्धा से जोड़ा।
वहीं डॉ. पंकज सतीजा ने स्पष्ट किया, “उद्देश्य सिर्फ ज्यादा टेक्नोलॉजी अपनाना नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए वास्तविक समस्याओं का समाधान और मापनीय परिणाम हासिल करना होना चाहिए।” सम्मेलन में उद्योग, सरकार, स्टार्टअप और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर डिजिटल माइनिंग के भविष्य पर चर्चा की।




